सावन 2026 शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में इससे पहले ही दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया गया है। हर साल सावन और भादौ के महीनों में उज्जैन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और इस बार भी लाखों भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है। इसी बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने संध्या आरती और शयन आरती के दर्शन के नियमों में अहम फेरबदल किया है, जिसका सीधा फायदा उन श्रद्धालुओं को मिलेगा जिन्हें अब तक बुकिंग न मिलने पर खाली हाथ लौटना पड़ता था।
कार्तिक मंडपम अब पूरी क्षमता से खुलेगा
नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर के कार्तिक मंडपम को अब उसकी पूरी क्षमता तक श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। पहले जितने भक्त यहां से आरती का चलित दर्शन कर पाते थे, उससे कहीं ज्यादा संख्या में भक्त अब रोजाना संध्या और शयन आरती के दौरान इस मंडपम से गुजरते हुए दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन ने साफ किया है कि इस बदलाव के पीछे मकसद यही है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित तरीके से बाबा महाकाल के दर्शन मिल सकें, बिना किसी अफरा-तफरी या लंबे इंतजार के।
बिना बुकिंग वालों को भी अब मिलेगा दर्शन का मौका
अब तक महाकाल मंदिर में संध्या और शयन आरती देखने के लिए भक्तों को पहले से बुकिंग करानी पड़ती थी और यह सुविधा सीमित संख्या में ही भक्तों को मिल पाती थी। रोजाना करीब 1200 श्रद्धालु गणेश मंडपम में बैठकर पूरी आरती देखने का पुण्य लाभ उठाते थे, जबकि बाकी श्रद्धालु बुकिंग न मिलने पर निराश होकर लौट जाते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह स्थिति बदल जाएगी। जिन भक्तों को आरती की बुकिंग नहीं मिलेगी, वे अब कार्तिक मंडपम से चलित दर्शन व्यवस्था के जरिए संध्या और शयन आरती का लाभ ले सकेंगे और बिना बुकिंग के भी खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा।
कार्तिक मंडपम में रुककर दर्शन नहीं कर पाएंगे भक्त
हालांकि इस नई व्यवस्था में एक बात साफ कर दी गई है कि श्रद्धालु कार्तिक मंडपम में रुककर आरती नहीं देख पाएंगे, बल्कि यहां से गुजरते हुए ही चलित दर्शन करना होगा। मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि सावन और भादौ के पावन महीनों में देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं और हर भक्त की यही इच्छा होती है कि उसे महाकाल की दिव्य संध्या आरती और शयन आरती का प्रत्यक्ष दर्शन करने का मौका मिले। श्रद्धालुओं की इसी भावना को समझते हुए मंदिर समिति ने यह विशेष व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत कार्तिक मंडपम को पूरी तरह खाली रखकर वहां से अधिक से अधिक भक्तों को आरती दर्शन कराया जाएगा।
टिकटधारी और प्रोटोकॉल दर्शन में कोई बदलाव नहीं
मंदिर समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि टिकटधारी श्रद्धालुओं और प्रोटोकॉल से जुड़े भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी, यानी इस वर्ग के भक्तों की सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की गई है। असल मकसद यह है कि सावन और भादौ में बढ़ने वाली भारी भीड़ के बीच सामान्य श्रद्धालुओं को भी बड़ी संख्या में आरती का दिव्य लाभ मिल सके, इसलिए पूरी दर्शन व्यवस्था को पहले से और ज्यादा सुव्यवस्थित बनाया गया है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से न सिर्फ भीड़ प्रबंधन आसान होगा, बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को भी निराश नहीं लौटना पड़ेगा और उन्हें बाबा महाकाल की आरती के दर्शन का पुण्य लाभ जरूर मिल सकेगा।











