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सावन से पहले आषाढ़ की मासिक शिवरात्रि पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानिए पूजा की सही तारीखधर्म
6 जुल॰ 2026, 8:05 am (45 दिन पहले)· 2

सावन से पहले आषाढ़ की मासिक शिवरात्रि पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानिए पूजा की सही तारीख

आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि की तिथि को लेकर बना असमंजस अब दूर हो गया है, इस बार निशिता काल के हिसाब से व्रत और पूजा 12 जुलाई को रखी जाएगी और इसी दिन वृद्धि व ध्रुव योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आने वाली मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ मानी जाती है, और इस बार आषाढ़ मास की यह शिवरात्रि खास संयोगों के साथ आ रही है। भक्त इस दिन व्रत रखकर विधि विधान से भोलेनाथ का अभिषेक और पूजन करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से महादेव प्रसन्न होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। ऐसा भी माना जाता है कि शिवजी की कृपा से जीवन की तमाम बाधाएं, कष्ट और नकारात्मकता दूर हो जाती है। उज्जैन के जाने माने ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने इस बार की मासिक शिवरात्रि की सही तारीख, बनने वाले शुभ योग और व्रत के लाभों को लेकर विस्तार से जानकारी दी है।

12 जुलाई को रखा जाएगा व्रत

वैदिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 12 जुलाई की रात 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 13 जुलाई की शाम 6 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि मासिक शिवरात्रि का व्रत निशिता काल यानी मध्यरात्रि के समय को ध्यान में रखकर तय किया जाता है, इसलिए चतुर्दशी तिथि रात में लगने की वजह से यह व्रत 12 जुलाई, रविवार के दिन ही रखा जाएगा।

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वृद्धि और ध्रुव योग का बन रहा दुर्लभ संयोग

इस बार की मासिक शिवरात्रि को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन एक साथ दो शुभ योग बन रहे हैं। 12 जुलाई को सुबह से लेकर रात तक वृद्धि योग रहेगा, और इसके समाप्त होते ही ध्रुव योग शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन यानी 13 जुलाई की शाम करीब 4 बजे तक बना रहेगा। ज्योतिष में वृद्धि और ध्रुव, दोनों ही योगों को शुभ कार्यों के लिए बेहद फलदायी माना जाता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा का असर और भी बढ़ जाता है।

पूजा विधि और मंत्रों का महत्व

आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार शिव मंत्रों का जाप शिवालय में बैठकर या फिर घर के पूर्व दिशा वाले हिस्से में बैठकर करना ज्यादा फलदायी माना गया है। पूजा पूरी होने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर फिर स्वयं भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। पूजा में शिव से जुड़े इन मंत्रों का जाप विशेष रूप से किया जाता है, ॐ त्रिदलं त्रिगुणाकारम त्रिनेत्रम च त्रिधायुतम्। त्रिजन्म पाप संहारम एक बिल्व शिवार्पणम।। इसके साथ ही ॐ शिवाय नमः, ॐ सर्वात्मने नमः, ॐ त्रिनेत्राय नमः, ऊं हराय नमः और ॐ इन्द्रमुखाय नमः जैसे मंत्रों का भी जाप किया जाता है।

श्रद्धा से व्रत रखने पर मिलता है यह फल

मान्यता है कि जो भक्त इस व्रत को पूरी श्रद्धा और भाव से करता है, उसके माता पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और खुद उसके भी सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत की महिमा ऐसी बताई गई है कि इसे करने वाला व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, अच्छी सेहत और संतान जैसे सुख प्राप्त करता है। यह भी माना जाता है कि इस व्रत को पूरे विधि विधान से करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

सवाल-जवाब

आषाढ़ मास की मासिक शिवरात्रि कब मनाई जाएगी?
निशिता काल के हिसाब से यह व्रत 12 जुलाई, रविवार को रखा जाएगा।
चतुर्दशी तिथि कब शुरू और कब खत्म होगी?
चतुर्दशी तिथि 12 जुलाई रात 10 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर 13 जुलाई शाम 6 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी।
इस बार की शिवरात्रि पर कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
12 जुलाई को सुबह से रात तक वृद्धि योग रहेगा, उसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा जो 13 जुलाई शाम करीब 4 बजे तक रहेगा।
शिव मंत्रों का जाप करने का सही तरीका क्या है?
शिवालय में या घर की पूर्व दिशा में बैठकर शिव मंत्रों का जाप करना ज्यादा फलदायी माना जाता है।
मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से क्या लाभ मिलते हैं?
मान्यता है कि इससे माता पिता के पाप नष्ट होते हैं, खुद के कष्ट दूर होते हैं और दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य व संतान जैसे सुख मिलते हैं।
यह जानकारी किसने दी है?
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने तिथि, शुभ योग और व्रत के लाभों की जानकारी दी है।
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