बद्रीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की रकम में हेरफेर की आशंका सामने आने के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बड़ा कदम उठाया है। बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल को फिलहाल मंदिर समिति के कामकाज से अलग कर दिया गया है और उन्हें मंदिर के प्रबंधन में किसी तरह का दखल न देने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी खुद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने दी है।
1 जुलाई को बदले गए 16 कैमरे
इस मामले में एक बेहद अहम जानकारी सामने आई है कि बद्रीनाथ धाम परिसर में लगे 16 सीसीटीवी कैमरे 1 जुलाई को बदल दिए गए थे। गौर करने वाली बात यह है कि इसके ठीक बाद ही दान और चढ़ावे में गड़बड़ी की बात सामने आई, जिससे कैमरे बदलने और चढ़ावे में हेरफेर के बीच सीधा संबंध होने की आशंका और गहरी हो गई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के एक कर्मचारी पर इस पूरे मामले में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पत्र
यह पूरा प्रकरण उस वक्त सामने आया जब एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इस पत्र में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी के कर्मचारियों पर मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की रकम में हेरफेर करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए गए थे। बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ स्थान है, इसलिए यहां गड़बड़ी की खबर फैलते ही तीर्थ पुरोहितों, स्थानीय हक-हकूकधारियों और राजनीतिक हलकों तक में हलचल मच गई। स्थानीय लोगों और पुरोहितों ने साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके, और जो भी दोषी पाया जाए उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने क्या बताया
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है, लेकिन फुटेज में अभी तक कुछ भी स्पष्ट या साफ नजर नहीं आया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इसके बावजूद विभाग की तरफ से जांच शुरू कर दी गई है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। यही सीईओ रांगड़ थे जिन्होंने प्रमोद नौटियाल को मंदिर समिति के कामकाज से दूर रखे जाने के फैसले की भी पुष्टि की।
आगे क्या होगा
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद इतने बड़े और आस्था से जुड़े धाम के भीतर से आखिर क्या सच बाहर आता है। श्रद्धालुओं, पुरोहितों और स्थानीय हक-हकूकधारियों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी, ताकि बद्रीनाथ धाम की पवित्रता और मंदिर प्रशासन पर लोगों का भरोसा बना रहे।













