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यमुना किनारे बसे इस गांव में हुआ था भगवान परशुराम का जन्म, जानें रेणुका धाम की पूरी कहानीधर्म
2 घंटे पहले· 1

यमुना किनारे बसे इस गांव में हुआ था भगवान परशुराम का जन्म, जानें रेणुका धाम की पूरी कहानी

आगरा से करीब 14 किलोमीटर दूर यमुना किनारे बसे रुनकता गांव को पहले रेणुका धाम कहा जाता था और मान्यता है कि यहीं त्रेता युग में भगवान परशुराम का जन्म हुआ था.

लक्ष्मी गुप्तालक्ष्मी गुप्ताअंक ज्योतिषी 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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आगरा से महज करीब 14 किलोमीटर दूर यमुना नदी के किनारे बसा एक छोटा सा गांव सदियों पुरानी एक बड़ी कहानी अपने भीतर समेटे हुए है. आज इस गांव को रुनकता के नाम से जाना जाता है, लेकिन पुराने समय में इसे रेणुका धाम कहा जाता था. मान्यता है कि यही वह पवित्र भूमि है जहां त्रेता युग में भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने जन्म लिया था.

महर्षि जमदग्नि की तपोभूमि

इतिहासकारों के मुताबिक रेणुका धाम को महर्षि भृगु के वंशज महर्षि जमदग्नि की तपोभूमि माना जाता है. श्रीमद्भागवत और हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में दर्ज कथाओं के अनुसार महर्षि जमदग्नि अपनी पत्नी माता रेणुका के साथ यमुना किनारे इसी आश्रम में रहा करते थे. यहीं वैशाख शुक्ल तृतीया, यानी अक्षय तृतीया के दिन माता रेणुका की कोख से भगवान परशुराम ने जन्म लिया. आगरा के इतिहासकार शैलेन्द्र सिंह बताते हैं कि जब परशुराम का जन्म हुआ था तो आसपास मौजूद सभी ऋषियों ने खुशियां मनाई थीं. उन्हीं क्षणों से इस भूमि को बेहद पवित्र और चमत्कारी मान लिया गया.

पिता की आज्ञा पर मां का वध

रेणुका धाम से जुड़ी सबसे चर्चित कथा परशुराम और उनकी मां रेणुका के बीच की है. मान्यता है कि एक दिन यज्ञ के लिए जल लाने में माता रेणुका से देरी हो गई. इससे नाराज महर्षि जमदग्नि ने अपने पुत्र परशुराम को आदेश दिया कि वे अपनी मां का सिर धड़ से अलग कर दें. पिता की आज्ञा मानते हुए परशुराम ने ऐसा कर भी दिया. बाद में जब महर्षि जमदग्नि प्रसन्न हुए तो उन्होंने परशुराम को वरदान दिया, जिसकी मदद से माता रेणुका को फिर से जीवित कर दिया गया. इसी घटना के चलते यह स्थान लोगों की आस्था में और गहराई से बस गया और इसे चमत्कारी भूमि माना जाने लगा.

रेणुका धाम से कैसे बना रुनकता

समय बीतने के साथ रेणुका धाम का नाम बोलचाल की भाषा में बदलता चला गया. लोग इसे धीरे धीरे रुनकता कहने लगे, जिसका मतलब निकाला जाता है ऋण कृत तीर्थ. यही वजह है कि आज ज्यादातर लोग इस गांव को रुनकता के नाम से ही पहचानते हैं, हालांकि क्षेत्र के कई बुजुर्ग और श्रद्धालु आज भी इसे रेणुका धाम कहना पसंद करते हैं. यमुना किनारे बसा यह इलाका इतिहास, आस्था और चमत्कार तीनों को अपने में समेटे हुए है.

18वीं सदी में बना भव्य मंदिर

वर्तमान में इस स्थान पर भगवान परशुराम का एक प्राचीन और भव्य मंदिर बना हुआ है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण ग्वालियर के महाराज जयाजी राव सिंधिया ने 18वीं सदी में करवाया था. इस मंदिर के दर्शन के लिए दूर दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. खासकर परशुराम जयंती के मौके पर यहां भारी संख्या में लोग जुटते हैं और यमुना में स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं. आगरा को पहले ही एक ऐतिहासिक नगरी के तौर पर जाना जाता रहा है, और रेणुका धाम इस पहचान को और मजबूत करता है. इतिहासकार शैलेन्द्र सिंह के मुताबिक यह क्षेत्र सिर्फ ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि बेहद पवित्र और चमत्कारी भी माना जाता है, जिसकी जड़ें सीधे त्रेता युग से जुड़ती हैं.

इसका आप पर असर

यह खबर मुख्य रूप से आस्था और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी है, इसलिए इसका असर सीमित लेकिन खास है.

  • भारत में: परशुराम जयंती जैसे मौकों पर देशभर से श्रद्धालु प्राचीन तीर्थ स्थलों की तलाश करते हैं, ऐसे में रेणुका धाम एक कम जाना पहचाना लेकिन महत्वपूर्ण गंतव्य बनकर उभर सकता है.
  • आगरा में: ताजमहल के लिए मशहूर आगरा आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के पास अब यमुना किनारे स्थित रुनकता यानी रेणुका धाम के रूप में घूमने और दर्शन का एक और ऐतिहासिक विकल्प है.

सवाल-जवाब

रेणुका धाम कहां स्थित है?
यह आगरा से करीब 14 किलोमीटर दूर यमुना नदी के किनारे बसे रुनकता गांव में स्थित है.
रेणुका धाम को अब किस नाम से जाना जाता है?
इसे अब रुनकता के नाम से जाना जाता है, हालांकि पुराने समय में इसे रेणुका धाम कहा जाता था.
भगवान परशुराम का जन्म कब हुआ माना जाता है?
मान्यता है कि उनका जन्म त्रेता युग में वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था.
परशुराम के माता-पिता कौन थे?
उनकी माता का नाम रेणुका और पिता का नाम महर्षि जमदग्नि था.
परशुराम ने अपनी मां का वध क्यों किया था?
मान्यता के अनुसार यज्ञ के लिए जल लाने में देरी होने पर पिता महर्षि जमदग्नि की आज्ञा से परशुराम ने ऐसा किया था, बाद में उन्हें फिर से जीवित कर दिया गया.
यहां का मंदिर किसने बनवाया था?
बताया जाता है कि यह मंदिर ग्वालियर के महाराज जयाजी राव सिंधिया ने 18वीं सदी में बनवाया था.
रेणुका धाम का नाम बदलकर रुनकता कैसे पड़ा?
बोलचाल की भाषा में रेणुका धाम धीरे धीरे रुनकता में बदल गया, जिसे ऋण कृत तीर्थ से जोड़ा जाता है.
श्रद्धालु यहां किस मौके पर बड़ी संख्या में आते हैं?
परशुराम जयंती के मौके पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना स्नान और पूजा के लिए आते हैं.
लक्ष्मी गुप्ता
लेखक के बारे मेंलक्ष्मी गुप्ताअंक ज्योतिषी
विशेषज्ञताभविष्यसूचक अंक ज्योतिष, समग्र उपचार पद्धतियाँ, रिश्ते एवं पारिवारिक ज्योतिष, आध्यात्मिक विकास

एक समर्पित अंक ज्योतिषी, जो अंक ज्योतिष की गणितीय बुनियाद और पारंपरिक ज्योतिषीय पांडुलिपियों के संरक्षण में विशेषज्ञता रखती हैं।

लक्ष्मी पारंपरिक वैदिक ज्योतिष की गहन सटीकता को परामर्श के एक आधुनिक, चिकित्सकीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ती हैं। उनका उद्देश्य अंक ज्योतिष को महज़ भविष्यवाणी से आगे बढ़ाकर आत्म-खोज और सचेत निर्णय लेने का एक सशक्त साधन बनाना है। संस्कृत अध्ययन और आधुनिक मनोविज्ञान की पृष्ठभूमि के साथ वे ऐसे परामर्श देती हैं जो सटीक भी हैं और संवेदनशील भी। चाहे आप करियर बदलाव से गुज़र रहे हों, रिश्तों में स्पष्टता चाहते हों या गहरे आध्यात्मिक उद्देश्य की तलाश में हों — लक्ष्मी सितारों की बुद्धिमत्ता से आपका रास्ता रोशन करती हैं।

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