मीन साप्ताहिक राशिफल 23-29 अगस्त: करियर, रिश्ते और वित्त के लिहाज से कैसा रहेगा यह सप्ताहमानसून में घर की छत पर उगाएं ये 5 खास सब्जियां, मचान बनाने की आसान तकनीकछपरा के किसान ने मूली की खेती से रचा इतिहास, 30 दिन में कमा रहे हैं बंपर मुनाफासिंह साप्ताहिक राशिफल 23-29 अगस्त: जानें करियर, प्यार और सेहत के लिए कैसा रहेगा यह सप्ताहबालोद का छोटा सा ठेला! मात्र सात हजार से शुरू किया काम, अब रोजाना हो रही तगड़ी कमाईबिना गॉडफादर और ट्रेनिंग के ऐसे छाए थे केके, सेल्समैन की नौकरी से लेकर संगीत की दुनिया के सिरमौर बनने की पूरी दास्तानआज का राशिफल 23 अगस्त 2026: जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक भाग्य और सटीक उपायतकिए क्यों हो जाते हैं पीले और गंदे, जानिए साफ करने के आसान और असरदार घरेलू तरीकेमुंबई के भूलेश्वर में बड़ा हादसा, विशाल गणेश प्रतिमा गिरने से दो लोगों की जान गई और पांच घायल12 साल की उम्र में देखा सपना और बन गईं मिसेज दिलीप कुमार, जानिए सायरा बानो की अनोखी प्रेम कहानी
गरुड़ पुराण में क्यों मना है दामाद का सास-ससुर को मुखाग्नि देनाधर्म
8 जुल॰ 2026, 10:34 pm (45 दिन पहले)· 4

गरुड़ पुराण में क्यों मना है दामाद का सास-ससुर को मुखाग्नि देना

गरुड़ पुराण के अनुसार दामाद का सास-ससुर के अंतिम संस्कार से जुड़ा होना वर्जित क्यों है, जानिए इसके पीछे की धार्मिक और सामाजिक वजहें।

सनातन धर्म की परंपराओं में जीवन के अंतिम पड़ाव और मृत्यु के पश्चात के कर्मकांडों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इन्हीं मान्यताओं में एक विशेष नियम यह भी है कि दामाद को अपने सास-ससुर के अंतिम संस्कार में सम्मिलित होकर अर्थी को कंधा नहीं देना चाहिए। गरुड़ पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों में भी इस व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। यह परंपरा केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक कारण और सामाजिक दृष्टिकोण छिपे हुए हैं।

गरुड़ पुराण और मृत्यु संस्कार

गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा, यमलोक के मार्ग, कर्मों के आधार पर मिलने वाले परिणामों और मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों का विस्तार से वर्णन है। शास्त्र यह स्पष्ट करते हैं कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया केवल दिवंगत व्यक्ति के अपने कुल या वंश के सदस्यों द्वारा ही संपन्न की जानी चाहिए। इस ग्रंथ के अनुसार, दामाद को सास-ससुर की अर्थी को कंधा देने या मुखाग्नि देने की अनुमति नहीं दी गई है।

ये भी पढ़ें

प्रेत खंड की मान्यता

गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में दामाद के प्रति सम्मान का विशेष भाव व्यक्त किया गया है। धार्मिक शास्त्रों में 'जमाई' शब्द को यमराज से जोड़कर देखा जाता है, इसीलिए दामाद को एक अत्यंत सम्मानित व्यक्ति माना गया है। ग्रंथों के अनुसार, सास-ससुर का कर्तव्य है कि वे अपने दामाद के साथ सदा आदरपूर्ण व्यवहार रखें। यदि सास-ससुर अपने दामाद का अपमान करते हैं या उनके साथ अनुचित बर्ताव करते हैं, तो मृत्यु के उपरांत उन्हें परलोक की यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसी सम्मानजनक पद के कारण उन्हें दाह-संस्कार की प्रक्रिया में शामिल करने से मना किया गया है।

अधिकार और वंश परंपरा

अंतिम संस्कार के अधिकारों के संबंध में गरुड़ पुराण यह स्पष्ट करता है कि केवल उसी वंश या गोत्र के सदस्य इस दायित्व को निभा सकते हैं जिनसे दिवंगत व्यक्ति का प्रत्यक्ष रक्त संबंध हो। हिंदू धर्मशास्त्रों में बेटी और दामाद को उस परिवार का सदस्य नहीं माना जाता, जिस कुल में उनका विवाह हुआ है। इस कारण से परंपरागत रूप से दामाद का अंतिम संस्कार में भाग लेना उचित नहीं माना गया है।

पुत्र का अभाव होने पर क्या करें

शास्त्रों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पुत्र या पौत्र न हों, तो ऐसी स्थिति में वंश आगे बढ़ाने की प्रक्रिया और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी बेटी के पुत्र यानी नाती को दी गई है। नाती को नानी के श्राद्ध और अन्य पितृ कर्मों का आधिकारिक उत्तराधिकारी माना जाता है। यह व्यवस्था वंश की निरंतरता और परंपरा को बनाए रखने के उद्देश्य से निर्मित की गई है।

सामाजिक बदलाव का प्रभाव

वर्तमान समय में समाज और परिवार के ढांचे में व्यापक परिवर्तन आए हैं। कई परिवारों में पुत्रों का अभाव है या पारिवारिक सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण अंतिम संस्कार की रस्में संपन्न करने वाला कोई अन्य वंशज उपलब्ध नहीं होता है। ऐसे में बेटी, दामाद या अन्य निकटतम रिश्तेदार मानवीय संवेदनाओं और कर्तव्य के नाते अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। आज के समय में अधिकांश परिवार अपनी परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार इन परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

दामाद को अंतिम संस्कार क्यों नहीं करना चाहिए?
गरुड़ पुराण के अनुसार दामाद को दूसरे कुल का सदस्य माना गया है, और अंतिम संस्कार करने का अधिकार केवल उसी वंश के सदस्यों का है जिससे व्यक्ति का रक्त संबंध हो।
क्या दामाद को अंतिम संस्कार में शामिल होने की मनाही है?
धार्मिक मान्यताओं में दामाद को यम का स्वरूप मानकर विशेष सम्मान दिया गया है, इसलिए उन्हें अर्थी को कंधा देने जैसी क्रियाओं से दूर रहने को कहा गया है।
अगर परिवार में बेटा न हो तो अंतिम संस्कार कौन कर सकता है?
यदि बेटा या पौत्र न हो, तो बेटी का पुत्र यानी नाती अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म करने का अधिकारी माना गया है।
क्या आज के समय में इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है?
वर्तमान में सामाजिक परिस्थितियां बदल गई हैं। यदि परिवार में कोई अन्य वंशज उपलब्ध नहीं है, तो आज के समय में दामाद या अन्य करीबी रिश्तेदार मानवीय आधार पर यह जिम्मेदारी निभाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR