उज्जैन महाकाल में भस्म आरती के दिव्य दर्शन, अब त्रिनेत्र प्रोजेक्ट और AI कैमरों से लैस हुआ मंदिरधर्म
2 घंटे पहले· 0

उज्जैन महाकाल में भस्म आरती के दिव्य दर्शन, अब त्रिनेत्र प्रोजेक्ट और AI कैमरों से लैस हुआ मंदिर

14 जून 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के साथ बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार हुआ, वहीं मंदिर की सुरक्षा अब 500 हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और AI तकनीक से और स्मार्ट हो गई है।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार, 14 जून 2026 की सुबह भस्म आरती का दिव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया और भक्तों को भस्म आरती के अलौकिक दर्शन का सौभाग्य मिला। तड़के से ही श्रद्धालु कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे और दर्शन कर बाबा का आशीर्वाद लिया।

भक्ति में डूबा मंदिर परिसर

आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर 'हर हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मान्यता है कि महाकाल की यह भस्म आरती सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक भर नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति का बड़ा स्रोत भी है। यही वजह है कि धार्मिक नगरी उज्जैन के इस विश्व प्रसिद्ध दरबार में हर दिन हजारों की संख्या में भक्त उमड़ते हैं।

आस्था के साथ अत्याधुनिक सुरक्षा भी

महाकालेश्वर मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं रहा, यह आधुनिक सुरक्षा तकनीक की मिसाल भी बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हाईटेक निगरानी तंत्र खड़ा किया गया है। परिसर में करीब एक हजार सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं और इनके साथ 500 हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे 24 घंटे चौकसी करते हैं। प्रवेश द्वार से लेकर दर्शन मार्ग, गर्भगृह के आसपास और निकास क्षेत्र तक हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाती है, ताकि भक्तों को सुरक्षित और सुगम दर्शन का अनुभव मिले।

कैमरों की निगाह में हर हलचल

मंदिर की सुरक्षा अब पूरी तरह हाईटेक हो चुकी है, जिसमें सुरक्षाकर्मियों के साथ कैमरे भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। परिसर में लगे करीब 500 हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे हर व्यक्ति की हरकत पर पैनी नजर रखते हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचती है। किसी भी संदिग्ध हरकत, अव्यवस्था या आपात स्थिति की भनक लगते ही सुरक्षा दल तुरंत हरकत में आ जाता है। मंदिर का 'त्रिनेत्र प्रोजेक्ट' इसी डिजिटल नवाचार का बेहतरीन नमूना है, जिसे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में उत्कृष्ट नागरिक केंद्रित डिजिटल पहल के रूप में सम्मानित किया जाएगा।

अब फेस रिकग्निशन और AI भी संभालेगा कमान

उज्जैन के कलेक्टर और मंदिर समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह के मुताबिक, मंदिर की सुरक्षा को और स्मार्ट बना दिया गया है। नए हाईटेक कैमरे सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनमें चेहरे की पहचान (फेस रिकग्निशन), वाहन नंबर ट्रैकिंग और AI आधारित भीड़ विश्लेषण जैसी क्षमताएं भी मौजूद हैं। परिसर में कहीं भी कोई संदिग्ध गतिविधि, असामान्य भीड़भाड़ या सुरक्षा जोखिम बनते ही कंट्रोल रूम को फौरन अलर्ट मिल जाएगा, जिससे त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।

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