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सेतु निर्माण के लिए हनुमान जी उठा लाए थे गोवर्धन पर्वत, फिर अचानक क्यों बदल गई पूरी कहानीअध्यात्म
2 घंटे पहले· 3

सेतु निर्माण के लिए हनुमान जी उठा लाए थे गोवर्धन पर्वत, फिर अचानक क्यों बदल गई पूरी कहानी

त्रेता युग में समुद्र पर सेतु बनाने के दौरान हनुमान जी गोवर्धन पर्वत को भी उठा लाए थे, लेकिन बीच रास्ते में ही उन्हें पर्वत को वहीं छोड़ना पड़ा। जानिए वह पौराणिक प्रसंग जिसकी वजह से द्वापर युग में श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की।

राजेश कुमारराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित ब्रज क्षेत्र को हर युग की पौराणिक कथाओं का गवाह माना जाता है। यहां के गोवर्धन पर्वत से जुड़ी कहानियां सिर्फ द्वापर युग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि त्रेता युग में भगवान राम के समय की एक दिलचस्प घटना भी इसी पर्वत से जुड़ी हुई है। गोवर्धन के दानघाटी मंदिर के पुजारी हर्षवर्धन कौशिक ने इस पौराणिक प्रसंग को विस्तार से साझा किया, जिसमें हनुमान जी और गिर्राज पर्वत के बीच हुई एक अनोखी बातचीत का जिक्र मिलता है।

द्वापर में कृष्ण ने उठाया था गोवर्धन पर्वत

ब्रज क्षेत्र में भगवान की लीलाओं के कई किस्से प्रचलित हैं। द्वापर युग में श्री कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से बृजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी एक ऊंगली पर उठा लिया था। यह लीला ब्रज की सबसे मशहूर कथाओं में गिनी जाती है। लेकिन इसी पर्वत का एक और प्रसंग त्रेता युग में भगवान राम के समय से जुड़ा हुआ है, जो अपेक्षाकृत कम लोगों को पता है।

सेतु निर्माण के लिए वानर सेना निकली पर्वतों की खोज में

हर्षवर्धन कौशिक के अनुसार, जब भगवान राम को लंका पर चढ़ाई के लिए समुद्र पर सेतु बनाना था, तो रास्ते में बाधा बने समुद्र को पार करने के लिए पेड़, पत्थर और पहाड़ों की जरूरत पड़ी। भगवान राम ने अपनी वानर सेना को आदेश दिया कि सभी दिशाओं में जाकर पर्वत लेकर आएं। इस आदेश के बाद सभी वानर अलग-अलग दिशाओं की ओर निकल पड़े। हनुमान जी भी इसी खोज में पर्वतों की तलाश में निकल पड़े।

गोवर्धन पर्वत ने हनुमान जी से पूछा, आप कौन हैं

अपनी खोज के दौरान हनुमान जी गोवर्धन पहुंचे और वहां गोवर्धन पर्वत को देखा। उन्होंने पर्वत को उठाने की कोशिश की। इसी दौरान गोवर्धन पर्वत ने हनुमान जी से सवाल किया कि वह कौन हैं और उसे क्यों उठाना चाहते हैं। इस पर हनुमान जी ने हाथ जोड़कर गोवर्धन पर्वत को पूरी बात बताई। उन्होंने कहा कि वह उसे भगवान राम की सेवा और उनके दर्शन के लिए ले जा रहे हैं। यह सुनकर गोवर्धन पर्वत ने खुद अपना भार हल्का कर दिया, ताकि हनुमान जी उसे आसानी से उठा सकें।

सेतु बनकर तैयार हुआ, वापस रखना पड़ा पर्वत

हनुमान जी जैसे ही गोवर्धन पर्वत को लेकर आगे बढ़े, उन्हें खबर मिली कि समुद्र पर सेतु का निर्माण पूरा हो चुका है। अब पर्वत की जरूरत नहीं रह गई थी। इसलिए हनुमान जी ने गोवर्धन पर्वत को उसी स्थान पर वापस रख दिया, जहां से वह उसे उठाकर लाए थे।

गिर्राज पर्वत ने दी श्राप की चेतावनी

पर्वत को वापस रखे जाने पर गोवर्धन पर्वत ने हनुमान जी से फिर सवाल किया। उसने कहा कि आप तो मुझे भगवान के दर्शन के लिए ले जा रहे थे, अब मुझे भी अपने साथ ले चलिए। पर्वत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर हनुमान जी ने उसे भगवान के दर्शन नहीं कराए, तो उन्हें मिथ्यावादी होने का श्राप लग जाएगा। यह सुनकर हनुमान जी चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान राम का ध्यान किया, ताकि इस श्राप से बचा जा सके।

भगवान राम ने द्वापर में गिर्राज पूजा का दिया वचन

हनुमान जी की प्रार्थना सुनकर भगवान राम ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। भगवान राम ने वचन दिया कि जब वह द्वापर युग में अवतार लेंगे, तब वह स्वयं गोवर्धन पर्वत यानी गिर्राज पर्वत की पूजा करेंगे और गिर्राज महाराज को अपने दर्शन देंगे। मान्यता है कि इसी वचन को पूरा करने के लिए द्वापर युग में श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की और उसे बृजवासियों की रक्षा के लिए अपनी ऊंगली पर उठाया।

यही वजह है कि गोवर्धन पर्वत को त्रेता और द्वापर, दोनों युगों में भगवान से जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रद्धालु आज भी गोवर्धन की परिक्रमा करते हुए इस मान्यता का स्मरण करते हैं कि यह पर्वत भगवान राम के वचन और श्री कृष्ण की भक्ति, दोनों का साक्षी रहा है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: यह पौराणिक प्रसंग भगवान राम और श्री कृष्ण की भक्ति को आपस में जोड़ता है, जिससे देशभर के श्रद्धालुओं के लिए त्रेता और द्वापर युग की कथाओं को समझने का एक नया पहलू सामने आता है।
  • मथुरा में: गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु अब इस कथा को भी अपनी यात्रा से जोड़ सकते हैं, जिससे स्थानीय धार्मिक पर्यटन को और मान्यता मिलती है।

सवाल-जवाब

हनुमान जी गोवर्धन पर्वत को क्यों उठाना चाहते थे?
भगवान राम ने लंका तक सेतु बनाने के लिए वानर सेना को पर्वत लाने का आदेश दिया था, इसी खोज में हनुमान जी गोवर्धन पहुंचे थे।
गोवर्धन पर्वत ने हनुमान जी से क्या सवाल किया?
गोवर्धन पर्वत ने पूछा कि वह कौन हैं और उसे क्यों उठाना चाहते हैं, जिसके बाद हनुमान जी ने उसे पूरी बात बताई।
हनुमान जी ने गोवर्धन पर्वत को वापस क्यों रख दिया?
जब तक हनुमान जी पर्वत को लेकर चले, तब तक समुद्र पर सेतु का निर्माण पूरा हो चुका था, इसलिए पर्वत की जरूरत नहीं रही।
गिर्राज पर्वत ने हनुमान जी को किस श्राप की चेतावनी दी थी?
पर्वत ने कहा कि अगर उसे भगवान के दर्शन नहीं कराए गए, तो हनुमान जी को मिथ्यावादी होने का श्राप लग जाएगा।
भगवान राम ने हनुमान जी को इस श्राप से बचाने के लिए क्या वचन दिया?
भगवान राम ने कहा कि द्वापर युग में अवतार लेने पर वह स्वयं गिर्राज पर्वत की पूजा करेंगे और उसे अपने दर्शन देंगे।
यह पौराणिक कथा किसने साझा की?
गोवर्धन के दानघाटी मंदिर के पुजारी हर्षवर्धन कौशिक ने यह प्रसंग विस्तार से बताया।
द्वापर युग में श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा क्यों की थी?
मान्यता है कि यह भगवान राम द्वारा त्रेता युग में गिर्राज पर्वत को दिए गए वचन को पूरा करने के लिए हुआ, साथ ही इसी लीला से बृजवासियों को इंद्र के प्रकोप से भी बचाया गया।
राजेश कुमार
लेखक के बारे मेंराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता पटना
विशेषज्ञताभारत समाचार, राजनीति, सरकारी नीति, अर्थव्यवस्था, ब्रेकिंग न्यूज़, संसद, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, बुनियादी ढाँचा, राष्ट्रीय मामले

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो पूरे भारत की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़ी घटनाओं को कवर करते हैं। वे राष्ट्रीय मामलों पर समय पर और भरोसेमंद रिपोर्टिंग देते हैं।

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो भारत की राष्ट्रीय ख़बरों — राजनीति, शासन, अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और देशभर की बड़ी घटनाओं — में विशेषज्ञता रखते हैं। वे भारत के राजनीतिक परिदृश्य, नीतिगत फ़ैसलों, आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक बदलावों को आकार देने वाली प्रमुख घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, गहराई और संतुलित रिपोर्टिंग पर ज़ोर देते हुए राजेश अहम राष्ट्रीय मुद्दों और नागरिकों पर उनके असर का गहन विश्लेषण देते हैं। उनकी कवरेज में सरकारी योजनाएँ, संसदीय मामले, चुनाव, क्षेत्रीय घटनाक्रम और भारत के महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक रुझान शामिल हैं।

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#अध्यात्म#गोवर्धनपर्वत#हनुमानजी#भगवानराम#श्रीकृष्ण#मथुरा#दानघाटीमंदिर#पौराणिककथा

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