ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 (CWG 2026) में भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 54 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस रोमांचक मुकाबले में कनाडा की स्कारलेट सवाना डेलगाडो को पराजित कर प्रीति ने प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाजी दल का खाता स्वर्णिम पदक के साथ खोला।
रिंग में प्रीति का दबदबा और रक्षात्मक रणनीति
फाइनल मैच के शुरुआती दो राउंड में प्रीति पवार ने अपनी सटीक पंचिंग और बेहतरीन रिंग मूवमेंट के बल पर मजबूत बढ़त बना ली थी। तीसरे और अंतिम राउंड में कनाडाई मुक्केबाज स्कारलेट सवाना डेलगाडो ने आक्रामक रुख अपनाते हुए जोरदार वापसी का प्रयास किया और भारतीय खिलाड़ी पर लगातार दबाव बनाया। हालांकि, प्रीति ने दबाव के क्षणों में असाधारण संयम का परिचय दिया। उन्होंने अपनी बढ़त को अंत तक सुरक्षित रखा और मुकाबला जीतकर भारत के नाम पहला बॉक्सिंग गोल्ड किया।
बीमारी से उबरकर स्वर्ण पदक तक का सफर
प्रीति पवार का यह पदक कई मायनों में ऐतिहासिक है। इससे पहले हेपेटाइटिस बीमारी की चपेट में आने के कारण उनका ओलंपिक खेलने का सपना टूट गया था। इस बड़े झटके के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पूरी ताकत राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में लगा दी। प्रीति की मां ने इस जीत के बाद भावुक होकर बताया कि शुरुआती दिनों में परिवार मुक्केबाजी को लेकर सहज नहीं था और उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। मुक्केबाजी के अलावा प्रीति को खाली समय में स्केचिंग और ड्राइंग करने का भी विशेष शौक है।
ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा
प्रीति पवार की इस सफलता के अलावा भारतीय दल का प्रदर्शन ग्लासगो में लगातार शानदार बना हुआ है। मुक्केबाजी में ही जैस्मिन लांबोरिया ने अपने फाइनल मुकाबले में वाल्श को 5-0 से हराकर दिन का दूसरा स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला। इसके अतिरिक्त जूडो में अस्मिता दे और हर्ष सिंह ने भारत को दोहरा स्वर्ण दिलाया। जादूमणि, प्रिया और अरुंधति चौधरी जैसे मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत के कुल पदकों की संख्या 13 के पार पहुंच गई है।



















