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एशियन गेम्स में कुराश मुकाबले संचालित करने वाली देश की पहली महिला रेफरी बनेंगी मंजू नयाल, गाजियाबाद से तय किया फर्श से अर्श तक का सफरखेल
16 सित॰ 2026, 6:18 pm (1 घंटे पहले)· 0

एशियन गेम्स में कुराश मुकाबले संचालित करने वाली देश की पहली महिला रेफरी बनेंगी मंजू नयाल, गाजियाबाद से तय किया फर्श से अर्श तक का सफर

गाजियाबाद की मंजू नयाल जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में कुराश खेल की रेफरी बनकर इतिहास रचने जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली मंजू नयाल ने खेल जगत में एक नया इतिहास रच दिया है। कभी खुद खिलाड़ी के तौर पर देश के लिए मेडल जीतने का ख्वाब देखने वाली मंजू अब दुनिया के बड़े मंच पर रेफरी की भूमिका में नजर आएंगी। उन्हें जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। वह वहां कुश्ती और मार्शल आर्ट की विधा से जुड़े खेल कुराश में इंटरनेशनल टेक्निकल ऑफिशियल यानी रेफरी की अहम जिम्मेदारी संभालेंगी। इस मुकाम पर पहुंचने के साथ ही मंजू नयाल यह प्रतिष्ठित गौरव हासिल करने वाली देश की पहली महिला रेफरी बन गई हैं। वर्तमान में वह गाजियाबाद के डासना में स्थित गुरुकुल द स्कूल में फिजिकल एजुकेशन कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रही हैं।

जूडो खिलाड़ी से कोच और थ्री-स्टार रेफरी बनने का सफर

मंजू नयाल का खेलों से जुड़ाव एक खिलाड़ी के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने सबसे पहले जूडो के मैदान पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे उन्होंने खेलों में कोचिंग देना शुरू किया। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि खेल की बारीक तकनीकी समझ के बिना न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिए जा सकते। इसी समझ ने उन्हें रेफरी बनने के लिए प्रेरित किया। अपनी कड़ी मेहनत, अटूट प्रतिबद्धता और शानदार तकनीकी अनुभव के बल पर आज वह कुराश खेल में थ्री-स्टार रेफरी के पद तक पहुंच चुकी हैं। एशियन गेम्स जैसे विशाल वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बेहद गर्व की बात है। एशियन गेम्स में इस बड़ी भूमिका को लेकर मंजू का कहना है कि यह जिम्मेदारी जितनी सम्मानजनक है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। एक रेफरी को लगातार यह देखना होता है कि खिलाड़ी ने किस तकनीक का इस्तेमाल किया, उस तकनीक पर कितना स्कोर मिलना चाहिए और उसका प्रदर्शन नियमों के तहत कितना सही था। चूंकि खिलाड़ियों का पूरा करियर और भविष्य रेफरी के फैसलों पर निर्भर करता है, इसलिए जापान में उनका पूरा ध्यान पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और सही निर्णयों के साथ मैच संचालित करने पर रहेगा।

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परिवार का मजबूत साथ और रिश्तों के अनूठे रूप

मंजू इस शानदार सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार को देती हैं। उनके इस लंबे सफर में उनके पति, दोनों बेटियों और उनकी सास ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया है। जब उनके चयन की आधिकारिक खबर घर पहुंची, तो पूरे परिवार में जश्न का माहौल बन गया। वहीं स्कूल में भी उनके साथी शिक्षकों और कर्मचारियों ने उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। मंजू का मानना है कि यदि परिवार का सहयोग न होता, तो उनके लिए घरेलू जिम्मेदारियों के साथ इस मुकाम तक पहुंचना नामुमकिन था। मंजू के घर में खेलों का माहौल इस कदर रचा-बसा है कि उनकी बड़ी बेटी भी कुराश की नेशनल खिलाड़ी है। इसी वजह से खेल केवल उनकी नौकरी नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। वह बताती हैं कि उनकी बेटी के साथ उनके तीन अलग-अलग रिश्ते हैं। घर के भीतर वह केवल एक मां होती हैं, स्कूल के परिसर में उनकी बेटी उन्हें मैम कहकर बुलाती है, और जब वे दोनों टूर्नामेंट के मैदान पर होती हैं, तो बेटी उन्हें एक निष्पक्ष रेफरी के रूप में देखती है।

जापान दौरे की तैयारी और बेटियों के लिए प्रेरक संदेश

जापान के इस महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना होने से पहले मंजू जहां एक तरफ बेहद उत्साहित हैं, वहीं देश का प्रतिनिधित्व करने के कारण थोड़ा दबाव भी महसूस कर रही हैं। वह 21 सितंबर को जापान के लिए अपनी उड़ान भरेंगी और वहां अपना दायित्व पूरा करने के बाद 1 अक्टूबर को भारत लौटेंगी। मंजू का समाज के लिए एक बेहद स्पष्ट और प्रेरक संदेश है। उनका कहना है कि बेटियों को लोगों की नकारात्मक बातों से घबराकर कभी भी अपने सपनों को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। अगर माता-पिता और परिवार का साथ मिले, तो बाहर के लोगों की टिप्पणियों को आसानी से नजरअंदाज कर आगे बढ़ा जा सकता है। वह अभिभावकों से विशेष अपील करती हैं कि वे अपनी बेटियों के साथ-साथ बेटों को भी खेलों से जरूर जोड़ें। उनका मानना है कि पढ़ाई जितनी महत्वपूर्ण है, बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए खेल भी उतने ही आवश्यक हैं क्योंकि खेल बच्चों को शारीरिक रूप से फिट, स्वस्थ और मानसिक रूप से आत्मविश्वासी बनाते हैं।

सवाल-जवाब

मंजू नयाल कौन हैं और उन्होंने क्या ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है?
मंजू नयाल गाजियाबाद की एक खेल विशेषज्ञ हैं, जो जापान में होने वाले एशियन गेम्स-2026 में कुराश खेल के लिए चुनी जाने वाली भारत की पहली महिला रेफरी बनी हैं।
मंजू नयाल वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?
वह वर्तमान में गाजियाबाद के डासना में स्थित गुरुकुल द स्कूल में फिजिकल एजुकेशन कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रही हैं।
मंजू नयाल ने अपने खेल करियर की शुरुआत कैसे की थी?
उन्होंने अपने खेल सफर की शुरुआत एक जूडो खिलाड़ी के रूप में की थी, जिसके बाद वह कोच बनीं और फिर कुराश खेल में थ्री-स्टार रेफरी का दर्जा हासिल किया।
मंजू नयाल अपने रेफरी दायित्व के लिए जापान कब रवाना होंगी?
वह 21 सितंबर को जापान के लिए रवाना होंगी और अपना कर्तव्य पूरा करके 1 अक्टूबर को भारत वापस लौटेंगी।
मंजू नयाल के परिवार की खेल पृष्ठभूमि क्या है?
उनका परिवार खेल से गहराई से जुड़ा है और उनकी बड़ी बेटी भी राष्ट्रीय स्तर की कुराश खिलाड़ी हैं।
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