लंबे इंतजार के बाद भारतीय खेलप्रेमियों के लिए बड़ी खबर आ गई है। भालाफेंक के स्टार नीरज चोपड़ा एक बार फिर मैदान में उतरने जा रहे हैं। वह 19 जून को होने वाली दोहा डायमंड लीग के साथ प्रतिस्पर्धी मुकाबलों में अपनी वापसी करेंगे। तोक्यो ओलंपिक 2020 के चैंपियन और पेरिस ओलंपिक 2024 के रजत पदक विजेता रहे चोपड़ा 2025 विश्व चैंपियनशिप में आठवें स्थान पर सिमटने के बाद से किसी भी मुकाबले में नहीं उतरे थे, इसलिए उनकी इस वापसी पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
दोहा से क्यों खास है यह आगाज
दोहा डायमंड लीग की भालाफेंक प्रविष्टियों में चोपड़ा का नाम दर्ज है। यही वह मैदान है जहां पिछले साल उन्होंने 90 मीटर का जादुई आंकड़ा पार किया था, लिहाजा इस लौटान के लिए जगह उनके लिए भाग्यशाली मानी जा रही है। हरियाणा के रहने वाले 28 वर्षीय इस एथलीट ने अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस समय वह स्विटजरलैंड के बियेने में अपने फिजियो ईशान मारवाहा और कोच जय चौधरी के साथ 47 दिन के ऑफ सीजन अभ्यास शिविर में जुटे हुए हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों की राह में एक शर्त
रविवार को घोषित हुई भारतीय एथलेटिक्स टीम में चोपड़ा को सशर्त जगह मिली है। उन्हें आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में खेलने के लिए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ का तय किया गया 82.61 मीटर का क्वालीफिकेशन मार्क हासिल करना अनिवार्य होगा। यदि वह अगले महीने ग्लास्गो में होने वाले इन खेलों में हिस्सा लेते हैं, तो भारत की ओर से कुल तीन भालाफेंक खिलाड़ी चुनौती पेश करते दिखेंगे। रोहित यादव और यशवीर पहले ही भारतीय एथलेटिक्स सीरीज 9 के जरिये अपनी जगह पक्की कर चुके हैं।
दोहा में कौन कौन देगा टक्कर
चोपड़ा के लिए दोहा का मुकाबला आसान नहीं रहने वाला। इसमें त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशोर्न वालकॉट भी उतरेंगे। साथ ही श्रीलंका के रूमेश तरंगा पथिरागे भी मैदान में होंगे, जिन्होंने हाल ही में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का दमदार थ्रो फेंका था। हालांकि पेरिस ओलंपिक चैंपियन और पाकिस्तान के अरशद नदीम का नाम इस प्रतियोगिता की सूची में शामिल नहीं है।
इस फेहरिस्त में और भी कई नामी चेहरे हैं। ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स इस सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ 86.08 मीटर के साथ मैदान में होंगे, जबकि अमेरिका के कुर्टिस थॉम्पसन (85.33 मीटर) और चेक गणराज्य के याकूब वालेश (85.24 मीटर) भी चुनौती बनकर उतरेंगे। पिछली बार दोहा में चोपड़ा ने 90.23 मीटर का बेहतरीन थ्रो किया था, मगर खिताब जर्मनी के जूलियन वेबर के हाथ लगा था, जिन्होंने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 91.06 मीटर भालाफेंक कर बाजी पलट दी थी।













