पीले और नारंगी रंगों से सराबोर गेंदा का फूल अक्सर घरों के आंगन, धार्मिक अनुष्ठानों और सजावट में ही देखा जाता है, लेकिन यह खूबसूरत फूल सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में गेंदा को एक असरदार और बहुउपयोगी औषधि का दर्जा प्राप्त है। त्वचा की विभिन्न समस्याओं से लेकर पाचन की खराबी, शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव को दूर करने में इस प्राकृतिक फूल की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
औषधीय गुणों का प्राकृतिक खजाना
आयुर्वेद विशेषज्ञ और लखनऊ विश्वविद्यालय से BAMS डिग्री धारक डॉ. स्मिता श्रीवास्तव, जो रायबरेली जिले के राजकीय आयुष चिकित्सालय शिवगढ़ में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के रूप में सेवारत हैं, उन्होंने गेंदा के स्वास्थ्य लाभों पर विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गेंदा के फूलों में मुख्य रूप से एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक चिकित्सा में इसे विभिन्न तरह के संक्रमण और सूजन को कम करने वाली एक बेहतरीन कुदरती दवा माना जाता है।
त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत और लेप का प्रयोग
त्वचा पर होने वाले दाने, खुजली, जलन अथवा छोटे-मोटे घावों के उपचार में गेंदा की पंखुड़ियां बेहद कारगर साबित होती हैं। इन पंखुड़ियों को पीसकर बनाया गया लेप प्रभावित स्थान पर लगाने से तुरंत राहत महसूस होती है। इसके अलावा गेंदा के फूलों से तैयार किया गया तेल या काढ़ा त्वचा के संक्रमण को तेजी से कम करने में मदद करता है। वर्तमान में बाजार में मिलने वाली कई हर्बल क्रीम और स्किन ऑइंटमेंट में भी गेंदा के विशेष अर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पेट की गड़बड़ी और पाचन तंत्र के लिए गेंदा की चाय
पेट से जुड़ी सामान्य समस्याओं जैसे गैस, अपच या पेट में होने वाले हल्के दर्द की स्थिति में गेंदा का सेवन काफी फायदेमंद माना गया है। गेंदा की सूखी पंखुड़ियों से तैयार की गई चाय का सेवन करने से पाचन तंत्र शांत होता है और आंतों की आंतरिक सूजन में कमी आती है। यह चाय पेट की परेशानी को दूर कर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मददगार साबित होती है।
जोड़ों के दर्द, सूजन और मानसिक तनाव में आराम
शरीर के जोड़ों में दर्द या किसी हिस्से में सूजन आ जाने पर गेंदा के फूलों से बने तेल से हल्की मालिश करने की सलाह दी जाती है। इसके प्राकृतिक तत्व सूजन वाले स्थान पर पहुंचकर दर्द को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। इसके साथ ही, गेंदा की धीमी सुगंध मन को सुकून देने और मानसिक तनाव को कम करने में भी सक्षम है। अनिद्रा या तनाव से जूझ रहे लोग यदि अपने कमरे में गेंदा के ताजे फूल रखते हैं या गेंदा की चाय का सेवन करते हैं, तो उन्हें बेहतर नींद और मानसिक शांति मिलती है।
प्राकृतिक उपचार में ध्यान रखने योग्य जरूरी सावधानियां
डॉ. स्मिता श्रीवास्तव के अनुसार, यद्यपि गेंदा एक सुलभ प्राकृतिक उपचार है, परंतु इसका प्रयोग करते समय सही विधि और सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की त्वचा एलर्जी है या वह किसी लंबी तथा पुरानी बीमारी से ग्रस्त है, तो उसे गेंदा का प्रयोग शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए। सही मार्गदर्शन में किया गया गेंदा का उपयोग सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।



















