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ग्लासगो में लवप्रीत सिंह ने भारत को दिलाया सिल्वर, जानिए सब्जी बेचने वाले दर्जी के बेटे का बर्मिंघम से ग्लासगो तक का सफरखेल
31 जुल॰ 2026, 6:46 am (3 घंटे पहले)· 0

ग्लासगो में लवप्रीत सिंह ने भारत को दिलाया सिल्वर, जानिए सब्जी बेचने वाले दर्जी के बेटे का बर्मिंघम से ग्लासगो तक का सफर

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुषों के +110 किलोग्राम भार वर्ग में लवप्रीत सिंह ने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता. गरीबी और तंगहाली से जूझते हुए पटियाला साई कैंप तक पहुंचे लवप्रीत का यह सफर लाखों युवाओं को प्रेरित कर रहा है.

ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टिंग दल ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है. पुरुषों की सुपर हैवीवेट यानी +110 किलोग्राम स्पर्धा में भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश के लिए सिल्वर मेडल हासिल किया. कांटे की टक्कर वाले इस मुकाबले में लवप्रीत केवल एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए, लेकिन उनके जुझारू खेल ने खेलप्रेमियों का दिल जीत लिया. पंजाब के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का नाम रोशन करने वाले लवप्रीत की यह उपलब्धि केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी कड़ी मेहनत और अटूट इरादों की कहानी है.

ग्लासगो 2026 में 1 किलोग्राम के अंतर से तय हुआ गोल्ड और सिल्वर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के +110 किलोग्राम भार वर्ग में मुकाबले का रोमांच अंतिम लिफ्ट तक बना रहा. स्नैच दौर में लवप्रीत सिंह ने शुरुआत से ही अपनी ताकत और बेहतरीन तकनीक का परिचय दिया. उन्होंने अपने पहले प्रयास में 168 किलोग्राम, दूसरे प्रयास में 173 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 176 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया. 176 किलोग्राम की इस लिफ्ट के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स का एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया. इस शानदार प्रदर्शन के बल पर लवप्रीत ने न्यूजीलैंड के मजबूत दावेदार डेविड एंड्रयू लिटी पर 10 किलोग्राम की मजबूत बढ़त बना ली थी.

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इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड शुरू हुआ, जहां लवप्रीत ने अपने पहले प्रयास में 205 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 212 किलोग्राम वजन आसानी से उठा लिया. हालांकि, 217 किलोग्राम के अपने अंतिम प्रयास में वह असफल रहे. लवप्रीत का कुल वजन 388 किलोग्राम (176 किग्रा स्नैच और 212 किग्रा क्लीन एंड जर्क) रहा. इस स्थिति का लाभ उठाते हुए न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने क्लीन एंड जर्क में 223 किलोग्राम का नया रिकॉर्ड कायम किया. इस तरह डेविड लिटी ने कुल 389 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया और लवप्रीत को 388 किलोग्राम के साथ सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. हालांकि यह परिणाम लवप्रीत के 2022 बर्मिंघम खेलों के प्रदर्शन से एक कदम आगे है, जहां उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

बचपन की तंगहाली: सब्जी बेचने और खेतों में मजदूरी से मिला अनुशासन

लवप्रीत सिंह का जन्म 6 सितंबर 1997 को पंजाब राज्य के अमृतसर जिले के पास स्थित बल सचंदर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, जिसके कारण बहुत कम उम्र में ही लवप्रीत को पारिवारिक जिम्मेदारियों में हाथ बंटाना पड़ा. बचपन के दिनों में वे खेतों में पसीना बहाते थे और अपने दादाजी के साथ स्थानीय बाजारों में सब्जियां बेचते थे. इसके अलावा, उनका परिवार विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में किराए पर देने के लिए एक घोड़ी रखता था, जिसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी लवप्रीत ही संभालते थे.

उनके पिता पेशे से एक दर्जी थे. सीमित आमदनी के बावजूद उनके पिता ने लवप्रीत को कभी सिलाई के काम में नहीं धकेला, बल्कि उन्हें खेलों की ओर आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया. लवप्रीत की जिंदगी में नया मोड़ तब आया जब 13 साल की उम्र में उन्होंने अपने गांव के कुछ युवाओं को वजन उठाते और अभ्यास करते देखा. भारी वजन उठाने के इस खेल ने उन्हें गहराई से आकर्षित किया और उन्होंने इसे अपना करियर बनाने का संकल्प लिया.

साई पटियाला कैंप से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का गौरवशाली सफर

शुरुआती दिनों में संसाधनों के अभाव के बावजूद लवप्रीत ने हार नहीं मानी. उन्होंने स्थानीय प्रशिक्षकों की देखरेख में बुनियादी अभ्यास शुरू किया और अपनी लगन से पंजाब के घरेलू प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई. वर्ष 2017 लवप्रीत के खेल जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ, जब उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें पटियाला स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में चुना गया. राष्ट्रीय शिविर में शीर्ष कोचों के मार्गदर्शन और विश्वस्तरीय सुविधाओं ने उनके कौशल को निखारने का काम किया.

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लवप्रीत का पदार्पण बहुत प्रभावशाली रहा. वर्ष 2017 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित जूनियर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता. उसी वर्ष उन्होंने एशियन यूथ और जूनियर चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर भारतीय वेटलिफ्टिंग जगत में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. इसके बाद उन्होंने लगातार अपने खेल का स्तर ऊंचा उठाया.

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदकों की निरंतर श्रृंखला

वर्ष 2021 में लवप्रीत ने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. इसके बाद 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने पुरुषों के 109 किलोग्राम वर्ग में कुल 355 किलोग्राम वजन उठाकर भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. उस प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 192 किलोग्राम उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था.

सफलता की यह यात्रा यहीं नहीं थमी. लवप्रीत ने 2023 की कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में एक बार फिर सिल्वर मेडल जीता. इसके बाद वर्ष 2025 में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के +110 किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त किया. अब ग्लासगो 2026 में 388 किलोग्राम के कुल वजन के साथ सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने साबित कर दिया है कि निरंतर अभ्यास और आत्म-विश्वास के बल पर किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है.

सवाल-जवाब

ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में लवप्रीत सिंह ने कौन सा मेडल जीता?
लवप्रीत सिंह ने पुरुषों के +110 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता.
लवप्रीत सिंह गोल्ड मेडल जीतने से कितने अंतर से चूक गए?
लवप्रीत सिंह गोल्ड मेडल से केवल 1 किलोग्राम के अंतर से चूक गए, जहां न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने 389 किलोग्राम के कुल वजन के साथ गोल्ड जीता.
लवप्रीत सिंह ने स्नैच दौर में क्या नया रिकॉर्ड बनाया?
लवप्रीत सिंह ने स्नैच दौर में 176 किलोग्राम वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड स्थापित किया.
लवप्रीत सिंह पंजाब के किस गांव से ताल्लुक रखते हैं?
लवप्रीत सिंह पंजाब के अमृतसर जिले के पास स्थित बल सचंदर गांव के रहने वाले हैं.
लवप्रीत सिंह का 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में क्या प्रदर्शन था?
2022 बर्मिंघम गेम्स में लवप्रीत ने 109 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 355 किलोग्राम वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता था.
लवप्रीत सिंह को पटियाला साई (SAI) कैंप में कब चुना गया था?
लवप्रीत सिंह को वर्ष 2017 में पटियाला स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में चुना गया था.
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