प्रशासनिक सेवा के माध्यम से जनमानस की स्थिति में सुधार लाने का सपना देखने वाली डॉ. रितिका आइमा की यात्रा बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायी है। देहरादून में पली-बढ़ी रितिका ने सबसे पहले चिकित्सा क्षेत्र को अपना करियर चुना और नीट जैसी कठिन परीक्षा पास कर एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। चिकित्सा पेशे के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य प्रणाली की बारीकियों और आम जनता की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को बहुत करीब से देखा।
डॉक्टर से प्रशासनिक सेवा का सफर
चिकित्सक के रूप में काम करते हुए रितिका को यह स्पष्ट हो गया था कि एक डॉक्टर के तौर पर वे एक बार में केवल एक मरीज की सहायता कर सकती हैं, जबकि देश के संपूर्ण स्वास्थ्य ढांचे को बेहतर बनाने के लिए नीति निर्माण में शामिल होना अनिवार्य है। यही उद्देश्य उन्हें यूपीएससी (UPSC) की दुनिया में ले आया। उनका मानना था कि अस्पतालों की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता और आधारभूत ढांचे के सुधार के लिए सरकार की नीतियों का हिस्सा बनना आवश्यक है।
IPS से IAS तक का संकल्प
रितिका की सफलता का रास्ता बाधाओं से भरा रहा। एक बार वे इंटरव्यू के दौर से बाहर हो गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यूपीएससी परीक्षा 2022 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 186वीं रैंक हासिल की और उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुना गया। हालांकि, उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना था। उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा और अपने वैकल्पिक विषय ‘एंथ्रोपोलॉजी’ पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
सफलता का नया कीर्तिमान
दृढ़ संकल्प का परिणाम यह रहा कि यूपीएससी 2023 की परीक्षा में उन्होंने 33वीं रैंक प्राप्त कर अपना सपना पूरा किया। अपनी मेहनत और निरंतरता (कंसिस्टेंसी) के दम पर उन्होंने IAS का पद सुनिश्चित किया और उन्हें गुजरात कैडर प्राप्त हुआ। फिलहाल वह गुजरात के तापी जिले में सुपरन्यूमरेरी असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
एस्पिरेंट्स के लिए रितिका की सीख
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली रितिका नए उम्मीदवारों को मार्गदर्शन देती रहती हैं। उनका कहना है कि परीक्षा का परिणाम किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी का मूल्य नहीं तय कर सकता। उनकी प्रमुख सलाह यह है कि उम्मीदवारों को हमेशा एक 'प्लान-बी' साथ रखना चाहिए। रितिका मानती हैं कि एक बैकअप प्लान होने से मानसिक दबाव कम होता है, जिससे आप अपनी तैयारी को अधिक निष्पक्ष और स्वतंत्र होकर कर सकते हैं। रितिका की कहानी हमें सिखाती है कि पहली सफलता पर रुकने के बजाय अपने मूल उद्देश्य के प्रति समर्पित रहना ही वास्तविक विजय है।











