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गया के किसान ने कर दिखाया कमाल, बिहार में लाल केले की खेती का ट्रायल हुआ सफलसक्सेस स्टोरी
11 जुल॰ 2026, 5:11 pm (110 दिन पहले)· 1

गया के किसान ने कर दिखाया कमाल, बिहार में लाल केले की खेती का ट्रायल हुआ सफल

गया जिले के जेठियन गांव में लाल केले की खेती का परीक्षण सफल रहा है, जो औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ-साथ शुगर के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है।

बिहार के फल प्रेमियों के लिए एक अनोखी और बेहद फायदेमंद खबर आ रही है। राज्य के बाजारों में अब जल्द ही साधारण पीले केले की जगह एक खास किस्म का लाल केला दस्तक देने जा रहा है। गया जिले में इस विदेशी किस्म के केले का पहला ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा है, जिससे अब स्थानीय स्तर पर इसकी उपलब्धता का रास्ता साफ हो गया है। यह केला न केवल दिखने में आकर्षक है, बल्कि पारंपरिक पीले केले की तुलना में इसमें औषधीय और पोषक तत्वों की मात्रा भी कहीं अधिक पाई जाती है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प साबित होने वाला है।

गया के जेठियन गांव में हुआ सफल परीक्षण

बिहार में लाल केले की इस नई प्रजाति को उगाने का श्रेय गया जिले के जेठियन गांव के प्रगतिशील किसान गोपाल शरण सिंह को जाता है। औषधीय पौधों की खेती के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखने वाले गोपाल शरण सिंह अपनी हर्बल नर्सरी में पहले से ही 200 से अधिक प्रकार के औषधीय पौधों का संरक्षण कर रहे हैं। लगभग दो वर्ष पहले वह कोलकाता की एक नर्सरी से लाल केले के चार पौधे लेकर आए थे। उन्होंने इन्हें अपने खेत में एक परीक्षण के तौर पर लगाया था। अब दो साल की मेहनत के बाद इन पौधों में फल आने शुरू हो गए हैं, जिससे यह साबित हो गया है कि गया की मिट्टी और जलवायु इस अनोखी फसल के अनुकूल है।

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सेहत का अनमोल खजाना है यह लाल केला

लाल केले में मौजूद पोषक तत्व इसे आम पीले केले से कहीं ज्यादा गुणकारी बनाते हैं। इसमें फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाती है। इसके अलावा, इसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन और विटामिन B6 पाया जाता है, जो शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया से लड़ने में मदद करता है और तंत्रिका तंत्र को पूरी तरह स्वस्थ रखता है। यह केला बेहद मुलायम और खाने में पीले केले से अधिक मीठा होता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि शुगर के रोगी भी इसका सेवन बिना किसी संकोच के कर सकते हैं। छिलके से लेकर गुदे तक लाल रंग का यह केला विटामिन C, पोटेशियम और बीटा-कैरोटीन जैसी खूबियों से भरा हुआ है, जो हृदय को स्वस्थ रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं।

वैश्विक स्तर पर मांग और किसानों के लिए कमाई के अवसर

लाल केले की मांग दुनिया भर के बाजारों में लगातार बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर इसका उत्पादन इंडोनेशिया, अमेरिका, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारत के भीतर भी महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के किसान इसकी खेती करके शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। लाल केले की सबसे अच्छी बात यह है कि यह शुष्क जलवायु में भी आसानी से पनप सकता है और इसकी खेती की प्रक्रिया सामान्य केले की तरह ही बेहद सरल है। पीले केले की तुलना में इसकी पैदावार भी अधिक होती है। किसान गोपाल शरण सिंह का मानना है कि यदि बिहार के अन्य किसान भी आने वाले समय में लाल केले की बागवानी को अपनाते हैं, तो यह उनकी आय को कई गुना बढ़ाने का एक बेहद कारगर जरिया साबित हो सकता है।

सवाल-जवाब

बिहार के किस जिले में लाल केले का ट्रायल सफल हुआ है?
बिहार के गया जिले के जेठियन गांव में लाल केले की खेती का ट्रायल सफल रहा है।
लाल केले की खेती की शुरुआत किसने की?
गया के प्रगतिशील किसान गोपाल शरण सिंह ने दो साल पहले कोलकाता की एक नर्सरी से पौधे लाकर इसकी शुरुआत की थी।
पीले केले की तुलना में लाल केले के क्या स्वास्थ्य लाभ हैं?
लाल केले में फाइबर, आयरन, विटामिन B6, विटामिन C, पोटेशियम और बीटा-कैरोटीन प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह पाचन को सुधारता है, एनीमिया से लड़ता है और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
क्या मधुमेह (शुगर) के रोगी लाल केला खा सकते हैं?
हां, लाल केला बहुत नरम और मीठा होने के बावजूद कम ग्लाइसेमिक लोड वाला होता है, जिससे इसे शुगर के मरीज भी आसानी से खा सकते हैं।
लाल केले का उत्पादन किन देशों और भारतीय राज्यों में होता है?
वैश्विक स्तर पर यह इंडोनेशिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में उगाया जाता है। भारत में इसकी खेती महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बड़े पैमाने पर होती है।
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