मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में अब युवा पीढ़ी का रुझान खुद का काम शुरू करने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, ये युवा बड़े शहरों की तरफ पलायन करने के बजाय अपने गृह नगर में ही रहकर स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी बुरहानपुर के बुधवारा क्षेत्र में रहने वाले आयुष मेहता की है, जिन्होंने संघर्ष और पक्के इरादों के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
शुरुआत और संघर्ष
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आयुष मेहता ने फूड डिलीवरी का कार्य चुना था। इस काम के दौरान उन्हें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों की मांग और लोगों की पसंद को करीब से समझने का मौका मिला। यही अनुभव उनके लिए भविष्य के बिजनेस का आधार बना। उन्होंने अपने परिवार से ₹50,000 उधार लिए और बुधवारा इलाके में अपनी छोटी सी चौपाटी का काम शुरू किया। इस कठिन दौर में उनके माता-पिता ने उन्हें पूरा सहयोग दिया। आयुष स्वीकार करते हैं कि शुरुआती सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने चुनौतियों के सामने हार नहीं मानी।
विकास का सफर और वर्तमान सफलता
आयुष बताते हैं कि उन्होंने बेहद छोटे स्तर से पानी पुरी बेचकर इस काम की शुरुआत की थी। जैसे-जैसे ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई, उन्होंने अपने मेन्यू में नाश्ता और फिर चाइनीज आइटम जैसे व्यंजन शामिल किए। आज यह चौपाटी सुबह से लेकर देर रात तक गुलजार रहती है। अपनी मेहनत का नतीजा यह है कि वे अब हर साल ₹2 से ₹3 लाख तक की कमाई कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों से वे लगातार इस चौपाटी का संचालन कर रहे हैं और गुणवत्ता का खास ख्याल रखते हैं।
दूसरों को भी दे रहे रोजगार
अपनी सफलता को साझा करते हुए आयुष का कहना है कि उन्होंने जो संघर्ष झेला है, उसका फल आज उन्हें मिल रहा है। वे अब न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि एक अन्य व्यक्ति को भी रोजगार प्रदान कर रहे हैं। उनका भविष्य का लक्ष्य अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार देने का है, जिसके लिए वे निरंतर प्रयास कर रहे हैं। आयुष इस सफलता का श्रेय अपने कड़े अनुशासन और परिवार के अटूट विश्वास को देते हैं, जिन्होंने पिछले एक दशक के सफर में हर मोड़ पर उनका साथ दिया।











