मधुबनी के किसान विपिन ने अपनाई इजरायली जी-9 केले की खेती, एक एकड़ से हर साल लाखों की कमाईसक्सेस स्टोरी
1 घंटे पहले· 2

मधुबनी के किसान विपिन ने अपनाई इजरायली जी-9 केले की खेती, एक एकड़ से हर साल लाखों की कमाई

मधुबनी के युवा किसान विपिन ने इजरायली जी-9 वैरायटी की केले की खेती अपनाकर प्रति एकड़ सिर्फ 1 से सवा लाख रुपये खर्च कर 4 से 5 लाख रुपये तक की कमाई शुरू की है, जो अगले 10 वर्षों तक बिना नए पौधे लगाए जारी रहेगी।

पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी की राह पकड़ने वाले किसानों के लिए मुनाफे की एक नई कहानी बिहार के मधुबनी जिले से सामने आई है, जहां युवा किसान विपिन ने केले की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से लाखों रुपये सालाना कमाई का रास्ता खोज निकाला है। खेती में नई तकनीक अपनाकर विपिन जैसे युवा किसान अब बड़े पैमाने पर मुनाफा कूट रहे हैं और इलाके के दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं।

एक एकड़ पर खर्च सवा लाख, कमाई पांच लाख तक

विपिन के मुताबिक केले की बागवानी में प्रति एकड़ महज 1 लाख से सवा लाख रुपये तक का ही खर्च आता है। इसके बदले उन्हें एक एकड़ से 4 से 5 लाख रुपये तक की शानदार आमदनी हो जाती है। यानी हर एकड़ पर औसतन साढ़े तीन से चार लाख रुपये का सीधा और शुद्ध मुनाफा किसान की जेब में आता है। इतना कम निवेश और इतना बड़ा रिटर्न ही केले की खेती को दूसरी परंपरागत फसलों से कहीं ज्यादा फायदेमंद बनाता है।

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इजरायली तकनीक वाली जी-9 वैरायटी की खासियत

विपिन अपने खेतों में केले की खास जी-9 वैरायटी लगा रहे हैं, जो इजरायली तकनीक पर आधारित है। इस वैरायटी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पूरी तरह कमर्शियल खेती के लिए बनी है। इसके केले का आकार सामान्य किस्मों के मुकाबले काफी लंबा और देखने में आकर्षक होता है, जिससे बाजार में इसे तुरंत खरीदार मिल जाते हैं। बाजार में इसकी मांग हमेशा ऊंची बनी रहती है क्योंकि यह जल्दी खराब नहीं होती। पेड़ से तोड़ने के बाद भी इसे कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे यह न तो सड़ता है और न ही गलता है। इसी वजह से लंबी दूरी तक परिवहन के दौरान भी नुकसान लगभग न के बराबर होता है, जो किसानों के लिए बड़ी राहत की बात है।

पौधे को हमेशा रोगमुक्त रखने वाला देसी फॉर्मूला

विपिन ने पौधों को स्वस्थ और बीमारियों से दूर रखने का एक बेहद आसान और असरदार जैविक तरीका भी साझा किया। उनके अनुसार जब खेत में पहली बार पौधा रोपा जाता है, तो पहले गड्ढा खोदकर हर पौधे की जड़ में 15 से 20 किलो अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर डाला जाता है। इसके ऊपर मिट्टी डालकर फिर केले का पौधा लगाया जाता है। इस जैविक तरीके को अपनाने से पौधा जीवनभर बीमार नहीं पड़ता और हमेशा रोगमुक्त बना रहता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि आगे चलकर महंगे केमिकल फर्टिलाइजर या कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव की जरूरत ही नहीं पड़ती, जिससे लागत और भी कम हो जाती है।

1 एकड़ में 1200 पौधे और लगातार 10 साल तक कमाई

केले की खेती से लगातार 10 वर्षों तक मुनाफा कमाने के लिए कुछ तकनीकी बातों और सावधानियों का खास ख्याल रखना जरूरी होता है। सबसे पहले तो खेत में एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच कम से कम 6 फीट की दूरी जरूर होनी चाहिए, ताकि हर पौधे को पर्याप्त हवा और धूप मिल सके। इसके अलावा केले के बगीचे के आसपास घास या खरपतवार बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि खेत जितना साफ-सुथरा रहेगा, कीड़े-मकोड़ों का खतरा उतना ही कम होगा। इसी दूरी के हिसाब से गणित लगाया जाए तो 1 एकड़ खेत में आसानी से करीब 1200 पौधे लगाए जा सकते हैं।

केले की खेती की सबसे खास बात यह है कि अगर पहली बार वैज्ञानिक तरीके से पूरा बगीचा तैयार कर लिया जाए, तो अगले 10 वर्षों तक दोबारा नए पौधे लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। पुराने पौधों की जड़ों से ही नए कल्ले लगातार निकलते रहते हैं, जिनसे नई फसल तैयार होती रहती है। यही वजह है कि एक बार की गई मेहनत और निवेश किसान को अगले पूरे एक दशक तक बंपर कमाई दिलाता रहता है।

सवाल-जवाब

मधुबनी के किसान विपिन केले की कौन सी वैरायटी उगा रहे हैं?
विपिन इजरायली तकनीक पर आधारित केले की खास जी-9 वैरायटी की खेती कर रहे हैं।
केले की खेती में प्रति एकड़ कितना खर्च आता है?
विपिन के मुताबिक एक एकड़ में केले की बागवानी पर 1 से सवा लाख रुपये तक का खर्च आता है।
इस खेती से कितनी कमाई होती है?
एक एकड़ से 4 से 5 लाख रुपये तक की आमदनी होती है, यानी साढ़े तीन से चार लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा।
पौधों को बीमारी से बचाने के लिए विपिन क्या तरीका अपनाते हैं?
वे पौधा लगाते समय हर जड़ में 15 से 20 किलो सड़ा हुआ गोबर डालते हैं, जिससे पौधा जीवनभर रोगमुक्त रहता है।
1 एकड़ खेत में कितने केले के पौधे लगाए जा सकते हैं?
पौधों के बीच 6 फीट की दूरी रखने पर 1 एकड़ में करीब 1200 पौधे लगाए जा सकते हैं।
क्या हर साल नए पौधे लगाने पड़ते हैं?
नहीं, एक बार वैज्ञानिक तरीके से बगीचा तैयार करने पर अगले 10 वर्षों तक पुराने पौधों से निकलने वाले नए कल्लों से ही खेती चलती रहती है।

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