अमेठी के किसानों का कमाल: केले की खेती ने धान-गेहूं छोड़ खोला लाखों का रास्तासक्सेस स्टोरी
4 घंटे पहले· 0

अमेठी के किसानों का कमाल: केले की खेती ने धान-गेहूं छोड़ खोला लाखों का रास्ता

अमेठी के दर्जनों किसानों ने पारंपरिक धान-गेहूं की जगह केले की खेती अपनाकर अपनी आर्थिक तस्वीर बदल दी है और हर सीजन लाखों रुपये कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में खेती की एक नई इबारत लिखी जा रही है। यहां के कई किसानों ने धान और गेहूं जैसी परंपरागत फसलों से आगे बढ़कर केले की खेती को अपनाया, और नतीजा यह रहा कि सीमित आमदनी की चिंता अब लाखों के मुनाफे में बदल चुकी है। उद्यान विभाग की योजनाओं और कुछ साथियों की सलाह ने इन किसानों की मेहनत को नई दिशा दी है। आइए जानते हैं उन चेहरों की कहानी जिन्होंने अपनी मिट्टी को सचमुच सोना बना दिया।

200 पौधों से ढाई लाख पौधों तक का सफर

जिले के कंसापुर गांव के किसान यशकेंद्र सिंह की शुरुआत बेहद छोटी थी। उन्होंने महज 200 पौधों के साथ केले की खेती की नींव रखी थी। आज हालत यह है कि उनके खेतों में ढाई लाख से अधिक पौधे लहलहा रहे हैं, और एक सीजन में तीन से चार लाख रुपये की कमाई उनके लिए आम बात बन गई है। केले की सफल खेती के चलते उनका नाम पूरे जिले में पहचाना जाता है।

सरकारी योजना ने पलटी प्रेम चन्द्र की किस्मत

विकास खंड जामों के ग्राम सम्भई के रहने वाले प्रेम चन्द्र पहले परंपरागत तरीके से खेती करते थे, जिससे उन्हें बहुत सीमित आमदनी ही मिल पाती थी। खेती में बढ़ती लागत और घटती कमाई ने उन्हें आर्थिक मुश्किलों में डाल दिया था। इसी बीच उन्हें कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी मिली। जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत ऑनलाइन पंजीकरण कराया और स्वीकृति हासिल की। इसी योजना के सहारे प्रेम चन्द्र ने लाखों की कमाई कर खुद को आत्मनिर्भर किसान के रूप में खड़ा कर लिया।

एमए पास सत्येंद्र को पहले ही साल मिला बड़ा मुनाफा

गौरीगंज क्षेत्र के टिकरिया गांव के सत्येंद्र सिंह एमए तक पढ़े हैं। पहले वे सिर्फ धान और गेहूं की पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन साल 2016 में एक दोस्त के सुझाव ने उनकी सोच बदल दी और उन्होंने केले की खेती शुरू कर दी। पहले ही साल एक एकड़ में उन्हें करीब 5 लाख 40 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, वह भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के। इस कामयाबी के बाद उन्होंने पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती को अपना लिया और आज 3 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में केला उगा रहे हैं, जिससे उन्हें हर साल लाखों का फायदा हो रहा है।

नौकरी की तलाश छोड़ खेती को बनाया जरिया

मुसाफिरखाना तहसील के किसान टार्जन सिंह ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद इधर-उधर रोजगार ढूंढने के बजाय खेती को अपना सहारा बनाया। उन्होंने शुरुआत सिर्फ दो हेक्टेयर में केले की खेती से की थी, और आज वे 5 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में यह फसल उगा रहे हैं। इस खेती से उन्हें एक सीजन में दो से ढाई लाख रुपये का मुनाफा आसानी से हो जाता है। आगे बढ़ने में उन्होंने उद्यान विभाग का सहयोग भी लिया।

किराये की जमीन से 30 एकड़ तक पहुंचे मुकेश

तिलोई तहसील के मुकेश कुमार ने यह कर दिखाया कि लगन और मेहनत से नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। अपनी जमीन न होने के बावजूद उन्होंने किराये पर खेती शुरू की और आज 30 एकड़ में केले की फसल लहलहा रही है, जिससे वे सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। उनकी इस कामयाबी ने इलाके के दूसरे किसानों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

30,738 रुपये के अनुदान से चमकी रामबचन की राह

जगदीशपुर के गूंगेमऊ गांव के रामबचन सिंह भी केले की खेती में सफल किसानों में गिने जाते हैं। उद्यान विभाग की सलाह पर उन्होंने 30 हजार 738 रुपये का अनुदान लेकर छोटे पैमाने पर खेती की शुरुआत की। जैसे-जैसे फायदा होने लगा, उन्होंने अपनी खेती का दायरा बढ़ाता गया। आज वे एक प्रगतिशील किसान के तौर पर पहचाने जाते हैं और एक सीजन में लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।

रेडियो की एक बात ने बदली सोच

किसान रवि प्रकाश शुक्ला की कहानी भी दिलचस्प है। उन्होंने बताया कि रेडियो पर सीतापुर के किसान आरपी सिंह की बातें सुनकर उन्होंने केले की खेती करने का मन बनाया। उनके मुताबिक उनका केला मुगलसराय, रायबरेली, फैजाबाद, अयोध्या, सुल्तानपुर, बाराबंकी और पीलीभीत जैसे कई बड़े शहरों तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि केले की फसल से उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा हो रहा है। शुरुआत में कई दिक्कतें जरूर आईं, लेकिन जब इस काम को और आगे बढ़ाया तो कमाई का रास्ता खुलता चला गया।

सवाल-जवाब

अमेठी के किसान कौन-सी खेती से लाखों कमा रहे हैं?
वे धान और गेहूं की जगह केले की खेती कर रहे हैं, जिससे कई किसान एक सीजन में लाखों रुपये कमा रहे हैं।
यशकेंद्र सिंह ने खेती की शुरुआत कैसे की थी?
उन्होंने केवल 200 पौधों से शुरुआत की थी और आज उनके पास ढाई लाख से अधिक पौधे हैं, जिनसे एक सीजन में तीन से चार लाख रुपये की कमाई होती है।
सत्येंद्र सिंह को पहले ही साल कितना मुनाफा हुआ?
साल 2016 में एक एकड़ में केले की खेती से उन्हें करीब 5 लाख 40 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, वह भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के।
इन किसानों को सरकार से क्या मदद मिली?
उन्हें एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत अनुदान और जिला उद्यान विभाग का मार्गदर्शन मिला; रामबचन सिंह ने 30,738 रुपये का अनुदान लेकर शुरुआत की।
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