वर्ष 2004 के आसपास तकनीकी दुनिया में एक छोटे से म्यूजिक प्लेयर का ऐसा दबदबा बना कि उसे पूरे समाज के सांस्कृतिक बदलाव की तरह देखा जाने लगा। उस दौर में आईपॉड पर एक चर्चित कवर स्टोरी 'आईपॉड नेशन' लिखी गई थी और बाद में इस पर 'द परफेक्ट थिंग' नाम की किताब भी सामने आई। यह वह समय था जब जेब में रखे एक छोटे से उपकरण ने गाने सुनने के पूरे तौर-तरीके को बदलकर रख दिया था। उस वक्त शायद ही किसी ने सोचा था कि जिस डिवाइस ने संगीत सुनने के अहसास को इतना जादुई बना दिया, वह धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा।
आईपॉड का अंत किसी जोरदार धमाके के साथ नहीं हुआ, बल्कि यह इतना खामोश था कि इसकी सटीक तारीख तय करना भी आसान नहीं है। आधिकारिक तौर पर इसकी विदाई 10 मई 2022 को मानी जा सकती है, जब ऐपल ने आईपॉड टच का निर्माण पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया। हालांकि कई जानकारों की नजर में आईपॉड टच कभी असली आईपॉड था ही नहीं, बल्कि वह सिर्फ कॉलिंग और सेल्युलर नेटवर्क से रहित आईफोन जैसा मॉडल था। अगर पारंपरिक आईपॉड की बात करें, तो इसके अंत का सही दिन 27 जुलाई 2017 कहा जा सकता है, जब ऐपल ने स्क्रीन वाले आखिरी पारंपरिक मॉडल आईपॉड नैनो और कॉलर पर लगने वाले डाक टिकट जितने छोटे आईपॉड शफल को बाजार से हटाया था। इससे भी पहले, हार्ड ड्राइव और गोल क्लिक व्हील वाले क्लासिक आईपॉड को कंपनी ने 2014 में ही खामोशी से अलविदा कह दिया था।
स्टीव जॉब्स का फैसला और आईफोन की दस्तक
इन सभी तारीखों की नींव वास्तव में 11 जनवरी 2007 को ही रख दी गई थी। उस दिन ऐपल के तत्कालीन प्रमुख स्टीव जॉब्स ने मंच से तीन नए उत्पादों की घोषणा की थी, जिनमें एक फोन, एक इंटरनेट डिवाइस और इतिहास का सबसे बेहतरीन आईपॉड शामिल था। इन तीनों खूबियों को मिलाकर एक नया क्रांतिकारी गैजेट पेश किया गया, जिसे दुनिया ने आईफोन के नाम से जाना। उसी पल से एक अलग और स्वतंत्र डिवाइस के तौर पर आईपॉड की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी।
इसके बावजूद ऐपल ने इस लोकप्रिय गैजेट की लाखों प्रतियां कई सालों तक बेचीं। आज स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अटूट हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन आईपॉड की सादगी और उसके खालीपन की टीस आज भी कई लोगों के दिलों में मौजूद है। वह मूल रूप से एक ही काम करने वाला गैजेट था, जिसे वह बिना किसी रुकावट के बेजोड़ अंदाज में अंजाम देता था। उसने बिना किसी उलझन के लोगों को संगीत का शुद्ध आनंद दिया। इसके उलट, आईफोन और एंड्रॉयड फोन के साथ इंसानों का रिश्ता काफी पेचीदा हो चुका है। तकनीकी और वित्तीय नजरिए से देखें तो स्मार्टफोन आईपॉड की तुलना में कई गुना ज्यादा असरदार साबित हुआ है। आज यह 4 ट्रिलियन डॉलर की विशाल कंपनी ऐपल की कमाई का मुख्य जरिया है और इसे इस सदी का सबसे बड़ा प्रोडक्ट माना जा सकता है।
स्मार्टफोन की लत बनाम आईपॉड का सुकून
स्मार्टफोन चाहे जितना ताकतवर हो, उसे पूरी तरह सुकून देने वाला गैजेट नहीं कहा जा सकता। यह लोगों के ध्यान और समय को भटकाने वाले सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए अपनी गिरफ्त में ले लेता है। कई बार लोग गाड़ी चलाते वक्त सामने देखने के बजाय स्क्रीन पर ध्यान देने की गलती कर बैठते हैं, जिससे भीषण हादसे तक हो जाते हैं। फोन पर लगातार नकारात्मक खबरें पढ़ने या डूमस्क्रोलिंग करने से तनाव और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं पैदा होती हैं। दूसरी तरफ, आईपॉड का सीधा और सरल स्वभाव किसी को तनाव दिए बिना सिर्फ और सिर्फ संगीत की खुशी देता था।
आईपॉड की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह भी था कि स्टीव जॉब्स हर साल इसके डिजाइन को नए सिरे से बदलने के लिए तैयार रहते थे। ऐपल अपने पहले मॉडल को ही कई सालों तक चला सकती थी, लेकिन कंपनी ने इसे लगातार नए रूप दिए। हर नए चक्र में आईपॉड का आकार और रूप बदल जाता था। हर नए बदलाव के साथ यह पहले से छोटा और ज्यादा आकर्षक बनता गया। सबसे पहले आईपॉड मिनी आया, फिर अलग-अलग रंगों और बनावट में नैनो और शफल के कई मॉडल आए। बाद के दौर में आईफोन के नए अपडेट भले ही लोगों को खरीदारी के लिए आकर्षित करते रहे, लेकिन उसमें पूरे गैजेट को नए सिरे से बदल देने वाला पुराना रोमांच कभी नहीं दिखा।
टोनी फदेल और विदाई का कड़वा सच
क्या ऐसा कोई रास्ता था जिससे ऐपल आईपॉड को एक समर्पित डिजिटल म्यूजिक प्लेयर के तौर पर आज भी जारी रख सकती थी? आईपॉड के हार्डवेयर विभाग की कमान संभालने वाले और 'फादर ऑफ द आईपॉड' कहे जाने वाले टोनी फदेल ने इसे एक साल से भी कम समय में तैयार कराया था। बाद में वह आईफोन के विकास से भी गहराई से जुड़े रहे। ऐपल से अलग होने के बाद उन्होंने नेस्ट कंपनी की सह-स्थापना की, बड़े तकनीकी निवेशक बने और एक लोकप्रिय किताब भी लिखी।
फदेल ने 2008 में ऐपल से इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद दो साल तक सलाहकार के तौर पर काम करते रहे, जिस दौरान ऐपल आईपॉड का समर्थन कर रही थी। वह याद करते हैं कि स्टीव जॉब्स और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस बात पर सहमति बन गई थी कि उत्साही प्रशंसकों के बावजूद यह गैजेट धीरे-धीरे खत्म होने की राह पर है। आईफोन की भारी सफलता मैकिंतोश कंप्यूटरों को भी रफ्तार दे रही थी, और ऐपल आईपैड जैसे बड़े उत्पादों की ओर बढ़ रही थी। ऐसे में कंपनी की कुल आमदनी के लिहाज से आईपॉड की हिस्सेदारी तेजी से घट रही थी। स्टीव जॉब्स अपनी प्राथमिकताओं को लेकर बेहद सख्त थे, और उनके बाद मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने टिम कुक की सोच भी यही थी।
फदेल का कहना है कि आईपॉड के भविष्य को लेकर कंपनी के भीतर कोई लंबा माथापच्ची का दौर नहीं चला। उनका कहना है कि बातचीत केवल इस बात पर थी कि ऐपल को कम मूल्य वाले कामों में उलझना नहीं चाहिए। इसके बावजूद वह मानते हैं कि आईपॉड के हटने से जो खालीपन आया है, उसे आज तक भरा नहीं जा सका है।
इंटरनेट से दूरी ही थी सबसे बड़ी ताकत
बीते दौर को याद करते हुए फदेल बताते हैं कि आईपॉड की सबसे बड़ी खूबी वही थी जो वह नहीं कर सकता था, यानी उसका इंटरनेट से न जुड़ना। उनके अनुसार, आईपॉड में इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने की वजह से यूजर का ध्यान भटकाने वाली दूसरी चीजें मौजूद नहीं थीं। आज के समय में इंटरनेट से जुड़े होने की सारी परेशानियां तो मिलती हैं, लेकिन संगीत सुनने का वह शांत अनुभव नहीं मिल पाता। आज का यूजर कभी भी विचलित होकर दूसरी जगह भटक सकता है। फदेल का साफ मानना है कि ऐसी चीज आज भी बाजार में मौजूद होनी चाहिए।
इस विचार से कई पुराने प्रशंसक पूरी तरह सहमत हैं। फेसबुक और रेडिट जैसे मंचों पर कई ऐसे समूह सक्रिय हैं जहां लोग पुराने आईपॉड को संवारने में जुटे रहते हैं। वे पुराने मॉडल्स में बड़े फ्लैश ड्राइव लगाते हैं और ब्लूटूथ जोड़ते हैं। यहां तक कि एक ऐसा ऐप भी मौजूद है जो आईफोन के डिस्प्ले को पुराने आईपॉड क्लासिक जैसा बना देता है और उसी तरह गाने बजाता है। यह ऐप देखने में भले ही बहुत अच्छा लगे, लेकिन यूजर केवल एक स्वाइप की दूरी पर अपने सोशल मीडिया फीड्स, ईमेल्स और उन तमाम चीजों से घिरा रहता है जो संगीत जितनी सुखद नहीं होतीं।
ऐपल के सफर में आईपॉड का ऐतिहासिक योगदान
आईपॉड की विरासत पर बात करते हुए फदेल का मानना है कि यह उत्पाद ऐपल के पूरे इतिहास को बदलने वाला साबित हुआ। उनके मुताबिक, अगर आईपॉड न होता तो शायद आईफोन का अस्तित्व भी कभी नहीं होता। इसका सीधा मतलब यह है कि आज की जो विशाल ऐपल कंपनी दिखाई देती है, वह बिना आईपॉड के संभव ही नहीं थी। इस एक गैजेट ने सीमित यूजर बेस वाली एक सामान्य कंप्यूटर निर्माता कंपनी को उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया के सबसे बड़े दिग्गज में तब्दील कर दिया।
फदेल कहते हैं कि यह बात ठीक 25 साल पहले की है, जो ऐपल के कुल इतिहास का आधा समय है। पहले ऐपल II आया, फिर मैक कंप्यूटर आया और उसके बाद आईपॉड ने आते ही तहलका मचा दिया।
पुराने दिनों के शौकीनों के पास आज भी 30-पिन कनेक्टर वाले पुराने डॉक या बूमबॉक्स में आईपॉड क्लासिक लगाकर शफल मोड पर गाने सुनने की यादें जिंदा हैं। हालांकि नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉन टर्नस के पास इस तरह के पुराने उत्पाद को दोबारा जिंदा करने की कोई व्यावसायिक वजह नहीं है। फिर भी यह बात किसी खालीपन जैसी लगती है कि आज की एक पूरी पीढ़ी ऐसी है जिसे यह अहसास ही नहीं है कि बिना किसी कॉल, मैसेज या ऐप नोटिफिकेशन की रुकावट के सिर्फ संगीत के लिए बने गैजेट पर गाने सुनना कितना सुकून देता है।



















