मध्य यूरोपीय अर्थव्यवस्था पोलैंड में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को लेकर ताजा अनुमान सामने आए हैं, जिसके तहत सितंबर महीने के अंतिम सीपीआई आंकड़े सालाना आधार पर 4% दर्ज किए जाने की उम्मीद है। आईएनजी के अर्थशास्त्री आदम अंतोनियाक और डेविड हावरलांट ने इस बात का विश्लेषण प्रस्तुत किया है कि देश में व्यापक मुद्रास्फीति का दबाव अभी अनुपस्थित है। कीमतों में हालिया तेजी मुख्य रूप से ईंधन और उससे जुड़ी आवश्यक सेवाओं तक ही सीमित दिखाई दे रही है, जबकि मुख्य मुद्रास्फीति में नरमी का रुख दर्ज किया गया है।
ईंधन करों में राहत और मुद्रास्फीति का अल्पावधि परिदृश्य
अर्थशास्त्रियों के आकलन के अनुसार पोलैंड में अल्पावधि मुद्रास्फीति के परिदृश्य में सुधार देखने को मिला है। इस सुधार के पीछे ईंधन पर लगने वाले उत्पाद शुल्क और वैट में की गई नई कटौतियां मुख्य वजह बनी हैं। इन सरकारी उपायों की बदौलत ईंधन की कीमतों में संतुलन बना हुआ है, जिससे आम उपभोक्ताओं को व्यापक मूल्य वृद्धि से तात्कालिक राहत मिली है। इसी आधार पर अनुमान लगाया गया है कि साल के अंत तक हेडलाइन सीपीआई 3.5% से 4.0% के दायरे में सिमटी रहेगी।
आदम अंतोनियाक और डेविड हावरलांट का मानना है कि बुधवार को जारी होने वाले अंतिम सितंबर सीपीआई आंकड़े इस बात की पुष्टि करेंगे कि मुख्य मुद्रास्फीति नरम पड़ी है। उनके अनुसार इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में चौतरफा मूल्य वृद्धि का जोखिम फिलहाल टल चुका है और महंगाई का प्रभाव सिर्फ विशिष्ट ऊर्जा उत्पादों तक सीमित है।
ऊर्जा संकट और चालू खाते के घाटे की चुनौतियां
अल्पकालिक राहत के बावजूद पोलैंड की अर्थव्यवस्था के सामने भविष्य को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी बरकरार हैं। जारी ऊर्जा संकट के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए विनियमित कीमतों में उछाल आने का खतरा बना हुआ है। अर्थशास्त्रियों ने आगाह किया है कि 2027 की शुरुआत से घरों पर लागू होने वाली बिजली और गैस जैसी विनियमित दरों में भारी वृद्धि दर्ज की जा सकती है, जिससे दोबारा महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
इसके साथ ही पोलैंड के विदेशी व्यापार और चालू खाते के संतुलन पर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। अगस्त महीने के लिए चालू खाते का घाटा 2 अरब यूरो से थोड़ा अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि यह आंकड़ा अगस्त 2025 में दर्ज किए गए घाटे की तुलना में थोड़ा कम है, जो बाहरी व्यापार संतुलन में धीमे सुधार को दर्शाता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की चाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों पर नजर डालें तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर आई गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को उसके 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा है। इसका सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर पर पड़ा है। एशियाई बाजार में शुक्रवार को एयूडी/यूएसडी जोड़ी ने साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी करते हुए 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी आक्रामक नीतिगत उम्मीदों ने भी इस मुद्रा जोड़ी को सहारा प्रदान किया है।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 के स्तर के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा है। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी मुद्रा को भारी दबाव में ला दिया। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के प्रभाव को संतुलित किया है, जिससे डॉलर और येन की जोड़ी में बड़ी गिरावट सीमित रही।
सोने की कीमतों में गिरावट और ट्रेजरी यील्ड का दबाव
कमोडिटी बाजार में सोने के खरीदारों को थोड़ी निराशा हाथ लगी है। सप्ताह के उच्चतम स्तर को छूने के शुरुआती तेजी के प्रयासों के बाद सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई। शुक्रवार को पीली धातु वापस गिरकर प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे आ गई।
अमेरिकी डॉलर में जारी मजबूत तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में हुई बढ़ोतरी ने सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में आगे की बढ़त इस समय ब्याज दरों और बॉन्ड प्रतिफल की दिशा पर टिकी हुई है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।


















