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किशोरों की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाने पर मेटा पर $567 मिलियन का जुर्माना, भारत में भी बढ़ी नकेलतकनीक
7 अग॰ 2026, 5:56 am (45 दिन पहले)· 1

किशोरों की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाने पर मेटा पर $567 मिलियन का जुर्माना, भारत में भी बढ़ी नकेल

न्यू मैक्सिको की अदालत ने टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाने के मामले में मेटा पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है, वहीं भारत सरकार ने भी डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए 3 घंटे की सख्त समय सीमा तय की है।

सोशल मीडिया की प्रमुख दिग्गज कंपनी मेटा पर एक बड़ा कानूनी शिकंजा कस गया है। न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने कंपनी को टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाने के मामले में $567 मिलियन (लगभग ₹54,04,19,89,050 यानी 54,04 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना चुकाने का आदेश जारी किया है। अदालत के इस फैसले के अनुसार यह पूरी राशि न्यू मैक्सिको राज्य के उस विशेष फंड में जमा कराई जाएगी, जिसका उपयोग किशोरों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे निपटने के उपायों के लिए किया जाना है। मेटा के स्वामित्व में फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे बड़े और प्रमुख प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

न्यू मैक्सिको कोर्ट के फैसले और जूरी ट्रायल का विवरण

सांता फे स्थित न्यू मैक्सिको की फर्स्ट ज्यूडिशियल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा यह फैसला एक लंबे ट्रायल प्रक्रिया के बाद सुनाया गया है। इससे पहले राज्य की जूरी ने मेटा के प्रॉडक्ट्स की वजह से टीनएजर्स में पैदा हो रही मेंटल हेल्थ की परेशानियों और प्लेटफॉर्म्स पर यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोपों के चलते कंपनी पर $375 मिलियन का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अदालत ने अंतिम आदेश में मेटा को $567 मिलियन का भुगतान राज्य के फंड में जमा करने के लिए कहा है ताकि प्रभावित किशोरों के इलाज और मानसिक देखभाल में मदद मिल सके।

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भारत में मेटा पर कसता कानूनी और सरकारी शिकंजा

केवल अमेरिका में ही नहीं, बल्कि भारत में भी मेटा को लगातार गंभीर चुनौतियों और सरकारी सख्ती का सामना करना पड़ रहा है। पीएम मोदी के वीडियो विवाद और प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के फैलने को लेकर भारत सरकार ने कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सरकार और मेटा के बीच लगातार दो दिनों तक उच्च स्तरीय और अहम बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों के दौरान मुख्य रूप से डीपफेक तकनीक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) और AI द्वारा तैयार किए गए भ्रामक विजुअल्स पर विस्तृत चर्चा की गई।

आपातकालीन कार्रवाई और 3 घंटे की समय सीमा का नियम

भारत सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मेटा ने भरोसा दिया है कि वह अपने सिस्टम की पहचान, निगरानी और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाएगा। हालांकि, सरकार ने मेटा को स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और धरातल पर कड़े नतीजे दिखने अनिवार्य हैं। सरकार 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक और संवेदनशील कंटेंट को हटाने की अपनी सख्त समय सीमा वाले नियम से पीछे नहीं हटी है। सरकार का यह मानना है कि CSAM, डीपफेक और भ्रामक AI कंटेंट पर जितनी तेजी से कार्रवाई की जाएगी, आम नागरिकों और समाज को होने वाला नुकसान उतना ही कम होगा। जल्द ही मेटा द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी।

सवाल-जवाब

न्यू मैक्सिको की अदालत ने मेटा पर कितना जुर्माना लगाया है?
न्यू मैक्सिको की अदालत ने मेटा पर $567 मिलियन (लगभग 5,404 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है।
मेटा पर यह जुर्माना किस वजह से लगाया गया है?
यह जुर्माना टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाने और यौन शोषण के आरोपों के कारण लगाया गया है।
भारत सरकार ने मेटा के सामने कौन सी सख्त शर्त रखी है?
भारत सरकार ने डीपफेक, CSAM और भ्रामक AI कंटेंट को 3 घंटे के भीतर हटाने का कड़ा नियम बरकरार रखा है।
मेटा के तहत कौन-कौन से मुख्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आते हैं?
मेटा के अंतर्गत फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म आते हैं।
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