कॉकरोच जनता पार्टी के हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया मंचों की भूमिका को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है। देश के भीतर असंतोष को बढ़ावा देने से लेकर सीमा पार से मिल रहे समर्थन को हवा देने तक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल देखा गया है। इसके बाद से ही केंद्र प्रशासन ने ऐसी टेक कंपनियों और उनके संचालन पर निगरानी कड़ी कर दी है। यद्यपि इंस्टाग्राम ने अपने मंच से जुड़ी गतिविधियों के संबंध में आधिकारिक तौर पर माफी मांगी है, लेकिन इस बार सरकार किसी भी तरह की नरमी दिखाने के मूड में नजर नहीं आ रही है। ऐसे माहौल में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारतीय वैधानिक ढांचे में इन तकनीकी दिग्गजों पर लगाम कसने के लिए क्या-क्या अधिकार उपलब्ध हैं।
आईटी अधिनियम की धारा 69ए और कंटेंट ब्लॉकिंग की शक्ति
भारत में सोशल मीडिया मंचों की मनमानी को रोकने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 की धारा 69ए एक बेहद महत्वपूर्ण माध्यम है। इस प्रावधान के तहत प्रशासनिक अधिकारियों के पास अधिकार होता है कि वे किसी भी विवादित पोस्ट, वीडियो, व्यक्तिगत खाते अथवा पूरे डिजिटल मंच की सामग्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश जारी कर सकें। जब भी कोई डिजिटल सामग्री भारत की प्रभुता, अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा, या फिर लोक व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न करती है, तो उस पर तत्काल कठोर रुख अपनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी पोस्ट के माध्यम से आम जनता को हिंसा या अपराध के लिए उकसाया जाता है अथवा राष्ट्रविरोधी विचारों का प्रसार होता है, तो प्रशासन कानूनी शिकंजा कस सकता है। कानून के तहत जारी ब्लॉकिंग रूल्स, 2009 के साथ मिलकर धारा 69ए सरकार को पूरी वेबसाइट या ऐप को ब्लॉक करने का अधिकार देती है। इसके तहत विशिष्ट पेज, समूह, यूआरएल अथवा किसी विशेष यूजर प्रोफाइल पर भी पूर्ण रोक लगाई जा सकती है।
सेफ हार्बर सुरक्षा का खात्मा और धारा 79 का दायरा
सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में काम करने के दौरान आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत एक विशेष सुरक्षा कवच मिलता है, जिसे सेफ हार्बर कहा जाता है। इस व्यवस्था के अंतर्गत मंच पर उपयोगकर्ता द्वारा पोस्ट की गई किसी भी अवैध सामग्री के लिए सीधे तौर पर कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। हालांकि, यह राहत सशर्त होती है। यदि कोई मंच देश के नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं करता है या फिर निर्धारित दिशानिर्देशों की अनदेखी करता है, तो उसकी सेफ हार्बर सुरक्षा तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। सेफ हार्बर का अधिकार छिनते ही सरकार और पीड़ित पक्ष के पास कंपनी के खिलाफ सीधे आपराधिक व नागरिक कानूनी कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो जाता है।
आईटी नियम 2021 और अनुपालन अधिकारियों की नियुक्ति
प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए आईटी नियम, 2021 के तहत भारत में संचालित सभी बड़े सोशल मीडिया मंचों के लिए कुछ कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। इन नियमों के अनुसार, कंपनियों को देश के भीतर ही शिकायत अधिकारी, नोडल संपर्क व्यक्ति और मुख्य अनुपालन अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य है। यदि फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स अथवा वॉट्सऐप का संचालन करने वाली कंपनी मेटा जैसे संस्थान समय पर उपयोगकर्ताओं की शिकायतों का निपटारा नहीं करते हैं या फिर भारतीय प्रशासनिक तंत्र के साथ सहयोग करने में विफलता दिखाते हैं, तो उन पर कड़े कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
गंभीर अपराधों की जांच, डेटा सुरक्षा और वित्तीय जुर्माना
नियामकीय ढांचे के भीतर सरकार के पास आतंकवाद, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), साइबर अपराधों, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य संगठित गैर-कानूनी गतिविधियों से जुड़े मामलों में सीधे जांच के आदेश देने का अधिकार सुरक्षित है। इसके साथ ही, यदि कोई कंपनी भारत के डेटा सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन करती है, तो प्रशासन उसे औपचारिक नोटिस जारी कर सकता है। गैर-कानूनी सामग्री को तुरंत हटाने, विस्तृत स्पष्टीकरण मांगने और नियमों की अनदेखी पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाने जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। यदि उल्लंघन का मामला अत्यंत गंभीर साबित होता है, तो सरकार भारत में उस पूरे डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच को ही सीमित या पूरी तरह से समाप्त कर सकती है।



















