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प्रोटॉन के लूमो 2.0 चैटबॉट ने प्राइवेसी के साथ चैटजीपीटी को टक्कर देनी शुरू कीतकनीक
2 घंटे पहले· 3

प्रोटॉन के लूमो 2.0 चैटबॉट ने प्राइवेसी के साथ चैटजीपीटी को टक्कर देनी शुरू की

प्रोटॉन ने अपने प्राइवेसी-फोकस्ड एआई चैटबॉट लूमो को अपग्रेड कर लूमो 2.0 लॉन्च किया है, जिसमें अब इमेज जनरेशन, नया थिंकिंग मोड और बेहतर वेब सर्च जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं, और यह चैटजीपीटी को कड़ी टक्कर देने लगा है।

रोहन गुप्तारोहन गुप्ताटेक्नोलॉजी संवाददाता 6 मिनट पढ़ें AI के लिए
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यूरोप की प्राइवेसी-फोकस्ड कंपनी प्रोटॉन ने अपने एआई चैटबॉट लूमो को बड़ा अपग्रेड दिया है और अब लूमो 2.0 नाम से इसका नया वर्जन लाइव हो चुका है। अगस्त 2025 में लॉन्च हुए इस चैटबॉट में अब इमेज जनरेशन, बेहतर रीजनिंग के लिए नया थिंकिंग मोड, बेहतर वेब सर्च और मेमोरी जैसी कई नई क्षमताएं जोड़ी गई हैं, जिससे यह चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे बड़े नामों को अब कड़ी टक्कर देने लगा है, वो भी प्राइवेसी को लेकर अपने सख्त रुख के साथ।

लूमो 2.0 कैसे इस्तेमाल करें और कीमत क्या है

लूमो वेब, एंड्रॉयड और iOS तीनों पर उपलब्ध है और इसे मुफ्त में इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है, इसके लिए प्रोटॉन अकाउंट होना भी जरूरी नहीं है। जो लोग ज्यादा फीचर्स चाहते हैं उनके लिए $12.99 प्रति माह वाला पेड प्रो प्लान भी है, जिसमें पूरी चैट हिस्ट्री सेव रहती है, ज्यादा एडवांस्ड एआई मॉडल मिलते हैं और चैट व फाइल साइज दोनों की लिमिट भी बढ़ जाती है। प्रोटॉन के बाकी सब्सक्रिप्शन पैकेज में यह प्रो प्लान शामिल नहीं है, इसे अलग से ही खरीदना पड़ता है।

प्राइवेसी को लेकर प्रोटॉन का दावा

लूमो 2.0 के लॉन्च से जुड़ी जानकारी में प्रोटॉन ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि यह चैटबॉट यूजर का बहुत कम डेटा और निजी जानकारी अपने पास रखता है। चैटबॉट को काम करने के लिए थोड़ा-बहुत डेटा स्टोर करना ही पड़ता है, हालांकि जो यूजर चाहें वे अपनी पुरानी चैट बाद में देखने के लिए सेव करके भी रख सकते हैं।

सबसे अहम बात यह है कि यूजर की चैट का इस्तेमाल लूमो को बनाने वाले एआई मॉडल को ट्रेन करने में नहीं किया जाता। चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे चैटबॉट में यह सुविधा एक ऑप्शन के तौर पर दी जाती है जिसे यूजर को खुद ऑन या ऑफ करना पड़ता है, और यही बात ऐपल इंटेलिजेंस की भी एक बड़ी खासियत मानी जाती है। बाकी कई एआई प्रोडक्ट्स इस बारे में उतने पारदर्शी नहीं हैं कि यूजर की बातचीत ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो रही है या नहीं। चैटजीपीटी डिफॉल्ट रूप से यूजर की चैट का इस्तेमाल अपने मॉडल को ट्रेन करने में करता है, हालांकि इसे बंद करने का विकल्प यूजर के पास मौजूद है।

लूमो में चैट के लिए जीरो-एक्सेस एन्क्रिप्शन भी दिया गया है, यानी कोई भी, चाहे कानून-प्रशासन हो, सरकारी एजेंसियां हों या फिर खुद प्रोटॉन के कर्मचारी, आपकी चैट अंदर से नहीं देख सकते। यह बाकी एआई प्लेटफॉर्म्स से लूमो को अलग खड़ा करता है, भले ही गूगल और ओपनएआई जैसी कंपनियां यह दलील देती हों कि उनके पास भी सख्त कानूनी प्रक्रियाएं और नियम-कायदे हैं जो सेव की गई चैट को निजी बनाए रखते हैं। फिर भी, बड़े लैंग्वेज मॉडल पर बने बाकी एआई की तरह लूमो भी पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं दे पाता, यह बात प्रोटॉन ने खुद स्वीकार की है।

लूमो की प्राइवेसी की तुलना दूसरे चैटबॉट से करना आसान नहीं है, क्योंकि यह इस बात पर बहुत हद तक निर्भर करता है कि यूजर अपनी चैट सेव रखता है या डिलीट करता जाता है। मामला तब और उलझ जाता है जब पता चलता है कि ओपनएआई को फिलहाल न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ चल रहे एक मुकदमे की वजह से यूजर की बड़ी संख्या में चैट अपने पास रखनी पड़ रही हैं, यहां तक कि वे चैट भी जिन्हें यूजर पहले ही डिलीट कर चुके हैं।

इतना जरूर साफ है कि इस मामले में प्रोटॉन बाकी कंपनियों के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीरता दिखा रहा है। जेमिनी में यूजर की कुछ चैट को इंसानी तौर पर रिव्यू किया जाता है, गूगल के मुताबिक इससे उसकी सर्विस बेहतर बनाने में मदद मिलती है, लेकिन लूमो में ऐसी कोई इंसानी समीक्षा नहीं होती। जेमिनी में चैट को अपने आप डिलीट करने का ऑटो-डिलीट फीचर जरूर दिया गया है, लेकिन इंसानी समीक्षा को पूरी तरह हटाकर लूमो एक कदम और आगे निकल जाता है। यही वजह है कि किसी भी एआई चैटबॉट के साथ बहुत निजी बातें शेयर करने से बचना ही समझदारी है। लूमो ओपन सोर्स एआई मॉडल पर चलता है, जिससे इसमें पारदर्शिता की एक और परत जुड़ जाती है, और प्रोटॉन ने इसे किसी थर्ड पार्टी कंपनी के साथ साझेदारी के बिना तैयार किया है, ताकि इसकी प्राइवेसी पॉलिसी किसी बाहरी कनेक्शन की वजह से कमजोर न पड़े। लूमो में इस्तेमाल हो रहे लार्ज लैंग्वेज मॉडल और प्राइवेसी से जुड़ी और जानकारी प्रोटॉन की अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध है। प्रोटॉन के बाकी प्रोडक्ट्स की तरह लूमो भी यूरोप से संचालित होता है, यानी इस पर अमेरिका जैसी जगहों वाले डेटा सर्विलांस और डेटा रिटेंशन के सख्त नियम लागू नहीं होते।

चैटजीपीटी के मुकाबले कहां खड़ा है लूमो 2.0

लूमो 1.0 को लेकर पहले हुए आकलन में इमेज जनरेशन और गहरी रीजनिंग को उसकी दो बड़ी कमजोरियां बताया गया था, जिनकी वजह से यह दूसरे बड़े चैटबॉट से पीछे रह जाता था। अब यह कमी दूर हो चुकी है। लूमो 2.0 अब इमेज बना भी सकता है और उसे एनालाइज भी कर सकता है। इसकी परख एक स्पेसशिप, एक जंगल में बने केबिन और एक कार्टून जैसे शहर की तस्वीर बनवाकर की गई।

दोनों चैटबॉट के नतीजे लगभग बराबरी के रहे। लूमो कुल मिलाकर चैटजीपीटी को अच्छी टक्कर देता दिखा, और इसकी स्पेसशिप वाली तस्वीर तीनों में सबसे दमदार निकली। चैटजीपीटी की तस्वीरें देखने में थोड़ी ज्यादा प्रभावशाली जरूर लगीं, लेकिन वे असली प्रॉम्प्ट से भटकती भी ज्यादा नजर आईं। चैटजीपीटी की तरह लूमो में भी फॉलो-अप प्रॉम्प्ट देकर बनी हुई तस्वीर में बदलाव किया जा सकता है, और लूमो ने काम लायक तस्वीरें काफी तेजी से तैयार कीं, हालांकि इसकी एक वजह यह भी रही कि इसकी तस्वीरों का रिजॉल्यूशन चैटजीपीटी के मुकाबले थोड़ा कम था।

लूमो 2.0 में एक नया थिंकिंग मोड भी जोड़ा गया है, जो सामान्य फास्ट मोड से थोड़ा धीमा है लेकिन रीजनिंग में बेहतर नतीजे देता है। इसे कई भारी-भरकम साइंटिफिक रिसर्च पेपर पर आजमाया गया, और इसकी एनालिसिस व समरी लिखावट और स्ट्रक्चर के मामले में चैटजीपीटी के लगभग बराबर निकलीं। कुछ मौकों पर तो लूमो ने चैटजीपीटी से भी ज्यादा आसान भाषा में जानकारी समझाई।

वेब सर्च के मामले में भी लूमो 2.0 ने अच्छी छलांग लगाई है। अब यह वेब से जानकारी जुटाने और उसे व्यवस्थित करने में चैटजीपीटी के बराबर पहुंच गया है। दोनों चैटबॉट से टेक्नोलॉजी से जुड़ी कुछ ताजा खबरों की समरी बनवाई गई, और दोनों ने यह काम लगभग बराबर अच्छे तरीके से किया, साथ ही सर्च प्रोग्रेस के अपडेट और आखिर में रेफरेंस भी दिखाए। चैटजीपीटी की समरी थोड़ी ज्यादा विस्तृत रहीं, लेकिन लूमो ने जानकारी को जिस तरह पेश किया, वह ज्यादा सुव्यवस्थित लगा।

और क्या नया है, और अभी लूमो कहां खड़ा है

इमेज, रीजनिंग और सर्च के अलावा लूमो 2.0 में मेमोरी रिकॉल और मैनेजमेंट भी बेहतर हुआ है। इसके साथ ही एक नया कस्टम लूमोज़ फीचर भी आया है, जो चैटजीपीटी के कस्टम जीपीटी फीचर जैसा ही है। इसकी मदद से यूजर खास कामों के लिए अलग-अलग एआई असिस्टेंट बना सकते हैं, जैसे लिखे हुए टेक्स्ट को पॉलिश करना या वेब सर्च के नतीजों को किसी खास फॉर्मेट में दिखाना।

इन सभी बदलावों से साफ पता चलता है कि अपने पहले वर्जन के मुकाबले लूमो ने जवाबों की क्वालिटी और फीचर्स दोनों मामलों में लंबा सफर तय किया है। चैटजीपीटी अब भी ज्यादा मैच्योर प्रोडक्ट है, लाइव वॉइस मोड और प्रोफेशनल कोडिंग असिस्टेंट जैसे फीचर्स में यह अब भी आगे है। लेकिन लूमो और बड़े, स्थापित एआई चैटबॉट के बीच का फासला अब काफी कम हो चुका है, खासकर रोजमर्रा के आम इस्तेमाल के लिए। जो लोग प्राइवेसी को लेकर ज्यादा सतर्क एआई असिस्टेंट चाहते हैं, उनके लिए लूमो एक बार आजमाने लायक विकल्प है।

इसका आप पर असर

अगर आप एआई चैटबॉट इस्तेमाल करते समय अपनी प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहते हैं, तो यह अपडेट आपके काम की है।

  • प्राइवेसी चाहने वालों के लिए: लूमो 2.0 चैट को एआई मॉडल की ट्रेनिंग में इस्तेमाल नहीं करता और जीरो-एक्सेस एन्क्रिप्शन देता है, इसलिए जो लोग बातचीत को निजी रखना चाहते हैं उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है।
  • आम यूजर्स के लिए: अब लूमो पर मुफ्त में ही इमेज जनरेशन, थिंकिंग मोड और वेब सर्च जैसे फीचर मिल रहे हैं, इसलिए बिना $12.99 प्रति माह वाला पेड प्लान लिए भी काफी काम चलाया जा सकता है।

सवाल-जवाब

लूमो 2.0 क्या है?
यह प्रोटॉन का अपग्रेडेड एआई चैटबॉट है, जिसमें अब इमेज जनरेशन, थिंकिंग मोड और बेहतर वेब सर्च जैसे नए फीचर जोड़े गए हैं।
लूमो कहां और कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है?
लूमो वेब, एंड्रॉयड और iOS पर मुफ्त में उपलब्ध है और इसके लिए प्रोटॉन अकाउंट की भी जरूरत नहीं है।
लूमो का पेड प्लान कितने का है और उसमें क्या मिलता है?
पेड प्रो प्लान $12.99 प्रति माह का है, जिसमें पूरी चैट हिस्ट्री, ज्यादा एडवांस्ड एआई मॉडल और चैट व फाइल साइज की ज्यादा लिमिट मिलती है।
क्या लूमो की चैट का इस्तेमाल एआई मॉडल को ट्रेन करने में किया जाता है?
नहीं, लूमो की चैट को उसके एआई मॉडल की ट्रेनिंग में इस्तेमाल नहीं किया जाता।
क्या लूमो और चैटजीपीटी की इमेज जनरेशन क्षमता बराबर है?
दोनों के नतीजे काफी करीब रहे, हालांकि चैटजीपीटी की तस्वीरें ज्यादा प्रभावशाली दिखीं जबकि लूमो ने तस्वीरें ज्यादा तेजी से बनाईं।
लूमो 2.0 का थिंकिंग मोड क्या करता है?
यह फास्ट मोड से धीमा है लेकिन जटिल विषयों पर बेहतर और ज्यादा भरोसेमंद रीजनिंग देता है।
क्या लूमो अब भी चैटजीपीटी से पीछे है?
हां, लाइव वॉइस मोड और प्रोफेशनल कोडिंग असिस्टेंट जैसे फीचर में चैटजीपीटी अब भी आगे है, लेकिन आम इस्तेमाल के लिए दोनों के बीच का फासला काफी कम हो गया है।
कस्टम लूमोज़ फीचर क्या है?
यह चैटजीपीटी के कस्टम जीपीटी जैसा फीचर है, जिससे यूजर खास कामों के लिए अलग-अलग एआई असिस्टेंट बना सकते हैं।
रोहन गुप्ता
लेखक के बारे मेंरोहन गुप्ताटेक्नोलॉजी संवाददाता नोएडा
विशेषज्ञताटेक्नोलॉजी समाचार, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, गैजेट्स, सॉफ़्टवेयर, साइबर सुरक्षा, इनोवेशन, डिजिटल रुझान, बिग टेक, प्रोडक्ट रिव्यू

रोहन गुप्ता एक टेक्नोलॉजी संवाददाता हैं जो टेक न्यूज़, स्टार्टअप, गैजेट्स, एआई, सॉफ़्टवेयर और डिजिटल इनोवेशन को कवर करते हैं। वे टेक्नोलॉजी उद्योग को आकार देने वाले नए घटनाक्रमों पर रिपोर्ट करते हैं।

रोहन गुप्ता एक टेक्नोलॉजी संवाददाता हैं जो टेक्नोलॉजी पत्रकारिता — आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, सॉफ़्टवेयर विकास, कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार्टअप, साइबर सुरक्षा और उभरते डिजिटल रुझानों — में विशेषज्ञता रखते हैं। वे ब्रेकिंग टेक न्यूज़, प्रोडक्ट लॉन्च, उद्योग अपडेट और वैश्विक डिजिटल परिदृश्य को बदलने वाले नवाचारों को कवर करते हैं। स्पष्टता और अंतर्दृष्टि पर ज़ोर देते हुए रोहन जटिल तकनीकी घटनाक्रमों को व्यापक पाठकों के लिए सहज रिपोर्टिंग में बदलते हैं। उनकी कवरेज में बड़ी टेक कंपनियाँ, स्टार्टअप इकोसिस्टम, एआई प्रगति, मोबाइल तकनीक और डिजिटल बदलाव का भविष्य शामिल है।

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