श्रीलंका के 33 वर्षीय बल्लेबाज निरोशन डिकवेला एक ऐसे अनचाहे और शर्मनाक रिकॉर्ड के मुहाने पर खड़े हैं, जिसे कोई भी क्रिकेटर अपने करियर में हासिल नहीं करना चाहेगा। यह मामला टेस्ट क्रिकेट में बिना किसी शतक के सबसे ज्यादा रन बनाने का है। फिलहाल यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न के नाम दर्ज है, लेकिन निरोशन डिकवेला जिस तरह से आगे बढ़ रहे हैं, उससे यह महान रिकॉर्ड अब खतरे में नजर आ रहा है। अगर आगामी मैचों में उनके बल्ले से शतकीय सूखा खत्म नहीं होता है, तो वह शेन वॉर्न को पीछे छोड़ते हुए इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल कर लेंगे।
अपने अब तक के लंबे टेस्ट करियर के दौरान निरोशन डिकवेला 55 मुकाबले खेल चुके हैं, लेकिन उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वह एक भी शतक लगाने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। इस दौरान उन्होंने कुल 2837 रन अपने नाम किए हैं। टेस्ट इतिहास में बिना शतक के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की फेहरिस्त में वह वर्तमान में दूसरे पायदान पर काबिज हैं। हाल ही में गॉल में खेले गए मैच के दौरान उनके पास अपना पहला टेस्ट शतक जड़ने का सुनहरा मौका था, लेकिन वह 80 रन के निजी स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौट गए।
शेन वॉर्न के उस रिकॉर्ड की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर ने अपने टेस्ट करियर में कुल 3154 रन बनाए थे, मगर उनके नाम एक भी शतक दर्ज नहीं था। निरोशन डिकवेला के कुल रन 2837 हैं, जिसका मतलब है कि वह वॉर्न के इस अनचाहे आंकड़े से मात्र 317 रन दूर हैं। चूंकि निरोशन डिकवेला एक विशेषज्ञ बल्लेबाज और विकेटकीपर रहे हैं, इसलिए उन्हें क्रीज पर टिकने और लगातार रन बनाने के ढेरों अवसर मिले हैं। यही वजह है कि वॉर्न का यह पुराना रिकॉर्ड अब खतरे में दिखाई दे रहा है और खेल पंडितों की इस पर पैनी नजर बनी हुई है।
यह अकेला ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड नहीं है जो निरोशन डिकवेला के नाम से जुड़ा हुआ है। टेस्ट क्रिकेट में बिना शतक बनाए सबसे ज्यादा पचास या उससे अधिक रन की पारियां खेलने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम पर दर्ज है। उन्होंने अपने करियर में 23 बार पचास से ज्यादा का स्कोर बनाया है, लेकिन हर बार वह तीन अंकों के जादुई आंकड़े को छूने से चूक गए। इस फेहरिस्त में उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 96 रन रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि वह कई मौकों पर शतक के बेहद करीब पहुंचे, मगर नर्वस नाइनटीज या अन्य कारणों से चूक गए।
इस मामले में भारत के पूर्व खिलाड़ी चेतन चौहान दूसरे पायदान पर आते हैं, जिन्होंने बिना शतक के 16 बार पचास से अधिक रन बनाए थे और उनका सर्वोच्च स्कोर 97 रन था। निरोशन डिकवेला इस मामले में उनसे सात कदम आगे निकल चुके हैं। इस अनचाही फेहरिस्त में ऑस्ट्रेलिया के दो अन्य चर्चित नाम केन मैके और मिचेल स्टार्क भी शामिल हैं, जिन्होंने तेरह-तेरह बार पचास से ज्यादा का स्कोर बनाया। केन मैके का सर्वोच्च स्कोर 89 रन था, जबकि मिचेल स्टार्क तो 99 रन के फेर में फंसकर आउट हो चुके हैं। शेन वॉर्न ने भी बारह बार पचास से अधिक रन बनाए और उनका सर्वोच्च स्कोर भी 99 रन पर ही सिमट गया था।
निरोशन डिकवेला के आंकड़े इसलिए भी खास चर्चा का विषय बने हुए हैं क्योंकि उन्होंने अपनी टीम के लिए एक लंबी पारी खेली है और विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभाली है। उनके खाते में तेरह अर्धशतक जुड़ चुके हैं, लेकिन सैकड़ा अभी भी दूर है। यदि वह आने वाले मुकाबलों में 318 रन और बना लेते हैं और इस दौरान भी उनके बल्ले से कोई शतक नहीं निकलता है, तो वह शेन वॉर्न को पछाड़कर इस अनचाहे रिकॉर्ड के नए सरताज बन जाएंगे। क्रिकेट इतिहास में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस रिकॉर्ड से बच पाते हैं या इतिहास के पन्नों में अपना नाम इस रूप में दर्ज कराते हैं।


















