राजस्थान के मशहूर हिल स्टेशन माउंट आबू या गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ अम्बाजी के दर्शन के लिए अगर आप ट्रेन पकड़ रहे हैं, तो सफर आबूरोड रेलवे स्टेशन पर ही खत्म होता है. दिल्ली-अहमदाबाद रेल मार्ग पर बसा यह स्टेशन इन दोनों बड़े दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने का असली प्रवेश द्वार है. सिरोही जिले के इस सबसे बड़े रेलवे स्टेशन को अजमेर रेल मंडल का एक आदर्श स्टेशन भी माना जाता है, और अब इसकी पूरी तस्वीर बदलने की तैयारी है.
यात्रियों की सहूलियत के लिए यहां आधुनिक और सुविधाओं से लैस 3 प्लेटफॉर्म बने हुए हैं. खास बात यह है कि स्टेशन की साफ-सफाई की जिम्मेदारी ब्रह्माकुमारी संस्थान संभालता है, यही वजह है कि यह हमेशा चमकता रहता है. रोजाना और साप्ताहिक ट्रेनों को मिलाकर आबूरोड पर कुल 122 ट्रेनों का ठहराव होता है.
देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद
स्थानीय टूरिस्ट गाइड चिंटू यादव के मुताबिक, माउंट आबू, अम्बाजी और प्रसिद्ध जैन तीर्थ पावापुरी जैसे स्थलों के साथ-साथ आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारी संस्थान का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय भी यहीं है. यही कारण है कि देश और विदेश से बड़ी तादाद में पर्यटक ट्रेन के जरिए यहां पहुंचते हैं. आबूरोड से माउंट आबू की दूरी 27 किलोमीटर है, जबकि देश के 51 शक्तिपीठों में से एक अम्बाजी धाम यहां से महज 20 किलोमीटर दूर है.
145 साल पुराना गौरवशाली इतिहास
इस स्टेशन का इतिहास करीब 145 साल पुराना है. राजपुताना मालवा रेलवे ने 30 दिसंबर 1880 को यहां स्टेशन की नींव रखी थी और इसका नाम बदलकर आबूरोड रखा गया. इसके बाद 26 अक्टूबर 1966 को भारतीय रेलवे ने यहां एक भव्य डीजल लोको शेड की स्थापना की. यह डीजल शेड अजमेर रेल मंडल का इकलौता और उत्तर-पश्चिमी रेलवे क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा डीजल शेड है, जो इसकी अहमियत को और बढ़ा देता है.
हर बड़े शहर से सीधी ट्रेन
अगर आप किसी भी मेट्रो या बड़े शहर से माउंट आबू आने का मन बना रहे हैं, तो आबूरोड के लिए सीधी ट्रेनें आसानी से मिल जाती हैं. यहां वंदे भारत और राजधानी जैसी प्रीमियम गाड़ियों के अलावा कई सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनें रुकती हैं. दिल्ली, मुंबई, जयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई समेत देश के तमाम प्रमुख शहरों से यहां तक रेल कनेक्टिविटी मौजूद है.
पर्यटन ही नहीं, उद्योग का भी केंद्र
यह स्टेशन सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि औद्योगिक नजरिए से भी बेहद अहम है. स्टेशन के पास ही रीको के 4 बड़े इंडस्ट्रियल एरिया हैं. इन इलाकों में मार्बल, ग्रेनाइट, सीमेंट और स्टील की बड़ी इकाइयां लगी हैं, जिनका माल देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों तक बड़े पैमाने पर भेजा जाता है.
81 करोड़ से होगा वर्ल्ड क्लास कायाकल्प
अजमेर मंडल के वरिष्ठ जनसंपर्क निरीक्षक के अनुसार, इस स्टेशन के आधुनिकीकरण और कायाकल्प के लिए रेलवे ने 81 करोड़ रुपये का बड़ा बजट तय किया है. फिलहाल भी यहां यात्रियों के लिए एसी वेटिंग हॉल और सामान्य वेटिंग हॉल शानदार तरीके से बने हुए हैं. माउंट आबू या अम्बाजी जाने के लिए टैक्सी और बस की सुविधा स्टेशन के ठीक बाहर मिल जाती है, क्योंकि रोडवेज का मुख्य बस स्टैंड यहां से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर है.













