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81 करोड़ रुपये से बदलेगी आबूरोड स्टेशन की सूरत, माउंट आबू और अम्बाजी तक पहुंचने का यही है मुख्य द्वारयात्रा
2 घंटे पहले· 2

81 करोड़ रुपये से बदलेगी आबूरोड स्टेशन की सूरत, माउंट आबू और अम्बाजी तक पहुंचने का यही है मुख्य द्वार

दिल्ली-अहमदाबाद रेल मार्ग पर बसा आबूरोड स्टेशन माउंट आबू और अम्बाजी का सबसे नजदीकी रेलवे ठिकाना है, जहां रोजाना और साप्ताहिक मिलाकर 122 ट्रेनें रुकती हैं. अब रेलवे इसे वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए 81 करोड़ रुपये खर्च करेगा.

काव्या नायरकाव्या नायरट्रैवल एडिटर 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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राजस्थान के मशहूर हिल स्टेशन माउंट आबू या गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ अम्बाजी के दर्शन के लिए अगर आप ट्रेन पकड़ रहे हैं, तो सफर आबूरोड रेलवे स्टेशन पर ही खत्म होता है. दिल्ली-अहमदाबाद रेल मार्ग पर बसा यह स्टेशन इन दोनों बड़े दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने का असली प्रवेश द्वार है. सिरोही जिले के इस सबसे बड़े रेलवे स्टेशन को अजमेर रेल मंडल का एक आदर्श स्टेशन भी माना जाता है, और अब इसकी पूरी तस्वीर बदलने की तैयारी है.

यात्रियों की सहूलियत के लिए यहां आधुनिक और सुविधाओं से लैस 3 प्लेटफॉर्म बने हुए हैं. खास बात यह है कि स्टेशन की साफ-सफाई की जिम्मेदारी ब्रह्माकुमारी संस्थान संभालता है, यही वजह है कि यह हमेशा चमकता रहता है. रोजाना और साप्ताहिक ट्रेनों को मिलाकर आबूरोड पर कुल 122 ट्रेनों का ठहराव होता है.

देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद

स्थानीय टूरिस्ट गाइड चिंटू यादव के मुताबिक, माउंट आबू, अम्बाजी और प्रसिद्ध जैन तीर्थ पावापुरी जैसे स्थलों के साथ-साथ आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारी संस्थान का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय भी यहीं है. यही कारण है कि देश और विदेश से बड़ी तादाद में पर्यटक ट्रेन के जरिए यहां पहुंचते हैं. आबूरोड से माउंट आबू की दूरी 27 किलोमीटर है, जबकि देश के 51 शक्तिपीठों में से एक अम्बाजी धाम यहां से महज 20 किलोमीटर दूर है.

145 साल पुराना गौरवशाली इतिहास

इस स्टेशन का इतिहास करीब 145 साल पुराना है. राजपुताना मालवा रेलवे ने 30 दिसंबर 1880 को यहां स्टेशन की नींव रखी थी और इसका नाम बदलकर आबूरोड रखा गया. इसके बाद 26 अक्टूबर 1966 को भारतीय रेलवे ने यहां एक भव्य डीजल लोको शेड की स्थापना की. यह डीजल शेड अजमेर रेल मंडल का इकलौता और उत्तर-पश्चिमी रेलवे क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा डीजल शेड है, जो इसकी अहमियत को और बढ़ा देता है.

हर बड़े शहर से सीधी ट्रेन

अगर आप किसी भी मेट्रो या बड़े शहर से माउंट आबू आने का मन बना रहे हैं, तो आबूरोड के लिए सीधी ट्रेनें आसानी से मिल जाती हैं. यहां वंदे भारत और राजधानी जैसी प्रीमियम गाड़ियों के अलावा कई सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनें रुकती हैं. दिल्ली, मुंबई, जयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई समेत देश के तमाम प्रमुख शहरों से यहां तक रेल कनेक्टिविटी मौजूद है.

पर्यटन ही नहीं, उद्योग का भी केंद्र

यह स्टेशन सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि औद्योगिक नजरिए से भी बेहद अहम है. स्टेशन के पास ही रीको के 4 बड़े इंडस्ट्रियल एरिया हैं. इन इलाकों में मार्बल, ग्रेनाइट, सीमेंट और स्टील की बड़ी इकाइयां लगी हैं, जिनका माल देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों तक बड़े पैमाने पर भेजा जाता है.

81 करोड़ से होगा वर्ल्ड क्लास कायाकल्प

अजमेर मंडल के वरिष्ठ जनसंपर्क निरीक्षक के अनुसार, इस स्टेशन के आधुनिकीकरण और कायाकल्प के लिए रेलवे ने 81 करोड़ रुपये का बड़ा बजट तय किया है. फिलहाल भी यहां यात्रियों के लिए एसी वेटिंग हॉल और सामान्य वेटिंग हॉल शानदार तरीके से बने हुए हैं. माउंट आबू या अम्बाजी जाने के लिए टैक्सी और बस की सुविधा स्टेशन के ठीक बाहर मिल जाती है, क्योंकि रोडवेज का मुख्य बस स्टैंड यहां से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर है.

इसका आप पर असर

  • भारत में: देशभर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अब बेहतर सुविधाओं वाले आबूरोड स्टेशन से माउंट आबू और अम्बाजी की यात्रा और आसानी से कर सकेंगे.
  • राजस्थान में: सिरोही और आसपास के लोगों को 81 करोड़ के कायाकल्प से आधुनिक स्टेशन, बेहतर वेटिंग हॉल और मजबूत रेल कनेक्टिविटी का सीधा फायदा मिलेगा.

सवाल-जवाब

माउंट आबू और अम्बाजी के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कौन सा है?
आबूरोड रेलवे स्टेशन दोनों जगहों के लिए सबसे नजदीकी स्टेशन है और इन तक पहुंचने का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है.
आबूरोड से माउंट आबू और अम्बाजी कितनी दूर हैं?
आबूरोड से माउंट आबू की दूरी 27 किलोमीटर और अम्बाजी धाम की दूरी सिर्फ 20 किलोमीटर है.
आबूरोड स्टेशन पर कितनी ट्रेनें रुकती हैं?
रोजाना और साप्ताहिक ट्रेनों को मिलाकर यहां कुल 122 ट्रेनों का ठहराव होता है, जिनमें वंदे भारत और राजधानी जैसी प्रीमियम गाड़ियां भी शामिल हैं.
स्टेशन के कायाकल्प पर कितना खर्च होगा?
रेलवे ने इस स्टेशन के आधुनिकीकरण और कायाकल्प के लिए 81 करोड़ रुपये का बजट तय किया है.
आबूरोड स्टेशन की स्थापना कब हुई थी?
राजपुताना मालवा रेलवे ने 30 दिसंबर 1880 को यहां स्टेशन की स्थापना की थी, यानी इसका इतिहास करीब 145 साल पुराना है.
स्टेशन तक पहुंचने के बाद माउंट आबू या अम्बाजी कैसे जाएं?
स्टेशन के ठीक बाहर टैक्सी और बस की सुविधा मिल जाती है, क्योंकि रोडवेज का मुख्य बस स्टैंड यहां से सिर्फ 500 मीटर दूर है.
काव्या नायर
लेखक के बारे मेंकाव्या नायरट्रैवल एडिटर देहरादून
विशेषज्ञताट्रैवल लेखन, पर्यटन, डेस्टिनेशन गाइड, संस्कृति, लाइफस्टाइल ट्रैवल, होटल, एडवेंचर ट्रैवल, फूड एवं ट्रैवल, वैश्विक पर्यटन रुझान

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, पर्यटन रुझानों, संस्कृति और लाइफस्टाइल अनुभवों को कवर करती हैं। वे दुनियाभर के यात्रियों के लिए दिलचस्प कहानियाँ और व्यावहारिक जानकारी साझा करती हैं।

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों की कवरेज, ट्रैवल फ़ीचर, सांस्कृतिक खोज और ट्रैवल लाइफस्टाइल पत्रकारिता में विशेषज्ञता रखती हैं। वे लोकप्रिय व उभरते पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, होटल व आतिथ्य अनुभवों, स्थानीय संस्कृतियों, खानपान परंपराओं और एडवेंचर टूरिज़्म के बारे में लिखती हैं। प्रेरक और जानकारीपूर्ण कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए काव्या पाठकों को नई जगहें खोजने और सार्थक यात्रा अनुभव योजना बनाने में मदद करती हैं। उनका काम वैश्विक पर्यटन रुझानों, बजट व लक्ज़री ट्रैवल की अंतर्दृष्टि और पाठकों को दुनियाभर की जगहों से जोड़ने वाली सांस्कृतिक कहानियों को उजागर करता है।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें ↗
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