अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले कई पर्यटकों के लिए यह बात हैरान करने वाली हो सकती है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में पीने का साफ पानी खरीदना बीयर पीने से भी अधिक महंगा पड़ता है। कई मशहूर पर्यटन स्थलों पर होटलों के कमरों में मेहमानों के लिए बोतलबंद पानी के साथ मुफ्त बीयर भी रखी जाती है। पेय पदार्थों की कीमतों में यह अनोखा अंतर केवल स्वाद या किसी बड़े ब्रांड के कारण नहीं है। इसके पीछे संबंधित देश की कर नीतियां, स्थानीय विनिर्माण प्रक्रिया, पीने के पानी की गुणवत्ता और वहां की सांस्कृतिक परंपराएं जैसे महत्वपूर्ण कारक काम करते हैं।
वियतनाम में पानी की बोतल से भी कम कीमत में मिलती है बीयर
कीमतों के इस अचरज भरे अंतर का सबसे प्रमुख उदाहरण दक्षिण पूर्व एशियाई देश वियतनाम में देखने को मिलता है। वियतनाम में स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली ताजा बीयर बिया होई बेहद लोकप्रिय है। वियतनामी सड़कों के किनारे लगने वाले स्टॉलों पर बिया होई का एक गिलास लगभग 5000 से 10,000 वियतनामी डोंग में बिकता है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब 18 से 35 रुपये बैठती है। इसके विपरीत, वहां 500 मिलीलीटर की बोतलबंद पानी की एक बोतल खरीदने के लिए करीब 30,000 डोंग यानी लगभग 102 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि वियतनाम की कई जगहों पर एक बोतल पानी की कीमत में कोई भी व्यक्ति दो से तीन गिलास बीयर आसानी से पी सकता है।
मुफ्त बीयर और आतिथ्य सत्कार की अनोखी परंपरा
वियतनाम के पर्यटन उद्योग में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मुफ्त बीयर देने का चलन काफी लोकप्रिय है। वहां के कई प्रीमियम होटलों में कमरों के मिनी बार के भीतर बोतलबंद पानी के साथ मुफ्त बीयर का इंतजाम रहता है। इसी तरह बजट हॉस्टल भी युवा यात्रियों और बैकपैकर्स को जोड़ने के लिए शाम के समय हैप्पी आवर आयोजित करते हैं, जहां मेहमानों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बीयर परोसी जाती है।
सस्ती बीयर और महंगे पानी का तकनीकी गणित
वियतनाम में बिया होई के इतने सस्ते होने की वजह इसकी खास उत्पादन और वितरण व्यवस्था है। यह बीयर रोजाना ताजा तैयार की जाती है और इसे बनाने में चावल जैसे सस्ते तथा आसानी से उपलब्ध स्थानीय सामान का इस्तेमाल होता है। इसमें अल्कोहल की मात्रा भी बेहद कम, करीब 2 से 3 प्रतिशत ही होती है। इसे कांच की बोतलों में पैक करने या ब्रांडिंग करने के बजाय सीधे बड़े पीपों यानी केग्स से बेचा जाता है। इससे पैकेजिंग, ब्रांडिंग और लंबी दूरी के परिवहन का खर्च बच जाता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर निर्मित होने के कारण इस पर सरकारी टैक्स भी काफी कम लगता है। दूसरी ओर, कई इलाकों में नल का पानी सीधे पीने योग्य नहीं होता, जिससे लोगों को बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। पानी की बोतल पर प्लास्टिक पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट, ब्रांड मार्जिन और रिटेलर का मुनाफा जुड़ने से उसकी अंतिम कीमत बीयर से भी ज्यादा हो जाती है।
जापान और कैरिबियाई देशों में भी है फ्री बीयर का ट्रेंड
मुफ्त बीयर परोसने की यह संस्कृति सिर्फ वियतनाम तक सीमित नहीं है। मेक्सिको, जमैका और डोमिनिकन रिपब्लिक के ऑल-इंक्लूसिव रिसॉर्ट्स में ठहरने वाले मेहमानों को कमरों के मिनी बार में पानी और सॉफ्ट ड्रिंक्स के साथ स्थानीय बीयर मुफ्त मिलती है। इन रिसॉर्ट्स के रेस्तरां, बार और स्विमिंग पूल एरिया में भी पैकेज के तहत पेय उपलब्ध कराए जाते हैं। इसी तरह जापान के टोक्यो और ओसाका जैसे बड़े शहरों के कुछ होटलों में मेहमानों के लिए एक घंटे का फ्री बीयर आवर चलाया जाता है। इसके अलावा जर्मनी और चेक गणराज्य जैसे यूरोपीय देशों में, जहां बीयर वहां की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, छोटे होटल और सराय अपने मेहमानों का स्वागत मुफ्त स्थानीय बीयर से करते हैं।
कतर में बिल्कुल उलटी है तस्वीर
एक तरफ जहां कई देशों में बीयर पानी से भी सस्ती उपलब्ध है, वहीं खाड़ी देश कतर में स्थिति बिल्कुल इसके विपरीत है। कतर में एक पाइंट बीयर खरीदने के लिए ग्राहक को लगभग 11 से 13 डॉलर, यानी भारतीय रुपये में करीब 990 से 1100 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। कतर में बीयर के इतना महंगा होने की मुख्य वजह वहां शराब की बिक्री पर लागू सख्त नियम और सरकार द्वारा लगाया जाने वाला भारी सिन टैक्स है।


















