मध्य प्रदेश राज्य का बुरहानपुर जिला अपनी गोद में एक असाधारण और समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है। ताप्ती नदी के तट पर खड़ा शाही किला इस क्षेत्र के गौरवशाली अतीत का एक सजीव प्रमाण माना जाता है। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां कभी मुगल बादशाह शाहजहां स्वयं निवास करते थे और उनका शाही दरबार सजा करता था। आज भी यह विशाल दुर्ग देश और विदेश से आने वाले अनगिनत पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
शाहजहां का शाही दरबार और शाम की संगीतमय महफिलें
शाहजहां जब बुरहानपुर में रहते थे, तब इस शाही किले की भव्यता देखते ही बनती थी। किले के भीतर प्रतिदिन राजकीय दरबार लगता था और प्रशासनिक कामकाज निपटाए जाते थे। जैसे ही दिन ढलता था और शाम होती थी, किले के विस्तृत प्रांगण में सांस्कृतिक और मनोरंजक महफिलें जमती थीं। सुरीले संगीत की धुनों से पूरा किला परिसर गूंज उठता था। इस दुर्ग में भ्रमण करते हुए आज के दौर में भी पर्यटक मुगल काल की उस वैभवशाली और आनंदमयी जीवन शैली को अपनी कल्पना में महसूस कर सकते हैं।
मुमताज महल की अंतिम सांसें और ताजमहल का इतिहास
बुरहानपुर के इस किले का ऐतिहासिक महत्व शाहजहां की प्रिय बेगम मुमताज महल की जिंदगी से बेहद गहराई के साथ जुड़ा हुआ है। इतिहासकारों के विवरण के अनुसार मुमताज महल ने अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय इसी बुरहानपुर की पावन धरती पर अपनी अंतिम सांस ली थी। यही मुख्य वजह है कि भारतीय इतिहास के पन्नों में बुरहानपुर एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बेगम मुमताज के निधन के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को प्रारंभिक समय में बुरहानपुर में ही सुरक्षित रखा गया था। बाद में उनके अवशेषों को आगरा ले जाया गया, जहां बादशाह शाहजहां ने उनकी पावन स्मृति में विश्व प्रसिद्ध इमारत ताजमहल का निर्माण कराया। जो पर्यटक आगरा जाकर ताजमहल की सुंदरता और शाहजहां तथा मुमताज की अमर प्रेम कहानी को जानते हैं, वे इस इतिहास की जड़ों की खोज में बुरहानपुर भी पहुंचते हैं।
प्रकृति, टिकट व्यवस्था और पर्यटकों का आकर्षण
बुरहानपुर का शाही किला केवल पत्थरों से बनी कोई पुरानी संरचना मात्र नहीं है, बल्कि यह शाहजहां और मुमताज की अनमोल यादों का एक प्रमुख केंद्र है। किले के चारों तरफ बने सुंदर बगीचे, लहलहाती हरियाली और अत्यंत शांत वातावरण यहां आने वाले हर व्यक्ति का मन मोह लेता है। अपने परिवार के साथ सुहावने मौसम का आनंद लेने आए पर्यटक सनी ने बताया कि इस ऐतिहासिक दुर्ग की मुख्य खासियत शाहजहां और मुमताज महल के गहरे ऐतिहासिक संबंधों में समाहित है। वर्तमान समय में इस किले को देखने के लिए प्रवेश शुल्क की व्यवस्था बनाई गई है। प्रशासन ने टिकट प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है, जिससे पर्यटक बारकोड स्कैन करके प्रवेश शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। स्थानीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹50 निर्धारित किया गया है, जबकि विदेशी सैलानियों के लिए यह शुल्क अधिक रखा गया है।



















