दिल्ली के भरत नगर मर्डर केस में बड़ा मोड़, सीसीटीवी में कैद हुए एक लड़का और तीन लड़कियांब्रिटेन के ऑटम बजट और ब्याज दरों के फैसलों से पहले यूरो के मुकाबले मजबूत हुआ ब्रिटिश पाउंडसऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का हूती विद्रोहियों ने किया दावाकरवाचौथ पर जीवनसंगिनी को दें ये खास तोहफे, चेहरे पर आ जाएगी प्यारी मुस्कानफेडरल रिजर्व की सख्ती और पश्चिम एशिया में खिंचाव के बीच अमेरिकी डॉलर दो हफ्ते के शीर्ष पर, वैश्विक बाजारों में हलचलइथेरियम ईटीएफ से भारी निकासी के बीच $2,310 के अहम स्तर पर टिकी ईटीएच की कीमतकरवाचौथ पर हल्के और शाही गहनों से सजाएं अपना रूप, ये पांच शानदार विकल्प देंगे राजसी अंदाजमेष से मीन राशि तक 28 अक्टूबर का भविष्यफल: सूर्य के नक्षत्र में चंद्रमा का गोचर, जानिए किन राशियों को मिलेगा महालाभजब नाथन एस्टल ने पानी पूरी बेचने वाले को थमा दिया मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड और 1000 पाउंड का इनामहरी पत्तेदार सब्जी सोआ से सुधरेगा हाजमा और घटेगा वजन, जानिए दिल और त्वचा के लिए इसके फायदे
महेश्वर के किले में रात को होता है ऐसा नजारा, जो दिन में लौटने वाले पर्यटक कभी देख ही नहीं पातेयात्रा
15 जुल॰ 2026, 9:26 am (105 दिन पहले)· 5

महेश्वर के किले में रात को होता है ऐसा नजारा, जो दिन में लौटने वाले पर्यटक कभी देख ही नहीं पाते

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित महेश्वर में ज्यादातर पर्यटक शाम तक लौट जाते हैं, लेकिन रात रुकने वाले सैलानियों को मुफ्त लेजर लाइट शो, भव्य नर्मदा आरती और सूर्योदय-सूर्यास्त के अनोखे नजारे देखने को मिलते हैं।

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में बसा महेश्वर अपने ऐतिहासिक किले, नर्मदा नदी के भव्य घाटों, प्राचीन मंदिरों और दुनियाभर में मशहूर माहेश्वरी साड़ियों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस कस्बे की असली खूबसूरती वे लोग नहीं देख पाते जो शाम होते ही यहां से लौट जाते हैं। हर दिन देश-विदेश से बड़ी तादाद में सैलानी महेश्वर पहुंचते हैं, ज्यादातर लोग दिनभर किला, मंदिर और अहिल्याबाई होल्कर की राजगद्दी घूमकर शाम तक वापसी की राह पकड़ लेते हैं। मगर जो पर्यटक यहां रातभर रुकते हैं, वे महेश्वर के उस रूप के गवाह बनते हैं जो दिन के उजाले में कभी नजर ही नहीं आता।

नर्मदा किनारे सुबह-शाम का नजारा किसी फिल्मी सीन जैसा

नर्मदा के तट पर बसे महेश्वर की सुबह और शाम देखने वालों को किसी फिल्म के दृश्य की याद दिला देती है। जब सूरज उगता है, तो उसकी सुनहरी किरणें नदी की लहरों पर पड़कर पूरे घाट को एक स्वर्णिम आभा से नहला देती हैं। इसके उलट जब सूरज ढलता है, तो आसमान में फैली लालिमा नर्मदा के शांत पानी में उतर आती है और पूरा नजारा जैसे ठहर सा जाता है। किले और घाट से दिखने वाला यह दृश्य पर्यटकों के जेहन में लंबे समय तक बसा रहता है।

ये भी पढ़ें

बिना कोई टिकट खरीदे देखें शानदार लेजर लाइट शो

अंधेरा घिरते ही महेश्वर का ऐतिहासिक किला रोशनी से जगमगा उठता है। नर्मदा के शांत बहते पानी और रंग-बिरंगी रोशनी में नहाए किले का यह रूप दिन के नजारे से बिल्कुल अलग अनुभव देता है। रात की खामोशी में पर्यटकों को सुकून के साथ-साथ इस जगह के ऐतिहासिक वैभव का भी गहरा एहसास होता है। महेश्वर की सबसे बड़ी खासियत शाम को होने वाला लेजर लाइट शो है, जो यहां आने वाले हर सैलानी के लिए मुख्य आकर्षण बन चुका है।

इस शो में रंग-बिरंगी लेजर किरणों और ध्वनि प्रभावों के जरिए माहिष्मति नगरी का इतिहास, हैहयवंश, होलकर राजाओं और देवी अहिल्याबाई होल्कर के योगदान को बेहद रोचक अंदाज में दिखाया जाता है। साथ ही मां नर्मदा, भगवान शिव और महेश्वर की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी प्रेरक कहानी भी इसमें पेश की जाती है। खास बात यह है कि पर्यटक इस पूरे शो का लुत्फ बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उठा सकते हैं।

नर्मदा आरती में मिलता है गहरा आध्यात्मिक अनुभव

शाम ढलते ही नर्मदा घाट पर होने वाली भव्य आरती श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को अपनी ओर खींच लेती है। बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर होने वाली इस आरती में वैदिक मंत्रोच्चार, जलते दीयों की रोशनी और तीन पुजारियों द्वारा एक साथ की जाने वाली आरती का दृश्य बेहद मनमोहक होता है। इस आरती में शामिल होने सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं और यहां एक अलग तरह की आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस करते हैं।

महेश्वर जाएं तो कम से कम एक रात जरूर रुकें

अगर आप महेश्वर की यात्रा को सच में यादगार बनाना चाहते हैं, तो यहां एक रात जरूर बिताएं। दिन में ऐतिहासिक किला देखें, मंदिरों की बारीक नक्काशी निहारें और मां नर्मदा के घाटों पर वक्त बिताएं। शाम होते ही लेजर लाइट शो का आनंद लें, नर्मदा आरती में शामिल हों और अगली सुबह सूर्योदय का मनमोहक नजारा अपनी आंखों में कैद करें। यही अनुभव आपकी इस यात्रा को असल मायनों में खास बना देगा।

माहिष्मति नगरी का गौरवशाली इतिहास

प्राचीन काल में महेश्वर को माहिष्मति नाम से जाना जाता था। पौराणिक मान्यताओं और इतिहासकारों के मुताबिक इस नगरी की नींव हैहयवंशी राजाओं ने रखी थी। महान सम्राट कार्तवीर्य सहस्त्रार्जुन ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। इसके बाद 18वीं शताब्दी में देवी अहिल्याबाई होल्कर ने महेश्वर का पुनर्विकास कराया और इंदौर की जगह इसे ही अपनी राजधानी बना लिया, जिससे इस नगरी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान नई ऊंचाइयों तक पहुंच गई।

सवाल-जवाब

महेश्वर किस जिले में स्थित है?
महेश्वर मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित है।
महेश्वर में लेजर लाइट शो देखने के लिए टिकट लेना पड़ता है क्या?
नहीं, यह शो पर्यटक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के देख सकते हैं।
लेजर लाइट शो में क्या दिखाया जाता है?
इसमें रंग-बिरंगी लेजर किरणों और ध्वनि प्रभावों के जरिए माहिष्मति नगरी का इतिहास, हैहयवंश, होलकर राजाओं और अहिल्याबाई होल्कर के योगदान की कहानी दिखाई जाती है।
नर्मदा आरती किस तरह से होती है?
यह बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर होती है, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तीन पुजारी एक साथ आरती करते हैं और सैकड़ों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
महेश्वर को पहले किस नाम से जाना जाता था?
प्राचीन काल में महेश्वर को माहिष्मति के नाम से जाना जाता था।
महेश्वर को राजधानी किन-किन शासकों ने बनाया?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सम्राट कार्तवीर्य सहस्त्रार्जुन ने इसे अपनी राजधानी बनाया था, और बाद में 18वीं शताब्दी में देवी अहिल्याबाई होल्कर ने इंदौर की जगह महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया।
महेश्वर में रात रुकने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
रात रुकने वाले पर्यटक मुफ्त लेजर लाइट शो, भव्य नर्मदा आरती और अगली सुबह सूर्योदय का अद्भुत नजारा देख पाते हैं, जो दिन में ही लौट जाने वाले पर्यटकों को नहीं मिल पाता।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp