मानसून की दस्तक के साथ ही झारखंड के देवघर जिले की पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं और बादल इतने नीचे उतर आते हैं कि पूरा इलाका किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल जैसा दिखने लगता है. सावन के महीने में यहां घूमने पहुंचने वाले पर्यटकों की तादाद अचानक बढ़ जाती है क्योंकि बारिश के बाद हर पहाड़ी की खूबसूरती कई गुना निखर आती है. देवघर और आसपास के इलाके में कुल छह ऐसे पहाड़ हैं, जो मानसून में सैलानियों को अपनी ओर खींचते हैं.
त्रिकुट पहाड़ पर उतरते बादल
देवघर मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित त्रिकुट पहाड़ का नाम सावन और मानसून के मौसम में सबसे पहले जुबान पर आता है. बारिश थमते ही यह पूरा पहाड़ हरी चादर से ढक जाता है और जब बादल पहाड़ियों की चोटियों से टकराते हैं तो नजारा किसी पहाड़ी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता. यहां लगा रोपवे और ट्रैकिंग रूट पर्यटकों को ऊपर तक ले जाता है, जहां से दिखने वाला दृश्य हर किसी का मन मोह लेता है. देवघर आने वाला कोई भी सैलानी मानसून में त्रिकुट की सैर किए बिना वापस नहीं लौटता.
तपोवन में हरियाली और आस्था का संगम
शहर से महज 10 किलोमीटर दूर तपोवन पहाड़ धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. बरसात शुरू होते ही यहां की चट्टानों पर हरी घास और काई जम जाती है, जबकि ठंडी हवाएं पूरे माहौल को सुहाना बना देती हैं. यहां मौजूद गुफाएं, शिव मंदिर और हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं को खींचते हैं, वहीं पहाड़ की चोटी से दिखने वाला नजारा पर्यटकों को घंटों वहीं रोक लेता है. चोटी पर घूमते छोटे छोटे बंदर भी लोगों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण बनते हैं.
बूढ़ई पहाड़ की शांति और मां बूढ़ेश्वरी की मान्यता
देवघर से करीब 28 किलोमीटर दूर बूढ़ई पहाड़ बारिश के मौसम में किसी जन्नत जैसा नजर आता है. चारों ओर घने पेड़, पहाड़ी चोटियों से लिपटे बादल और सन्नाटे जैसा शांत माहौल इस जगह की सबसे बड़ी खासियत है. जो लोग शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के करीब कुछ पल बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह मानसून का बेहतरीन ठिकाना माना जाता है. पहाड़ की तराई में मां बूढ़ेश्वरी मंदिर स्थित है और मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. पहाड़ पर मौजूद भीम के पेड़ का निशान भी इस स्थान को और खास बना देता है.
सारठ के पत्थरडा पहाड़ की छिपी खूबसूरती
भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश करने वालों के लिए सारठ का पत्थरडा पहाड़ बेहतरीन जगह है. देवघर से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित यह पहाड़ बारिश के दिनों में पूरी तरह हरियाली से ढक जाता है. ऊंची चट्टानें, ठंडी हवा और चारों ओर फैला प्राकृतिक नजारा इसे एक छिपा हुआ पर्यटन स्थल बना देते हैं. यहां पहुंचने वाले लोग इसकी खूबसूरती देखकर हैरान रह जाते हैं. पहाड़ के नीचे लहलहाती धान की फसल इस पूरे नजारे को और भी आकर्षक बना देती है.
दिघरिया पहाड़ से दिखता पूरा देवघर
देवघर मुख्यालय से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर दिघरिया पहाड़ शहर के सबसे पसंदीदा घूमने वाले स्थानों में गिना जाता है. मानसून में यहां का नजारा देखते ही बनता है. पहाड़ की चोटी से पूरा देवघर शहर नजर आता है, जबकि नीचे फैली हरियाली और ठंडी हवा सुकून का एहसास कराती है. सुबह और शाम के वक्त बड़ी संख्या में लोग यहां ट्रैकिंग और फोटोग्राफी के लिए पहुंचते हैं.
बिहार के मंदार पहाड़ की पौराणिक कहानी
देवघर से करीब 75 किलोमीटर दूर बिहार के मंदार पहाड़ तक पहुंचना थोड़ा लंबा सफर जरूर है, लेकिन यहां पहुंचते ही सारी थकान गायब हो जाती है. समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा यह पहाड़ बारिश के मौसम में पूरी तरह हरियाली से सराबोर हो जाता है. पहाड़ की चोटी पर मंदिर है, नीचे पापहरणी सरोवर है और चारों तरफ फैला प्राकृतिक नजारा इसे बिहार-झारखंड के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में शुमार करता है.













