सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया में इन दिनों पुरुषों के व्यक्तित्व और सामाजिक व्यवहार को बयां करने के लिए कई तरह की शब्दावली का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इंटरनेट के विभिन्न मंचों पर किसी को अल्फा मेल की उपाधि दी जाती है तो किसी को सिग्मा मेल बताया जाता है। इसके अलावा महिलाओं के प्रति दुर्भावना रखने वालों को मिसोजिनिस्ट और इसके उलट पुरुषों के प्रति नफरत भरे रवैये को दर्शाने के लिए मिसैंड्रिस्ट जैसे भारी-भरकम शब्दों का सहारा लिया जाता है। इनसेल, रेड पिल और टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी जैसे टर्म भी लगातार ऑनलाइन चर्चाओं के केंद्र में बने रहते हैं। लेकिन क्या आम लोगों को इन सभी शब्दावलियों का सटीक और वास्तविक अर्थ पता है, यह एक बड़ा सवाल है।
अल्फा मेल और सिग्मा मेल की आभासी परिभाषा
अल्फा मेल शब्द का प्रयोग आमतौर पर ऐसे पुरुष के लिए किया जाता है जिसे अत्यधिक आत्मविश्वासी, प्रभावशाली, नेतृत्व क्षमता से लैस और अपनी बात पर अडिग रहने वाला माना जाता है। सोशल मीडिया पर इस छवि को अक्सर एक दबंग और वर्चस्ववादी पुरुष के रूप में पेश किया जाता है, हालांकि मनोविज्ञान में इस तरह की कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक श्रेणी मौजूद नहीं है। इसी तरह सिग्मा मेल भी इंटरनेट की उपज एक अनौपचारिक शब्द है जिसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए होता है जो पूरी तरह स्वतंत्र, आत्मनिर्भर होता है और जिसे समाज या दूसरों की स्वीकृति की कोई खास परवाह नहीं होती। इस श्रेणी को ऐसे शख्स की छवि से जोड़ा जाता है जो भीड़ का हिस्सा बनने से इनकार कर अपनी अलग राह बनाता है।
मिसोजिनी और मिसैंड्रि के सामाजिक मायने
मिसोजिनिस्ट उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसके विचारों, आचरण या व्यवहार में महिलाओं के प्रति गहरी नफरत, तिरस्कार या पूर्वाग्रह साफ झलकता है। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कमतर आंकना या उनके खिलाफ अपमानजनक रवैया अपनाना इसी महिला-विरोधी मानसिकता का जीता-जागता उदाहरण है। इसके बिल्कुल विपरीत मिसैंड्रिस्ट वह व्यक्ति कहलाता है जिसके मन में पुरुषों के प्रति नफरत, तिरस्कार या गहरा नकारात्मक दृष्टिकोण भरा होता है। वहीं सेक्सिस्ट उस रूढ़िवादी सोच या व्यवहार को कहा जाता है जहां किसी भी इंसान के साथ केवल उसके लिंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है। उदाहरण के तौर पर यह पूर्वाग्रह रखना कि अमुक काम केवल पुरुष ही कर सकते हैं और फलां काम सिर्फ महिलाओं के लिए है, लैंगिक भेदभाव का स्पष्ट रूप है।
इनसेल और नाइस गाय जैसे आधुनिक इंटरनेट टर्म
इनसेल शब्द अंग्रेजी के इनवॉलंटरी सेलिबेट यानी अनिच्छुक ब्रह्मचारी वाक्यांश से उपजा है। इंटरनेट पर इसका प्रयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो रोमांटिक रिश्ता या प्रेम संबंध चाहते हैं लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें कोई साथी नहीं मिल पाता है। हालांकि सिर्फ अकेले जीवन बिताने वाले हर सिंगल व्यक्ति को इनसेल कहना सरासर गलत है और यह शब्द मुख्य रूप से कुछ विशिष्ट ऑनलाइन समूहों के संदर्भ में ज्यादा चर्चा में रहा है। सामान्य बोलचाल में नाइस गाय का मतलब एक अच्छे और शालीन पुरुष से होता है, लेकिन इंटरनेट की डिजिटल भाषा में यह कभी-कभी ऐसे व्यक्ति के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है जो अच्छा बर्ताव करने के बदले सामने वाले से प्रेम, ध्यान या रिश्ते की मांग को अपना कानूनी हक समझने लगता है।
रेड पिल, टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी और हेजेमोनिक मैस्कुलिनिटी
रेड पिल असल में किसी व्यक्ति की कोई व्यक्तित्व श्रेणी नहीं है, बल्कि यह इंटरनेट पर सक्रिय एक विशिष्ट विचारधारा और ऑनलाइन समुदायों से जुड़ी अवधारणा है। इसमें पुरुषों, महिलाओं, आपसी संबंधों और समाज में तय लैंगिक भूमिकाओं को लेकर तमाम तरह के मत देखने को मिलते हैं जहाँ इसके समर्थक अक्सर पारंपरिक मान्यताओं पर सवाल खड़े करने या उन्हें चुनौती देने की बात करते हैं। दूसरी ओर टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी का मतलब मर्दानगी या पुरुषत्व नहीं है, बल्कि यह उन दमघोंटू सामाजिक अपेक्षाओं को दर्शाता है जहाँ पुरुषों से हर परिस्थिति में सख्त, आक्रामक और अपनी भावनाओं को छिपाकर रखने की उम्मीद की जाती है, जैसे यह सोचना कि मर्द कभी रोते नहीं हैं। इसके अलावा हेजेमोनिक मैस्कुलिनिटी एक सामाजिक और अकादमिक अवधारणा है जिसमें उस पुरुषत्व की वकालत की जाती है जिसे कोई समाज आदर्श मानता है और जिसमें ताकत, नियंत्रण, प्रभुत्व व कठोरता को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है।



















