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तारा सुतारिया को है डिस्कैल्कुलिया, जानिए नंबरों से जुड़ी इस अनोखी लर्निंग डिसेबिलिटी के बारे मेंट्रेंड्स
30 अग॰ 2026, 5:26 pm (1 घंटे पहले)· 1

तारा सुतारिया को है डिस्कैल्कुलिया, जानिए नंबरों से जुड़ी इस अनोखी लर्निंग डिसेबिलिटी के बारे में

बॉलीवुड अभिनेत्री तारा सुतारिया ने हाल ही में खुलासा किया है कि वह डिस्कैल्कुलिया से जूझ रही हैं, जो संख्याओं और गणित से जुड़ी एक विशिष्ट लर्निंग डिसेबिलिटी है। इस स्थिति से जूझ रहे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में नंबरों को समझने और हिसाब-किताब करने में काफी कठिनाई होती है।

बॉलीवुड अभिनेत्री तारा सुतारिया ने हाल ही में अपने जीवन से जुड़े एक ऐसे पहलू पर खुलकर बातचीत की है जिसके बारे में आम तौर पर बहुत कम लोग जानते हैं। एक हालिया इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साझा किया कि उन्हें डिस्कैल्कुलिया नामक स्थिति का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के कारण उन्हें गणित से जुड़े कामों और अंकों को समझने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जब बात वित्तीय मामलों और निवेश जैसे जरूरी विषयों पर आती है, तो तारा चीजों को गहराई से समझने की पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन इसके बावजूद कैलकुलेशन के दौरान उनसे अक्सर गलतियां हो जाती हैं। उनकी इस परेशानी को संभालने में उनके पिता और उनकी अकाउंट्स टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी पूरी सहायता करते हैं।

क्या है डिस्कैल्कुलिया की असल परिभाषा

विशेषज्ञों द्वारा डिस्कैल्कुलिया को गणित से जुड़ी एक विशेष लर्निंग डिसेबिलिटी के रूप में देखा जाता है। इस स्थिति से प्रभावित व्यक्ति को संख्याओं को सही ढंग से समझने, जोड़-घटाव जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं करने, गणितीय नियमों को याद रखने या अंकों से जुड़ी समस्याओं को हल करने में सामान्य इंसानों की तुलना में काफी ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है। यह बात खास तौर पर ध्यान देने योग्य है कि डिस्कैल्कुलिया से पीड़ित व्यक्ति को हर विषय की पढ़ाई में परेशानी हो ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। ऐसा मुमकिन है कि कोई इंसान पढ़ाई के अन्य क्षेत्रों, कला, भाषा या अपने कार्यक्षेत्र के दूसरे हिस्सों में बहुत अधिक प्रतिभाशाली और कुशल हो, लेकिन जब बात नंबरों और कैलकुलेशन की आती है तो वे उसके लिए बेहद जटिल और कठिन साबित होते हैं।

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क्या साधारण रूप से मैथ्स में कमजोर होना ही डिस्कैल्कुलिया है

इस बात को लेकर स्पष्ट रहना बहुत जरूरी है कि केवल गणित कठिन लगना या कैलकुलेशन में कभी-कभार गलती हो जाना ही डिस्कैल्कुलिया नहीं कहलाता है। इस विशेष स्थिति में आने वाली परेशानियां अमूमन लंबे समय तक लगातार बनी रहती हैं और इंसान के रोजमर्रा के कामकाज पर भी साफ तौर पर असर डालती हैं। उदाहरण के तौर पर, पैसे गिनने की बात हो, छुट्टे पैसों का हिसाब लगाने की स्थिति हो, घड़ी में समय ठीक से समझने में दिक्कत हो, नंबरों का सही क्रम याद रखना हो या फिर किसी सामान्य गणना को तुरंत समझ पाना हो, यह सब चीजें इस समस्या से जूझ रहे कुछ लोगों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं।

डिस्कैल्कुलिया के मुख्य और सामान्य लक्षण

इस लर्निंग डिसेबिलिटी के लक्षण हर इंसान में अलग-अलग तरीकों से सामने आ सकते हैं। कुछ मामलों में लोगों को बहुत ही साधारण जोड़ और घटाव करने में भी बार-बार गलतियां करते हुए देखा जाता है, जबकि अन्य लोगों को गुणा, भाग, भिन्न या फिर प्रतिशत जैसे गणितीय पहलुओं को समझने में भारी कठिनाई महसूस होती है। इसके अतिरिक्त, संख्याओं के क्रम को ठीक से याद रखना, किसी आंकड़े की आपस में तुलना करना या फिर गणित से जुड़े सवालों के मूल अर्थ को समझना भी कठिन हो जाता है। वयस्क होने के बाद भी इसका नकारात्मक प्रभाव बजट तैयार करने, किसी बिल का सही हिसाब रखने या अन्य संख्यात्मक जानकारियों को प्रोसेस करने जैसे रोजमर्रा के कार्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

क्या डिस्कैल्कुलिया और मैथ्स एंग्जायटी एक जैसी चीजें हैं

इस भ्रम को दूर करना आवश्यक है कि डिस्कैल्कुलिया और मैथ्स एंग्जायटी दोनों एक ही स्थितियां हैं, क्योंकि वास्तव में दोनों पूरी तरह से अलग हैं। मैथ्स एंग्जायटी की स्थिति में गणित विषय का नाम सुनते ही मन में एक अजीब सा डर, तनाव या घबराहट पैदा होने लगती है और परीक्षा या सवाल हल करते समय व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह से ब्लैंक हो सकता है। इसके विपरीत, डिस्कैल्कुलिया में मुख्य समस्या नंबरों और गणितीय जानकारियों को मस्तिष्क द्वारा ठीक से समझने तथा प्रोसेस करने से जुड़ी होती है। हालांकि यह जरूर है कि लगातार गणित में संघर्ष करते रहने की वजह से किसी भी व्यक्ति के भीतर मैथ्स को लेकर गहरा डर या तनाव विकसित हो सकता है।

क्या डिस्कैल्कुलिया का इलाज संभव है

डिस्कैल्कुलिया को कोई ऐसी पारंपरिक बीमारी या रोग नहीं माना जाता जिसे किसी आम दवा के जरिए पूरी तरह से ठीक किया जा सके। इस स्थिति से निपटने के लिए व्यक्ति की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से सीखने की खास रणनीतियां तैयार करने, विषय विशेषज्ञों की उचित मदद लेने और जीवन में अतिरिक्त सपोर्ट की व्यवस्था करने से बहुत फायदा मिल सकता है। व्यावहारिक तरीकों से गणना करना, कैलकुलेटर या अन्य सहायक तकनीकों का खुलकर इस्तेमाल करना और किसी भी गणितीय प्रक्रिया को छोटे-छोटे और सरल हिस्सों में बांटकर समझना कई लोगों के लिए बेहद मददगार साबित होता है।

सवाल-जवाब

तारा सुतारिया ने किस परेशानी का खुलासा किया है?
तारा सुतारिया ने बताया है कि वह डिस्कैल्कुलिया से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से उन्हें नंबरों और गणित से जुड़ी गणनाओं में परेशानी होती है।
डिस्कैल्कुलिया क्या होता है?
डिस्कैल्कुलिया गणित से जुड़ी एक विशेष लर्निंग डिसेबिलिटी है, जिसमें व्यक्ति को संख्याओं और कैलकुलेशन को समझने में कठिनाई होती है।
क्या डिस्कैल्कुलिया वाले व्यक्ति को हर पढ़ाई में दिक्कत होती है?
नहीं, यह जरूरी नहीं है कि इस स्थिति से जूझने वाले व्यक्ति को हर विषय में परेशानी हो; वह कला या भाषा जैसे अन्य क्षेत्रों में काफी अच्छे हो सकते हैं।
क्या मैथ्स में कमजोर होना ही डिस्कैल्कुलिया है?
नहीं, केवल कभी-कभार कैलकुलेशन में गलती होना डिस्कैल्कुलिया नहीं है, बल्कि इसमें नंबरों को समझने की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है।
क्या डिस्कैल्कुलिया और मैथ्स एंग्जायटी एक जैसी हैं?
नहीं, दोनों अलग हैं जहाँ मैथ्स एंग्जायटी में घबराहट और डर होता है, वहीं डिस्कैल्कुलिया में नंबरों को प्रोसेस करने की मुख्य समस्या होती है।
तारा सुतारिया वित्तीय मामलों में कैसे संभालती हैं?
वित्तीय मामलों और निवेश के दौरान तारा सुतारिया की मदद उनके पिता और उनकी अकाउंट्स टीम करती है।
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