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अल्फा रिव्यू (2026): शरवरी वाघ जीत गईं, लेकिन स्पाई यूनिवर्स की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई ये फिल्ममूवी रिव्यू
3 घंटे पहले· 3

अल्फा रिव्यू (2026): शरवरी वाघ जीत गईं, लेकिन स्पाई यूनिवर्स की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई ये फिल्म

यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की नई फिल्म 'अल्फा' कारगिल युद्ध, एक रहस्यमयी सीरम और पाकिस्तानी एजेंट की कहानी में उलझकर रह गई है। आलिया भट्ट का एक्शन अवतार निराश करता है, जबकि शरवरी वाघ अपनी मौजूदगी से बाजी मार ले जाती हैं, फिल्म को 5 में से 1.5 स्टार मिले हैं।

आयशा खानआयशा खानमनोरंजन रिपोर्टर 5 मिनट पढ़ें AI के लिए
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अल्फा

1.5/5
3 जुलाई 2026 | हिंदी
140 मिनट | एक्शन थ्रिलर

कलाकार: आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर, बॉबी देओल और अन्य

निर्देशक: शिव रवैल

संगीत: रोहांश, अबीर पंडित, संचित और अंकित बलहारा

ट्रेलर

यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की सबसे ज्यादा इंतजार की जा रही फिल्मों में से एक 'अल्फा' रिव्यू करने बैठें तो सबसे पहला एहसास यही होता है कि दर्शकों की उम्मीदें और स्क्रीन पर दिखी कहानी के बीच एक बड़ा फासला है। भारी-भरकम मेलोड्रामा और उलझे हुए ट्रैक की वजह से फिल्म बुरी तरह लड़खड़ाती है, लेकिन इस अफरा-तफरी के बीच एक्ट्रेस शरवरी वाघ अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से ध्यान खींचने में कामयाब रहती हैं। कारगिल युद्ध, एक रहस्यमयी 'अल्फा सीरम' और एक शातिर पाकिस्तानी एजेंट के इर्द-गिर्द बुनी गई इस ढीली स्क्रिप्ट में आलिया भट्ट का एक्शन अवतार अटपटा लगता है, जबकि शरवरी अपने हिस्से के सीन में फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश करती नजर आती हैं।

क्या है 'अल्फा' की कहानी

फिल्म की शुरुआत साल 1999 के कारगिल युद्ध से होती है। मुश्किल हालात में हुई भारी तबाही के बाद सिर्फ दो बहादुर अफसर, बॉबी देओल और अनिल कपूर, जिंदा बच पाते हैं। इस खूनी जंग के बाद बॉबी देओल के दिमाग में देश की सुरक्षा के लिए सुपर-सैनिक तैयार करने का एक बड़ा प्लान आता है, जिसे 'अल्फा सोल्जर' प्रोजेक्ट नाम दिया जाता है। इसके लिए एक खास 'अल्फा सीरम' बनाया जाना है, जो सैनिकों को असीमित ताकत दे सके। इस बड़े प्रोजेक्ट में अनिल कपूर भी बॉबी देओल के साथ जुड़े रहते हैं। कहानी में तब मोड़ आता है जब अनिल कपूर चुपके से अपनी बीमार पत्नी को यह सीरम दे देते हैं। नतीजा उल्टा निकलता है और उनकी पत्नी की मौत हो जाती है। इस धोखे के खुलने के बाद हालात इतने बिगड़ते हैं कि बॉबी देओल अनिल कपूर की एक बेटी को अपने साथ ले जाते हैं। सालों बाद फिल्म की मुख्य कहानी बदले, देशभक्ति और पारिवारिक टकराव के इर्द-गिर्द घूमने लगती है। इस पूरे ट्रैक में आलिया भट्ट का निशाना अनिल कपूर बनते हैं। कहानी में एक और बड़ा मोड़ तब आता है जब पता चलता है कि पाकिस्तान ने भारतीय सेना में 'फतेह' नाम का एक शातिर एजेंट भेजा था, जो सिस्टम में घुसकर खुद 'अल्फा' बन बैठता है। अनिल कपूर की दूसरी बेटी, यानी शरवरी वाघ का किरदार भी इस पूरी उलझन का हिस्सा बन जाता है। कुल मिलाकर देशभक्ति के नाम पर परोसा गया यह एक अटपटा फैमिली ड्रामा बनकर रह जाता है।

एक्टिंग के मोर्चे पर सबसे ज्यादा निराशा

'अल्फा' दर्शकों को सबसे ज्यादा निराश एक्टिंग के मामले में करती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आलिया भट्ट इंडियन सिनेमा की एक बेहतरीन और लोकप्रिय एक्ट्रेस हैं, लेकिन इस एक्शन-हैवी रोल में वह पूरी तरह मिसफिट नजर आती हैं। 'राजी' जैसी गंभीर फिल्मों में उनकी परफॉर्मेंस बेमिसाल रही है, मगर यहां भारी एक्शन के साथ उनका तालमेल ठीक से नहीं बैठ पाता। कई सीन में वह ओवरएक्टिंग और अजीब एक्सप्रेशन देती दिखती हैं, जो उनके कद की एक्ट्रेस के लिए ठीक नहीं कहा जा सकता। वहीं फिल्म की रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर यह चर्चा चल रही थी कि शरवरी वाघ इस फिल्म में आलिया पर भारी पड़ सकती हैं, और असल में हुआ भी कुछ वैसा ही। शरवरी को भले ही कम एक्शन सीन मिले हों, लेकिन जितना भी स्क्रीन टाइम मिला, उसमें वह पूरी तरह फिट बैठीं। विलेन के किरदार में बॉबी देओल की स्क्रीन प्रेजेंस दमदार और असरदार है, लेकिन मेकर्स ने उन्हें जो हरियाणवी लहजा दिया है, वह उनके पूरे किरदार को कमजोर कर देता है। यह एक्सेंट थिएटर में बैठे दर्शकों को खासा परेशान करता है। दूसरी तरफ अनिल कपूर अपने छोटे से रोल में ठीक-ठाक असर छोड़ते हैं।

डायरेक्शन में स्पाई यूनिवर्स की चमक गायब

स्पाई यूनिवर्स के नाम पर डायरेक्टर शिव रवैल सिर्फ शानदार लोकेशन और बड़ा बजट ही दिखा पाए हैं। फिल्म का डायरेक्शन बेहद तेज-तर्रार लेकिन उतना ही उलझाने वाला है। ऐसा लगता है कि मेकर्स हाल में आई ब्लॉकबस्टर 'धुरंधर' की जबरदस्त कामयाबी और उसके पाकिस्तान-केंद्रित कॉन्सेप्ट से बेहद प्रभावित थे, जिसमें हमजा नाम का किरदार पाकिस्तान जाकर दुश्मन की साजिश नाकाम करता है। लेकिन डायरेक्टर न तो 'धुरंधर' जैसा असरदार थ्रिल रच पाए और न ही स्पाई यूनिवर्स की साख बचा पाए। स्क्रीन पर सिर्फ स्टाइलिश पोज देते कलाकार नजर आते हैं, जिनके पीछे कोई ठोस विजन खड़ा नजर नहीं आता।

टेक्निकल पक्ष: भव्यता है, पर गहराई नहीं

तकनीकी रूप से 'अल्फा' सिर्फ अपनी भव्यता की वजह से अलग दिखती है। कैमरावर्क शानदार और साफ-सुथरा है। एग्जॉटिक लोकेशन, पहाड़ों पर हो रही तेज बर्फबारी और कारगिल युद्ध के शुरुआती सीन बड़े स्केल पर फिल्माए गए हैं। लेकिन जब कहानी में ही दम न हो, तो सिर्फ खूबसूरत विजुअल्स दर्शकों को बोरियत से नहीं बचा पाते।

म्यूजिक औसत, ऋतिक रोशन का कैमियो सबसे यादगार

फिल्म का म्यूजिक औसत दर्जे का है। पंजाबी गानों और एक्शन सीन के बैकग्राउंड में गूंजती तेज लड़ाई की आवाजों का यह कॉकटेल कुछ जगहों पर काम कर जाता है, लेकिन ज्यादातर वक्त सिरदर्द जैसा महसूस होता है। फिल्म का सबसे दमदार और काम का पल ऋतिक रोशन का कैमियो है। जब वह अपनी फिल्म 'वॉर' के कल्ट किरदार कबीर के रूप में स्क्रीन पर आते हैं, तो थिएटर तालियों से गूंज उठता है। बावजूद इसके, ऋतिक का यह कैमियो भी कमजोर ही साबित होता है। अगर कोई 'टाइगर 3' में शाहरुख खान के पठान वाले कैमियो जैसी झलक की उम्मीद लगाकर बैठा है, तो उसे निराशा ही हाथ लगेगी।

कहानी की लॉजिकल कमियां खटकती हैं

फिल्म की कहानी में इतनी सारी लॉजिकल खामियां हैं कि दर्शक खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। जिस आसानी से एक पाकिस्तानी एजेंट भारतीय सेना में घुसकर खुद 'अल्फा' बन बैठता है, वह बात गले नहीं उतरती। किसी भी स्पाई थ्रिलर में एक्शन का रियलिस्टिक होना जरूरी होता है, लेकिन यहां लीड एक्ट्रेस ज्यादातर वक्त सिर्फ पोज देती और मेलोड्रामा में उलझी नजर आती हैं। दर्शक किसी भी किरदार से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ पाते, जिससे देशभक्ति वाला एंगल भी फीका और उबाऊ लगने लगता है।

फैसला: 5 में से सिर्फ 1.5 स्टार

अगर इस फिल्म को सही तरीके से परखा जाए, तो यशराज फिल्म्स की 'अल्फा' अब तक की स्पाई यूनिवर्स फिल्मों में सबसे कमजोर और सबसे ढीली फिल्म साबित होती है। लग्जरी लोकेशन और ऋतिक रोशन के दमदार कैमियो के अलावा फिल्म में देखने लायक कुछ खास नहीं बचता। आदित्य चोपड़ा का आलिया भट्ट को एक कड़क स्पाई एक्शन फिल्म में उतारने का एक्सपेरिमेंट बॉक्स ऑफिस पर उल्टा साबित होता दिख रहा है। इस फिल्म को 5 में से 1.5 स्टार दिए जा सकते हैं।

इसका आप पर असर

यह खबर एक फिल्म रिव्यू है, इसलिए इसका सीधा असर सिर्फ मनोरंजन और दर्शकों की जेब से जुड़े फैसले तक सीमित है।

  • दर्शकों के लिए: जो लोग वीकेंड पर 'अल्फा' देखने की योजना बना रहे थे, वे 1.5 स्टार रेटिंग और कमजोर स्क्रिप्ट को देखते हुए टिकट पर खर्च से पहले एक बार सोच सकते हैं।
  • फैंस के लिए: शरवरी वाघ और ऋतिक रोशन के कैमियो के फैंस के लिए यह जरूर देखने लायक पल हो सकता है, भले ही बाकी फिल्म कमजोर हो।

सवाल-जवाब

क्या 'अल्फा' देखने लायक है?
रिव्यू के मुताबिक फिल्म को 5 में से सिर्फ 1.5 स्टार मिले हैं, कहानी और एक्टिंग दोनों निराश करते हैं, हालांकि शरवरी वाघ का काम और ऋतिक रोशन का कैमियो देखने लायक बताया गया है।
'अल्फा' किन फिल्मों जैसी लगती है?
रिव्यू में फिल्म की तुलना 'धुरंधर' के पाकिस्तान-केंद्रित कॉन्सेप्ट और ऋतिक रोशन की फिल्म 'वॉर' के कैरेक्टर कबीर से, साथ ही 'टाइगर 3' में शाहरुख खान के पठान वाले कैमियो से की गई है।
'अल्फा' की कहानी किस पर आधारित है?
कहानी 1999 के कारगिल युद्ध से शुरू होकर एक 'अल्फा सीरम' और सुपर-सैनिक बनाने के प्रोजेक्ट, बदले और पारिवारिक टकराव के इर्द-गिर्द घूमती है।
फिल्म में मुख्य कलाकार कौन हैं?
फिल्म में आलिया भट्ट, बॉबी देओल, अनिल कपूर और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि ऋतिक रोशन का कैमियो है।
फिल्म में सबसे कमजोर पक्ष क्या है?
रिव्यू के मुताबिक फिल्म की स्क्रिप्ट में लॉजिकल खामियां, कन्फ्यूज करने वाला डायरेक्शन और आलिया भट्ट का एक्शन रोल में मिसफिट होना सबसे बड़ी कमजोरियां हैं।
फिल्म को किसने डायरेक्ट किया है?
'अल्फा' को शिव रवैल ने डायरेक्ट किया है।
आयशा खान
लेखक के बारे मेंआयशा खानमनोरंजन रिपोर्टर मुंबई
विशेषज्ञतामनोरंजन समाचार, फ़िल्में, टीवी शो, स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म, सेलिब्रिटी न्यूज़, पॉप कल्चर, फ़िल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफ़िस विश्लेषण, उद्योग रुझान

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