नए रिश्ते की शुरुआत बेहद उत्साहजनक होती है। लगातार चैटिंग, एक-दूसरे को समझने की कोशिश और साथ बिताए गए पल दिल में एक नई उम्मीद जगाते हैं। हालांकि, इसी शुरुआती दौर में कई बार कुछ ऐसे संकेत भी सामने आते हैं जिन्हें हम प्यार या आकर्षण के वशीभूत होकर नजरअंदाज कर देते हैं। बाद में यही छोटी-सी अनदेखी रिश्ते में गंभीर तनाव और परेशानियों की वजह बन जाती है। डेटिंग का मुख्य उद्देश्य केवल एक-दूसरे के करीब आना ही नहीं होता, बल्कि यह परखना भी होता है कि दोनों की सोच, प्राथमिकताएं और रिश्ते को लेकर उम्मीदें आपस में कितनी मेल खाती हैं।
रिलेशनशिप कोच जवाल भट्ट ने ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण रेड फ्लैग्स की तरफ ध्यान दिलाया है, जिन पर शुरुआती चरण में ही गौर करना बेहद जरूरी है। यदि किसी नए रिश्ते में सामने वाले के आचरण में कुछ विशिष्ट पैटर्न लगातार नजर आ रहे हैं, तो उन्हें बिना किसी हीला-हिलाहवाली के समझ लेना चाहिए। आइए जानते हैं उन प्रमुख संकेतों के बारे में जो एक स्वस्थ और मजबूत रिश्ते की राह में बड़ी बाधा बन सकते हैं।
अन्य लोगों के प्रति disrespectful व्यवहार
यदि कोई व्यक्ति आपके साथ तो बेहद आत्मीय और अच्छा बर्ताव करता है, लेकिन अपने आसपास के अन्य लोगों या सेवाकर्मियों से बात करते समय सम्मान नहीं दिखाता है, तो इस आचरण को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। किसी भी इंसान का असली व्यक्तित्व केवल उसके सामने वाले के साथ के बर्ताव से पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता। वह व्यक्ति रेस्टोरेंट में वेटर, गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर, कार्यालय के सहकर्मियों या अन्य आम लोगों के साथ किस लहजे में पेश आता है, यह भी उसके स्वभाव का एक बहुत अहम हिस्सा होता है। बार-बार अपमानजनक या तुच्छ तरीके से बात करना इस बात का संकेत है कि भविष्य में यह रवैया आपके लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।
केवल शारीरिक जुड़ाव की चाहत होना
किसी रिश्ते में यदि सामने वाले की प्राथमिकता आपकी भावनाओं, विचारों, प्राथमिकताओं और जीवन को गहराई से जानने के बजाय केवल शारीरिक नजदीकियों तक ही सीमित दिखाई दे, तो इस विषय पर खुलकर और स्पष्ट बातचीत करना बहुत आवश्यक हो जाता है। हर इंसान की अपनी सीमाएं और व्यक्तिगत इच्छाएं अलग-अलग हो सकती हैं। एक स्वस्थ और मजबूत रिश्ते की बुनियाद आपसी सहमति और मानसिक सहजता पर टिकी होती है। यदि आपकी भावनात्मक जरूरतों को लगातार उपेक्षित किया जा रहा है, तो आपको इस रिश्ते के भविष्य और दिशा पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
रोमांटिक आकर्षण की कमी महसूस होना
कई बार ऐसा भी होता है कि कोई इंसान स्वभाव से बहुत अच्छा और मददगार होता है, लेकिन इसके बावजूद आपको उसके प्रति किसी भी तरह का रोमांटिक आकर्षण महसूस नहीं होता। सिर्फ इस दबाव में आकर रिश्ते को आगे बढ़ाते जाना कि सामने वाला आपको पसंद करता है या आपके साथ अच्छा व्यवहार करता है, बिल्कुल भी सही नहीं है। अपनी आंतरिक भावनाओं को सही ढंग से समझना भी डेटिंग प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। खुद पर मानसिक या भावनात्मक दबाव डालकर किसी रिश्ते में बने रहने से भविष्य में दोनों पक्षों को भारी मानसिक उलझन और परेशानी उठानी पड़ सकती है।
आमने-सामने मिलने से बार-बार कतराना
यदि किसी के साथ आपकी बातचीत का सिलसिला लंबे समय से ऑनलाइन या फोन पर चल रहा है, लेकिन सामने वाला शख्स हर बार किसी न किसी बहाने से आमने-सामने मिलने की बात को टाल देता है, तो इस व्यवहार के पीछे छिपे कारणों को समझने की सख्त जरूरत है। इसके पीछे कई तरह की वजहें हो सकती हैं और बिना पुख्ता जानकारी के सीधे किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना बुद्धिमानी नहीं होगी। फिर भी, लगातार बहानों का सिलसिला चलना और मुलाकात के लिए कोई भी स्पष्ट या गंभीर प्रयास न करना एक ऐसा संदेहास्पद संकेत है जिस पर सवाल उठाना लाजमी है।
रिश्ते को लेकर दोनों के उद्देश्यों में अंतर
डेटिंग के शुरुआती चरण में यह बात स्पष्ट होना बेहद जरूरी है कि दोनों लोग इस रिश्ते से किस प्रकार की उम्मीदें संजोए बैठे हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि एक व्यक्ति भविष्य में शादी के गंभीर इरादे के साथ इस रिश्ते को आगे बढ़ा रहा है, जबकि दूसरा इंसान फिलहाल किसी भी तरह के गंभीर बंधन के बारे में सोचने को तैयार ही नहीं है, तो मतभेद होना तय है। ऐसी परिस्थितियों में शुरुआत में ही साफ-सुथरी और खरी बातचीत कर लेने से बाद में होने वाली अनगिनत गलतफहमियों से बचा जा सकता है।
बातचीत में केवल आपकी ओर से दिलचस्पी
यदि संवाद स्थापित करने, नए सवाल पूछने और सामने वाले के जीवन को जानने का प्रयास हमेशा केवल आपकी ही तरफ से हो रहा है, और दूसरा व्यक्ति सिर्फ औपचारिकता के लिए छोटे-छोटे जवाब दे रहा है, तो इस पैटर्न पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। किसी भी रिश्ते में आपसी दिलचस्पी दोनों तरफ से बराबर दिखनी चाहिए। हालांकि कभी-कभार अत्यधिक व्यस्तता या कठिन परिस्थितियों के कारण ऐसा हो सकता है, लेकिन यदि यह एक स्थाई आदत बन जाए तो इस विषय पर सीधे तौर पर बातचीत करना ही सबसे बेहतर विकल्प होता है।
अचानक गायब होना और संपर्क की कमी
रिश्ते के भीतर बातचीत का लहजा और तरीका समय के साथ बदल सकता है, लेकिन अगर सामने वाला व्यक्ति अचानक बिना किसी स्पष्टीकरण के बार-बार गायब हो जाता है, बातचीत को जिंदा रखने की कोई कोशिश नहीं करता, या फिर हर बार पहल और संपर्क करने की जिम्मेदारी केवल आपके कंधों पर ही आ जाती है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इस जटिल स्थिति से निपटने के लिए सबसे पहले खुलकर बातचीत करें। सामने वाले की तरफ से मिलने वाला जवाब और उसका उसके बाद का आचरण आपको रिश्ते की वास्तविक स्थिति का सटीक अंदाजा लगाने में मदद करेगा।
सीमाएं तय करना और ईमानदारी से बात करना
इनमें से किसी भी एक संकेत का छिटपुट दिखना इस बात का अकाट्य प्रमाण नहीं है कि पूरा रिश्ता ही खराब या जहरीला है। हर इंसान, हर स्वभाव और हर परिस्थिति एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न होती है। असली बात यह है कि क्या कोई विशेष नकारात्मक व्यवहार बार-बार एक पैटर्न के रूप में सामने आ रहा है या नहीं। यदि आप किसी भी बात के कारण मानसिक असहजता महसूस कर रहे हैं, तो अपनी निजी सीमाएं स्पष्ट करें और सामने वाले से पूरी ईमानदारी के साथ संवाद स्थापित करें। किसी भी सफल रिश्ते की नींव आपसी सम्मान, स्पष्ट सहमति, पारदर्शिता और दोनों पक्षों की तरफ से लगाए जाने वाले ईमानदार प्रयासों पर टिकी होती है।



















