गर्मियों की छुट्टियां हों या अचानक दो-तीन दिन के लिए कहीं बाहर जाने का मौका आए, पौधों की देखभाल को लेकर सबसे बड़ी चिंता यही बनी रहती है कि उनकी प्यास कौन बुझाएगा। विशेषकर बालकनी की शोभा बढ़ाने वाले छोटे पौधे बहुत जल्द अपनी नमी खो देते हैं। यदि रोज सुबह उठकर पानी देने की नियमबद्ध आदत भी हो, तब भी ऑफिस की व्यस्त भागदौड़, कभी लंबा सफर या कभी केवल याद न रहने के कारण पौधे सूखे रह जाते हैं। ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए सेल्फ वाटरिंग पॉट एक बेहद किफायती और आसान जरिया साबित हो सकता है। इसके लिए बाजार से कोई महंगा ऑटोमैटिक प्लांटर खरीदकर लाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती है।
घर के कबाड़ में पड़ी हुई कोई भी खाली प्लास्टिक की बोतल, एक साधारण गमला और एक सूती कपड़े की पट्टी की सहायता से एक ऐसा शानदार सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जो मिट्टी की तासीर के हिसाब से उसे लगातार नमी प्रदान करता रहे। इस देसी जुगाड़ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए किसी प्रकार की महंगी मशीन अथवा किसी तकनीकी विशेषज्ञता की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।
सेल्फ वाटरिंग पॉट कैसे काम करता है?
इस घरेलू गमले की कार्यप्रणाली बेहद सरल होती है। इसमें पौधे की जड़ों तक पानी पहुँचाने के लिए सूती कपड़े या किसी मोटी कॉटन की रस्सी का उपयोग किया जाता है। इस पट्टी का एक सिरा पानी से भरे हुए कंटेनर के अंदर डूबा रहता है, जबकि दूसरा सिरा गमले की मिट्टी के भीतर दबाया जाता है। सूती कपड़ा लगातार पानी को सोखकर धीरे-धीरे मिट्टी तक पहुँचाने का काम करता रहता है। आप इसे अपने पौधे के लिए एक छोटे वॉटर रिजर्व की तरह मान सकते हैं। जब कभी गमले की मिट्टी सूखने लगती है, तो उसी कपड़े के जरिए थोड़ी-थोड़ी नमी ऊपर की तरफ खिंचती चली जाती है। इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण पौधे को एक ही बार में अत्यधिक पानी मिलने के बजाय लगातार नियंत्रित रूप से नमी मिलती रहती है।
इसे तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री
इस जुगाड़ को बनाने के लिए बहुत ज्यादा तामझाम या सामान की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ती है। सबसे पहले एक ऐसा गमला ले लें जिसके निचले हिस्से में पानी निकासी के लिए पर्याप्त छेद हो। इसके अतिरिक्त एक खाली प्लास्टिक की बोतल या छोटा पानी का बर्तन ले लें और लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी सूती कपड़े की पट्टी तैयार रखें। कपड़ा जरूरत से ज्यादा पतला नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी बनावट ऐसी होनी चाहिए जो आसानी से पानी को सोख सके। इस काम के लिए घर में रखा पुराना सूती कपड़ा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बस यह बात विशेष तौर पर ध्यान रखें कि वह कपड़ा पूरी तरह साफ हो और उस पर किसी भी प्रकार के केमिकल या डिटर्जेंट का अवशेष न बचा हो।
सेल्फ वाटरिंग पॉट बनाने की पूरी प्रक्रिया
इसकी शुरुआत करने के लिए सबसे पहले कपड़े की पट्टी का एक सिरा पानी से भरी हुई बोतल के अंदर डाल दें। अब इसके दूसरे सिरे को गमले की मिट्टी के अंदर लगभग 5 से 7 सेंटीमीटर की गहराई तक दबा दें। ध्यान रहे कि इस पट्टी को पौधे के मुख्य तने से सटाकर बिल्कुल न रखें, बल्कि तने से कुछ दूरी पर ही रखें। इसके बाद बोतल को गमले के बिल्कुल पास ऐसी जगह पर सुरक्षित रख दें जहाँ से वह आसानी से लुढ़क न सके। जब आप बोतल में पानी भर दें, तो सिस्टम को थोड़ा समय दें ताकि कपड़ा अच्छी तरह पानी को सोख सके। इसके बाद धीरे-धीरे मिट्टी में नमी का संचार होने लगेगा। यदि आपके पास कोई बड़ी प्लास्टिक की बोतल है, तो उसका उपयोग भी पानी के बड़े रिजर्व के तौर पर किया जा सकता है। हमेशा पौधे और गमले के आकार के हिसाब से ही बोतल का चयन करें, क्योंकि छोटे पौधे के लिए बहुत विशालकाय कंटेनर की आवश्यकता नहीं होती है।
कितने दिन तक पौधे को पानी मिलता रहेगा?
इस व्यवस्था के जरिए पानी कितने दिन चलेगा, इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा बता पाना कठिन है, क्योंकि पानी की खपत पूरी तरह से पौधे की प्रजाति, गमले के आकार, मिट्टी के प्रकार, तापमान और उस दिन के मौसम पर निर्भर करती है। यदि मौसम बहुत गर्म और शुष्क है, तो पानी जल्दी समाप्त हो सकता है, वहीं ठंडे या नमी से भरे मौसम में यही सिस्टम काफी लंबे समय तक काम करता रहता है। इसलिए हमेशा यही सलाह दी जाती है कि घर से बाहर जाने से कम से कम एक-दो दिन पहले इस सेटअप को आजमाकर जरूर देख लें। इससे आपको यह साफ अंदाजा मिल जाएगा कि आपके पौधे की मिट्टी कितनी तेजी से सूखती है और पानी का वह कंटेनर कितने समय तक पर्याप्त साबित होता है.
सावधानियां और सही रखरखाव
यह अनूठा तरीका छोटे गमलों में लगे अधिकांश सामान्य सजावटी पौधों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। विशेष तौर पर उन पौधों के लिए यह बहुत सुविधाजनक है जिन्हें हमेशा हल्की और एक समान नमी वाली मिट्टी पसंद आती है। हालांकि यह भी याद रखना जरूरी है कि हर पौधे को लगातार गीली और तर मिट्टी पसंद नहीं होती है। कुछ खास किस्म के पौधों की जड़ें ज्यादा देर तक पानी में डूबे रहने पर सड़ सकती हैं। इसलिए किसी भी पौधे पर सेल्फ वाटरिंग पॉट का इस्तेमाल करने से पहले उस पौधे की पानी की बुनियादी जरूरतों को अच्छी तरह समझ लेना बेहद आवश्यक है।
सेल्फ वाटरिंग पॉट का यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि पौधे को जितना अधिक पानी मिलेगा, उसकी ग्रोथ उतनी ही अच्छी होगी। यदि आपने जो कपड़े की पट्टी इस्तेमाल की है वह बहुत ज्यादा मोटी है या फिर वह जरूरत से ज्यादा तेजी से पानी खींच रही है, तो ऐसी स्थिति में गमले की मिट्टी हमेशा जरूरत से ज्यादा गीली बनी रह सकती है। इस अवस्था में पौधे की जड़ों को भारी नुकसान पहुँचने का खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए जब आप पहली बार इस तकनीक का उपयोग करें, तो लगातार मिट्टी की नमी की जाँच करते रहें। यदि मिट्टी आपको लगातार चिपचिपी या अत्यधिक गीली नजर आए, तो पानी खींचने वाली पट्टी को थोड़ा पतला कर लें या फिर उसकी लंबाई को कम कर दें।



















