सोशल मीडिया पर सक्रिय यूट्यूबर सलीम वास्तिक ने अपने एक ताजा वीडियो में अपने ही सगे बेटे और परिवार के सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है। सलीम वास्तिक का कहना है कि उनके निजी जीवन में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है और उनका परिवार उन्हें अकेला छोड़ चुका है। उन्होंने सीधा संदेह व्यक्त किया है कि उनका बेटा कट्टरपंथी और जेहादी सोच वाले सोशल मीडिया समूहों से जुड़ा हुआ है। अपने पारिवारिक तनाव और बेटे की संदिग्ध गतिविधियों की पूरी जानकारी उन्होंने औपचारिक तौर पर इंटेलिजेंस पुलिस को सौंप दी है ताकि सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर सकें।
सलीम वास्तिक ने अपने वीडियो में परिवार के रवैये पर कड़ा रोष जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके परिवार के लोग खुद को मुसलमान बताते हुए उन्हें काफिर मानते हैं, तो फिर उन्हें एक काफिर की कमाई और उसकी संपत्ति की चाह क्यों है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर उनके परिवार के सदस्य उनके विचारों के कारण उनसे पूरी तरह दूरी बना रहे हैं, तो उन्हें उनकी मेहनत से खड़ी की गई संपत्तियों पर भी अपना दावा पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। उन्होंने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि मजहबी कट्टरता के प्रभाव में आकर ऐसे लोग अपने पिता तक पर हमला करने या कत्ल करने की मानसिकता तक पहुंच जाते हैं।
चार साल तक दुकान में अकेले गुजरी रातें और पारिवारिक अलगाव
सलीम वास्तिक ने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी यही जद्दोजहद की कि उनकी पत्नी और बच्चों को किसी भी तरह की आर्थिक या मानसिक तकलीफ का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद पिछले 4 वर्षों से हालात ऐसे बन गए थे कि उन्हें अपने घर से दूर अपनी ही दुकान में अकेला सोना पड़ता था। जब परिवार के सदस्यों ने उनसे अपने रिश्ते तोड़े, तो शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद समाज के दबाव या सामाजिक बदनामी के डर से परिजन ऐसा कदम उठा रहे हैं। उन्हें ऐसा लगा कि परिवार के लोग शायद यह मान रहे हैं कि वह अपने बयानों के जरिए मुसलमानों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी अपने विचारों या रास्तों को परिवार पर थोपने की कोशिश नहीं की और न ही उन पर किसी प्रकार का दबाव डाला। अलग रहने के इन 4 वर्षों के दौरान भी वह परिवार का सारा घरेलू खर्च खुद उठाते रहे। उस दौर में उन्हें कभी ऐसा आभास नहीं हुआ कि उनके परिजन चरमपंथी विचारों की गिरफ्त में आ चुके हैं। अलगाव के इन मुश्किल वर्षों में समाज के आम नागरिकों और उनके यूट्यूब दर्शकों ने उनका भरपूर साथ दिया, जिससे उनका काम चलता रहा और उन्होंने कुछ नई संपत्तियां भी तैयार कीं। उन्होंने अपनी सारी संपत्तियां, बेटे के लिए खरीदी गई बाइक और कार सब कुछ परिवार और बच्चों के नाम ही कर रखा था, क्योंकि उन्हें अपने ही खून पर कभी कोई शक नहीं था।
अस्पताल के बिस्तर पर विवाद और अल मेंहदी ग्रुप का रहस्य
सलीम वास्तिक ने घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए बताया कि कुछ समय पहले उन पर अचानक एक जानलेवा हमला हुआ था। हमले के बाद जब उन्हें अस्पताल में होश आया, तो वहां का मंजर देखकर वह स्तब्ध रह गए। उनके अनुसार, उनका बेटा उस्मान अस्पताल के वार्ड में ही उनसे चार बार उलझ पड़ा और बहस करने लगा कि उनके इस्लाम विरोधी बयानों के कारण परिवार का समाज में जीना दूभर हो गया है। इसी तीखी नोकझोंक के दौरान बेटे उस्मान ने एक चौंकाने वाली बात बताई।
बेटे ने अस्पताल में खुलासा किया कि उसे एक कट्टरपंथी जेहादी ग्रुप पर एक संदेश मिला था। उस संदेश में स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि हमलावरों ने सलीम को मार गिराया है और बहुत जल्द उसके मरने की अंतिम खबर भी सामने आ जाएगी। जांच-पड़ताल और बातचीत में सामने आया कि इस डिजिटल समूह का नाम 'अल मेंहदी ग्रुप' था। सलीम वास्तिक को जब बाद में अन्य स्रोतों से भी इस ग्रुप की मौजूदगी की जानकारी मिली, तो उनके होश उड़ गए। लगातार कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाले सलीम वास्तिक यह सोचकर सन्न रह गए कि उनका अपना बेटा ऐसे खतरनाक और आतंकी झुकाव वाले समूह का हिस्सा कैसे बन गया। हालांकि, जब उन्होंने इस बारे में और कुरेदना चाहा, तो बेटे ने दावा किया कि वह ग्रुप अब डिलीट हो चुका है।
मोबाइल में संदिग्ध लेनदेन और फंडिंग पर उठे तीखे सवाल
अस्पताल में बेटे के बयानों से असहज होकर सलीम वास्तिक ने उससे कई घुमावदार सवाल पूछे। जब उन्होंने पूछा कि वह किस तरह का ग्रुप था, तो बेटे ने विरोधाभासी जवाब दिए। कभी उसने उसे व्हाट्सएप ग्रुप बताया, कभी टेलीग्राम तो कभी फेसबुक का कोई समूह होने की बात कही। सलीम वास्तिक के अनुसार, उनका बेटा न तो कोई मौलवी है और न ही नियमित नमाजी, ऐसे में उसका किसी ऐसे समूह में मौजूद होना अत्यंत संदिग्ध था। अस्पताल में मौजूद अन्य तीमारदारों और परिचितों ने भी सलीम को बताया कि उनकी पत्नी और बेटे आपस में यह चर्चा कर रहे थे कि यदि हमले में सलीम की आवाज ही हमेशा के लिए चली जाती तो ज्यादा बेहतर होता।
संदेह गहराने पर जब सलीम वास्तिक ने अपने बेटे का मोबाइल फोन खंगाला, तो उसमें एक से डेढ़ लाख रुपये तक के वित्तीय लेनदेन मिले। सलीम ने बताया कि यूट्यूब और सामाजिक काम के दौरान लोग उन्हें भी छोटे-मोटे दान देते हैं, लेकिन कभी किसी ने उनके खाते में इतनी भारी रकम नहीं भेजी थी। जब उन्होंने इस एक से डेढ़ लाख रुपये की रकम के स्रोत के बारे में बेटे से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने टालमटोल शुरू कर दी, बहाने बनाए और झटके से फोन छीन लिया। सलीम इस बात का पता नहीं लगा सके कि आखिर उनके बेटे को इतनी बड़ी रकम कौन भेज रहा था और इसके पीछे किसकी फंडिंग थी।
पारिवारिक विश्वासघात, कानूनी मुकदमे और वैराग्य का फैसला
सलीम वास्तिक ने अपने दर्द को साझा करते हुए कहा कि उनके परिवार के अन्य सदस्य भी उनका साथ देने के बजाय उनके खिलाफ खड़े हो गए। उनकी भाभी और भतीजा भी उनकी पत्नी का पक्ष लेते हुए उन पर हमला करने तक को आमादा नजर आए। उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा कि जिस पत्नी और औलाद की खुशहाली के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन झोंक दिया, उन्हीं की तरफ से मिले इस धोखे ने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया है।
कुरीतियों और कट्टरता के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने के बाद सलीम वास्तिक का कहना है कि अब उनका शरीर बेहद कमजोर हो चुका है और वह मानसिक रूप से टूट चुके हैं। वर्तमान में उनके खिलाफ कानूनी मुकदमा भी चल रहा है। उन्होंने हताशा व्यक्त करते हुए कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि सब कुछ त्यागकर उन्हें जेल में ही जाकर बैठ जाना चाहिए। उन्हें सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि जिस खतरे के खिलाफ वह समाज को आगाह कर रहे थे, उनके अपने परिजन ही देश विरोधी और जेहादी सोच रखने वाले तत्वों से जा जुड़े। उनका स्पष्ट कहना है कि कोई भी सामान्य नागरिक बिना किसी दुर्भावना के कट्टरपंथी समूहों से क्यों जुड़ेगा या बिना किसी वाजिब कारण के विरोध प्रदर्शनों में बैनर लेकर क्यों खड़ा होगा।
खुफिया विभाग को सौंपी रिपोर्ट, जांच की मांग
सलीम वास्तिक ने साफ कर दिया कि यदि वह अदालत में चल रहे मुकदमे से पूरी तरह बरी हो जाते हैं, तो वह इस दुनियादारी और सांसारिक बंधनों को सदा के लिए छोड़ देंगे। उनका इरादा किसी दूरदराज के जंगल या पहाड़ों में जाकर समाधिस्थ हो जाने का है, क्योंकि अब उनका मन इस दुनिया से पूरी तरह उचट चुका है।
अपने दायित्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उन्होंने अपने बेटे की संदिग्ध गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन और 'अल मेंहदी ग्रुप' से जुड़े सभी साक्ष्य और जानकारियां इंटेलिजेंस पुलिस को लिखित व मौखिक रूप में सौंप दी हैं। उन्होंने कहा कि अपना नागरिक कर्तव्य उन्होंने पूरा कर दिया है और अब सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे गहराई से पूछताछ कर इस बात की तह तक जाएं कि पर्दे के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। सलीम वास्तिक ने दोहराया कि वह पूर्ण रूप से होशोहवास में यह बात कह रहे हैं और ऐसे देशविरोधी व कट्टरपंथी तत्वों से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

















