टेलीविजन जगत में जब किसी कलाकार की मेहनत और संघर्ष की मिसाल दी जाती है, तो एक्टर केके गोस्वामी का नाम सबसे आगे आता है। भारतीय टीवी स्क्रीन पर अपनी खास मौजूदगी से लाखों दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले इस कलाकार का रास्ता कभी आसान नहीं था। जिंदगी की शुरुआती दहलीज पर खड़े होकर जब उन्होंने अभिनय की दुनिया में जाने का सपना देखा, तो आसपास के लोगों ने उनका हौसला बढ़ाने के बजाय उपहास उड़ाया। एक समय ऐसा भी था जब उनके छोटे कद को देखकर पड़ोसियों ने उनके माता-पिता के सामने यहां तक कह दिया था कि यह लड़का आगे चलकर केवल भीख मांगकर ही पेट भर पाएगा। इन तमाम कड़वे तानों और उपहास के बीच केवल उनकी मां का अटूट विश्वास था, जिन्होंने हमेशा कहा कि उनका बेटा एक दिन पूरी दुनिया में बड़ा नाम कमाएगा। मां की इस सीख को ढाल बनाकर वे मुजफ्फरपुर की गलियों से निकलकर मुंबई पहुंचे और हिंदी मनोरंजन उद्योग में अपने काम का परचम लहराया।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान केके गोस्वामी ने अपने बचपन, कॉलेज के दिनों, मुंबई में गुजारे गए तंगहाली के शुरुआती दौर और शादी से जुड़े बेहद भावुक किस्सों को साझा किया। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले केके गोस्वामी का शुरुआती जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। जब तक वे कक्षा छह में पढ़ते थे, तब तक उन्हें खुद के बाकी बच्चों से अलग होने का तनिक भी भान नहीं था। जैसे ही वे हाई स्कूल और बाद में कॉलेज पहुंचे, उनके साथ पढ़ने वाले और आसपास के लड़के उन्हें परेशान करने लगे। कई लोग राह चलते उन्हें अचानक अपने कंधों पर उठाकर भाग जाते, तो कोई उनके कान मरोड़कर उनका मजाक उड़ाता था। समाज की इस संवेदनहीनता ने उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचाया, मगर उन्होंने कभी अपनी हिम्मत टूटने नहीं दी।
सपनों के शहर में संघर्ष और भूखे पेट गुजारे दिन
साल 1992 में जब केके गोस्वामी ने फिल्मों और धारावाहिकों में काम करने की ठान ली, तो वे सीधे मुंबई चले आए। उस दौर में जब उन्होंने लोगों को बताया कि वे एक अभिनेता बनना चाहते हैं, तब भी उन्हें लोगों के ठहाकों और व्यंग्य का सामना करना पड़ा। महानगर में अपनी पहचान बनाने के शुरुआती तीन वर्षों में हालात इतने तंग थे कि उनके पास भोजन का प्रबंध करने तक के पैसे नहीं होते थे। कई-कई दिन उन्हें भूखे पेट रहकर गुजारने पड़े। काम की तलाश में वे दर-दर भटके, मगर उनके भीतर का कलाकार कभी हारा नहीं।
उनकी अटूट निष्ठा और धैर्य का पहला बड़ा परिणाम साल 1995 में सामने आया। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और अपने शो ‘वाओ’ में उन्हें अभिनय का अवसर दिया। इसी दौरान मशहूर संगीतकार बप्पी लहरी की नजर उन पर पड़ी और वे उन्हें अपने विभिन्न संगीत दौरों पर साथ ले जाने लगे। केके गोस्वामी को बप्पी लहरी प्यार से ‘मिनी बॉन्ड’ कहकर पुकारते थे। उन स्टेज शोज के लिए उन्हें प्रति कार्यक्रम 500 से 2000 रुपये तक का मानदेय मिलता था, जिसकी कीमत उस समय के हिसाब से आज के लगभग 25 से 50 हजार रुपये के बराबर मानी जाती है। इस आर्थिक संबल ने उनके हौसले को नई उड़ान दी।
विलेन के किरदार से गबराल तक का यादगार सफर
साल 2001 में प्रसारित हुए धारावाहिक ‘जूनियर जी’ में केके गोस्वामी को मुख्य खलनायक का दमदार किरदार मिला। इस किरदार ने दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता को काफी बढ़ा दिया। इसके बाद टीवी निर्देशकों और निर्माताओं के बीच उनकी मांग तेजी से बढ़ी और उन्हें ‘शक्तिमान’, ‘सोन परी’ तथा ‘शाका लाका बूम बूम’ जैसे अत्यंत लोकप्रिय धारावाहिकों में अहम भूमिकाएं मिलने लगीं। बच्चों के पसंदीदा शो ‘शक्तिमान’ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके हिस्से केवल एक ही संवाद होता था, ‘अंधेरा कायम रहे’। जब उन्होंने मेकर्स से अपने लिए और अधिक संवाद लिखने का आग्रह किया तो पहले तो यूनिट के लोग हंसे, लेकिन उनकी प्रतिभा और लगन को देखते हुए बाद में उन्हें लंबे दृश्य और अतिरिक्त संवाद सौंपे गए।
साल 2003 में आया हॉरर-कॉमेडी शो ‘विकराल और गबराल’ उनके जीवन का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। इस शो में उन्होंने मुख्य नायक गबराल की भूमिका निभाई, जिससे वे घर-घर में एक प्रमुख पहचान बन गए। ‘गुटुर गू’ और ‘सीआईडी’ जैसे धारावाहिकों में भी उनके अभिनय की खूब सराहना हुई।
सिनेमा उद्योग की सोच और भूमिकाओं की कमी पर दर्द
बॉलीवुड में बौनेपन से जूझ रहे कलाकारों को मिलने वाली भूमिकाओं को लेकर केके गोस्वामी ने खुलकर अपनी निराशा व्यक्त की। उनका मानना है कि पश्चिमी सिनेमा यानी हॉलीवुड में ऐसे कलाकारों को मुख्यधारा के मजबूत किरदार और सुपरस्टार जैसा दर्जा दिया जाता है, जबकि हिंदी सिनेमा में उनके लिए स्तरीय किरदार लिखे ही नहीं जाते। उन्होंने कहा कि अक्सर मुख्यधारा के बड़े अभिनेताओं के पैरों को तकनीक या सहारा देकर छोटा दिखाया जाता है, जिससे वास्तविक कलाकारों के हाथ से काम छिन जाता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने फिल्म ‘जीरो’ का जिक्र किया जिसमें शाहरुख खान ने एक छोटे कद के व्यक्ति का किरदार निभाया था। केके गोस्वामी के अनुसार बड़े अभिनेता अन्य विविध भूमिकाएं कर सकते थे, जबकि ऐसे किरदारों से उन जैसे कलाकारों को मुख्यधारा में काम मिलने का अवसर मिल सकता था। वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने सुपरस्टार सलमान खान के खुले दिल की तारीफ की। जब केके गोस्वामी ने सलमान खान से मिलकर उनके जैसा प्रसिद्ध बनने की इच्छा जताई थी, तो सलमान खान ने मुस्कुराते हुए उन्हें अपनी कई फिल्मों में काम देने की पेशकश की थी। हालांकि, जब भी सलमान खान की टीम उनसे संपर्क करती, वे किसी काम से शहर से बाहर होते थे जिसके चलते वह तालमेल नहीं बैठ सका।
रिजेक्शन का दर्द, मंदिर में विवाह और पारिवारिक खुशियां
निजी जीवन के मोर्चे पर भी केके गोस्वामी को भारी भावनात्मक आघात झेलने पड़े थे। अपने शुरुआती दिनों में उन्हें एक युवती से गहरा लगाव हुआ था, लेकिन जब उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं, तो उस युवती ने उनके शारीरिक कद का मजाक उड़ाते हुए उन्हें बुरी तरह ठुकरा दिया। इस घटना ने उनके आत्मसम्मान को हिलाकर रख दिया था। बाद में जब उनके पिता ने उनके लिए दो बार विवाह के रिश्ते तय किए, तो दोबारा ठुकराए जाने और समाज में लज्जित होने के डर से उन्होंने दोनों बार खुद ही बहाने बनाकर रिश्ते तुड़वा दिए।
आखिरकार तीसरी बार उनके पिता ने बिना पूर्व सूचना दिए उन्हें गांव बुलाया और मात्र चार दिनों के भीतर एक मंदिर में उनका विवाह संपन्न कराया। विवाह के समय मंदिर परिसर में भारी भीड़ एकत्र हो गई थी। स्थिति को देखते हुए मौके पर पहुंची पुलिस को संदेह हुआ कि कहीं यह विवाह जबरन तो नहीं कराया जा रहा है। उस वक्त उनकी होने वाली पत्नी ने स्वयं आगे आकर पुलिसकर्मियों के सामने दृढ़ता से बयान दिया कि वे केके गोस्वामी को दिल से पसंद करती हैं और अपनी मर्जी से यह विवाह कर रही हैं। वर्तमान समय में केके गोस्वामी दो होनहार बेटों के पिता हैं। उनका बड़ा बेटा आईएएस अधिकारी बनने की तैयारी कर रहा है, जबकि छोटा बेटा वैज्ञानिक बनने के सपने को पूरा करने में जुटा है। जब वे खुद कार चलाकर सड़कों पर निकलते हैं, तो लोग उन्हें हैरतभरी नजरों से देखते हैं।
ओटीटी पर आगामी बड़े प्रोजेक्ट्स
केके गोस्वामी आज भी अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं और जल्द ही एक बड़े डिजिटल प्रोजेक्ट के जरिए दर्शकों के बीच लौटने की तैयारी कर रहे हैं। वे चर्चित फिल्म ‘तुम्बाड’ के निर्माताओं की आने वाली एक वेब सीरीज में पंकज त्रिपाठी और कुणाल खेमू जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ एक महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभाते नजर आएंगे। बचपन में ताने सहने वाले इस कलाकार ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि शारीरिक बनावट इंसान के सपनों और उसकी उपलब्धियों की सीमा तय नहीं कर सकती।



















