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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड दो दशक के उच्च स्तर पर पहुंचने से टूटा भारतीय रुपया, डॉलर के मुकाबले दबाव तेजबाज़ार
1 अक्तू॰ 2026, 11:30 am (22 मिनट पहले)· 1

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड दो दशक के उच्च स्तर पर पहुंचने से टूटा भारतीय रुपया, डॉलर के मुकाबले दबाव तेज

अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.31 प्रतिशत के करीब पहुंचने और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण भारतीय रुपये पर बिकवाली का भारी दबाव बना है।

USD/INR━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण1 अक्टूबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

USD/INR अभी 95.99 पर है, जबकि EMA20 95.70, EMA50 95.52 और EMA200 93.55 पर हैं।

आगे संभावित चाल

EMA20 (95.70) तक गिरावट पर खरीदार बचाव करते हैं।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

USD/INR का RSI 55 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी दर्ज की गई, जिससे पिछले कारोबारी सत्र में दर्ज की गई बढ़त थम गई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में जारी तेजी के कारण विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका सीधा असर विकासशील देशों की मुद्राओं पर पड़ रहा है। यूएसडी/आईएनआर जोड़ी में आई इस मजबूती के बीच भारतीय रुपया दबाव में फिसलकर 95.93 के आसपास पहुंच गया। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में विनिमय दर 95.99 के स्तर पर बनी हुई है, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 96.05 था।

दो दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय निवेशकों की नजरें अमेरिकी ऋण बाजार पर टिकी हुई हैं। ताजा कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.31 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है, जो बीते दो दशकों में देखा गया सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला यह उच्च प्रतिफल वैश्विक पूंजी प्रवाह की दिशा बदल रहा है। जब दुनिया की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अमेरिकी सरकार की प्रतिभूतियों पर 5 प्रतिशत से अधिक का गारंटीड रिटर्न मिलने लगता है, तब उभरते बाजारों की जोखिम भरी संपत्तियों के प्रति अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का आकर्षण स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है। इसी परिदृश्य के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय रुपये जैसी उभरती मुद्राओं से पूंजी निकालकर अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड में लगा रहे हैं, जिससे रुपये पर बिकवाली का दबाव गहराया है।

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फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और ब्याज दरों पर कशकारी का बयान

बॉन्ड यील्ड में तेजी की एक बड़ी वजह फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं के हालिया बयान हैं। फेड अधिकारी कशकारी ने मौद्रिक नीति को लेकर एक बेहद सख्त संदेश दिया है, जिसमें एफएक्सएस स्पीचट्रैकर स्कोर ऐतिहासिक औसत 6.2 के मुकाबले 7.1 दर्ज किया गया। उन्होंने इस बात पर विशेष चिंता जताई कि लगभग 3 प्रतिशत के आसपास बनी मुद्रास्फीति अभी भी वांछित लक्ष्य की तुलना में काफी ऊंची है। इसके साथ ही, अर्थव्यवस्था में दिख रही जुझारू आर्थिक वृद्धि यह संकेत दे रही है कि मौजूदा मौद्रिक नीति उतनी सख्त नहीं है जितना पहले माना जा रहा था।

कशकारी ने उच्च तटस्थ ब्याज दर की संभावना पर बल देते हुए स्पष्ट मार्गदर्शन दिया कि इस वर्ष एक और ब्याज दर वृद्धि की जा सकती है, जिसके बाद 2027 में भी एक अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव है। लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने का यह परिदृश्य सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा दे रहा है, भले ही कशकारी अभी भी सीमित नीतिगत कदमों के जरिए महंगाई को नियंत्रित करने की उम्मीद कर रहे हों। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच ऊर्जा आपूर्ति के झटकों को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने संबंधी एक्सियोस की खबरों का खंडन किए जाने के बाद अमेरिका-ईरान कूटनीतिक वार्ताओं से तनाव घटने की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं, जिससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों ने बढ़ाई डॉलर की ताकत

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हुए हाल ही में जारी एडीपी रोजगार परिवर्तन के आंकड़ों ने आगामी आधिकारिक नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट के लिए एक मजबूत जमीन तैयार कर दी है। बुधवार को सामने आए आंकड़ों से पता चला कि अमेरिका के निजी क्षेत्र ने 90,000 नई नौकरियों का सृजन किया है। यह संख्या विश्लेषकों के 70,000 के अनुमान से काफी अधिक है और अगस्त महीने के 36,000 के आंकड़े की तुलना में तेज उछाल को प्रदर्शित करती है। श्रम बाजार में जारी यह मजबूती फेडरल रिजर्व को उच्च ब्याज दरें बनाए रखने के लिए पर्याप्त आधार देती है।

व्यापारियों ने इसके बाद अपनी ब्याज दर अपेक्षाओं में भी फेरबदल किया है। वायदा बाजारों में फेड की अगली संभावित ब्याज दर वृद्धि का अनुमान 28 अक्टूबर से खिसक कर 9 दिसंबर तक पहुंच गया है। इस बदलाव को प्रभावित करने वाली मुद्रास्फीति रिपोर्ट वास्तव में अगस्त की तुलना में जुलाई के आंकड़ों से अधिक जुड़ी थी। अगस्त के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स प्राइस इंडेक्स के साथ प्रकाशित सरकार के वार्षिक संशोधन में जुलाई के कोर पीसीई आंकड़े को 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.0 प्रतिशत कर दिया गया था, जिसमें खाद्य और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों को बाहर रखा जाता है।

तकनीकी चार्ट पर यूएसडी/आईएनआर का विश्लेषण

दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो यूएसडी/आईएनआर जोड़ी 95.9705 के स्तर पर कारोबार करते हुए अल्पकालिक तेजी का रुख बनाए हुए है। यह दर अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 95.7263 से ऊपर बनी हुई है, जो निकट अवधि में मजबूत तकनीकी समर्थन प्रदान कर रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 59.59 पर सकारात्मक क्षेत्र में टिका हुआ है, जो यह दर्शाता है कि अभी बाजार में ओवरबॉट यानी अत्यधिक खरीदारी की स्थिति नहीं बनी है और जब तक कीमत मौजूदा समर्थन स्तरों का सम्मान करती है, तब तक ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है।

लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, 14-दिवसीय आरएसआई वर्तमान में 55 पर स्थित है और एमएसीडी 0.19 पर है, जो अपने 0.15 के सिग्नल स्तर से ऊपर 0.04 के सकारात्मक हिस्टोग्राम के साथ तेजी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेजेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 95.70, 50-दिवसीय ईएमए 95.52 और 200-दिवसीय ईएमए 93.55 पर है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 95.48 और 200-दिवसीय एसएमए 93.85 पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस का संकेत देता है, जो दीर्घकालिक अपट्रेंड की पुष्टि करता है। 20-अवधि के बोलिंगर बैंड्स 94.41 से 96.69 के दायरे में फैले हैं और कीमत 95.55 के मध्य रेखा के भीतर गतिशील है। एडीएक्स 33 पर मजबूत ट्रेंड दिखा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक का फास्ट ऑसिलेटर 89 और सिग्नल लाइन 90 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 0.57 दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। प्रमुख स्तरों में पिवट 95.93 पर, पहला प्रतिरोध आर1 96.04 और दूसरा प्रतिरोध आर2 96.10 पर है, जबकि समर्थन स्तर क्रमशः एस1 95.87 और एस2 95.76 पर दर्ज हैं। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस मुद्रा जोड़ी का दायरा 85.86 से 97.05 के बीच रहा है।

रुपये की चाल तय करने वाले प्रमुख कारक और आरबीआई की रणनीति

भारतीय रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार की बाहरी हलचलों के प्रति बेहद संवेदनशील मुद्राओं में शामिल है। भारत अपनी आवश्यकता का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें रुपये की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। चूंकि भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर सूचकांक की मजबूती सीधे घरेलू मुद्रा पर दबाव डालती है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह भी विनिमय दर को गहराई से प्रभावित करते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक व्यापार की सुगमता और विनिमय दर में स्थिरता बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करता है। केंद्रीय बैंक अत्यधिक उतार-चढ़ाव को थामने के लिए जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचता या खरीदता है। इसके साथ ही, आरबीआई ब्याज दरों को समायोजित करके मुद्रास्फीति को अपने 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर बनाए रखने का प्रयास करता है। सामान्यतः उच्च ब्याज दरें रुपये को मजबूत करती हैं, जिसका मुख्य कारण कैरी ट्रेड की प्रक्रिया है। कैरी ट्रेड में वैश्विक निवेशक कम ब्याज दर वाले देशों से सस्ता कर्ज लेकर भारत जैसे अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दर देने वाले देशों में पूंजी लगाते हैं और अंतर से मुनाफा कमाते हैं।

आर्थिक वृद्धि दर, व्यापार संतुलन और मुद्रास्फीति जैसे व्यापक आर्थिक कारक भी रुपये की चाल निर्धारित करते हैं। उच्च जीडीपी विकास दर विदेशी निवेश को आकर्षित करती है, जिससे रुपये की मांग बढ़ती है। व्यापार घाटे में कमी भी रुपये को मजबूती देती है। इसके विपरीत, यदि घरेलू महंगाई दर प्रतिस्पर्धी देशों से अधिक हो, तो यह मुद्रा के आंतरिक अवमूल्यन को दर्शाती है और निर्यात महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है, जिससे रुपये की बिकवाली बढ़ जाती है। हालांकि, अत्यधिक महंगाई से निपटने के लिए जब आरबीआई नीतिगत दरें बढ़ाता है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए प्रतिफल आकर्षक होने से रुपये को कुछ सहारा भी मिल सकता है।

अन्य वैश्विक मुद्राओं, सोने और डिजिटल संपत्तियों का हाल

अमेरिकी डॉलर के व्यापक दबदबे का असर केवल भारतीय रुपये पर ही नहीं, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों पर भी देखा जा रहा है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर के करीब 0.6900 के मध्य क्षेत्र में सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। हालांकि अमेरिकी पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में ब्याज दर वृद्धि की आशंका को कुछ कम किया, लेकिन कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊपर बनाए रखा। इसी बीच अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इसका ऑसी डॉलर पर बहुत सीमित प्रभाव पड़ा।

यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी एशियाई सत्र में 158.00 से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के शीर्ष स्तर पर कारोबार कर रही है। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दरें बढ़ाने की संभावनाओं और जापानी अधिकारियों के संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिम के बावजूद डॉलर की तेजी हावी है। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में डॉलर की मांग बनी हुई है। उधर यूरो/यूएसडी गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 तक लुढ़क गई थी, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है, हालांकि यूरोज़ोन में नए मुद्रास्फीति झटके यूरो को कुछ सहारा दे सकते हैं।

कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतों में एशियाई सत्र के दौरान 4,139 डॉलर प्रति औंस के आसपास निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी देखी गई, जिससे पिछले दिन 4,220 डॉलर के स्तर से शुरू हुई गिरावट पर ब्रेक लगा। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण बिना ब्याज देने वाली इस पीली धातु की तेजी सीमित रहने के आसार हैं। दूसरी ओर, क्रिप्टो परिसंपत्ति हाइपरलिक्विड (एचवाईपीई) गुरुवार को 2 प्रतिशत टूटकर पिछले दिन की 5 प्रतिशत बढ़त को गंवाती नजर आई। बुधवार को 50 लाख डॉलर की संस्थागत पूंजी निकासी के कारण इस टोकन की कीमत 90 डॉलर के नीचे सीमित बनी हुई है।

सवाल-जवाब

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट क्यों आई?
अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के दो दशक के उच्च स्तर 5.31 प्रतिशत पर पहुंचने और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी के संकेतों के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड किस स्तर पर पहुंच गई है?
10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.31 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले 20 वर्षों में देखा गया सबसे ऊंचा स्तर है।
फेडरल रिजर्व के अधिकारी कशकारी ने ब्याज दरों को लेकर क्या कहा है?
उन्होंने संकेत दिया है कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए इस साल एक और ब्याज दर वृद्धि तथा वर्ष 2027 में भी एक अतिरिक्त बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है।
अमेरिका के निजी क्षेत्र में रोजगार के क्या आंकड़े सामने आए हैं?
एडीपी रोजगार रिपोर्ट के अनुसार निजी क्षेत्र में 90,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो अनुमानित 70,000 और अगस्त के 36,000 के आंकड़े से काफी अधिक है।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार यूएसडी/आईएनआर जोड़ी की वर्तमान स्थिति क्या है?
यूएसडी/आईएनआर 95.7263 के अपने 20-दिवसीय ईएमए से ऊपर 95.9705 के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि आरएसआई 59.59 पर सकारात्मक क्षेत्र में बना हुआ है।
भारतीय रुपये के मूल्य को प्रभावित करने वाले मुख्य घरेलू और बाहरी कारक कौन से हैं?
कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर का वैश्विक मूल्य, विदेशी निवेश प्रवाह, मुद्रास्फीति दर और भारतीय रिजर्व बैंक का बाजार हस्तक्षेप प्रमुख कारक हैं।
क्या वैश्विक स्तर पर अन्य मुद्राओं और संपत्तियों पर भी इसका असर पड़ा है?
हां, ऑस्ट्रेलियन डॉलर दो महीने के निचले स्तर पर रहा, यूरो गिरकर 1.1312 पर आ गया और सोने की कीमतों में भी उच्च बॉन्ड यील्ड के कारण सीमित बढ़त देखी गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Michael Anderson@michael-anderson·6 मिनट पहले

फेड के रुख और बॉन्ड यील्ड में तेजी से निवेशकों का पैसा अमेरिकी बाजार की तरफ भाग रहा है, जिसका सीधा असर रुपये की कमजोरी पर दिख रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·6 मिनट पहले

माइकल, बिल्कुल सही कहा आपने। जब अमेरिका में बिना जोखिम के पाँच परसेंट से ज़्यादा मिल रहा है, तो निवेशक पैसा निकालेंगे ही।

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