जीवन की सबसे कठिन चुनौतियों से उबरकर जब कोई इंसान अपने परिवार की खातिर दोबारा मेहनत करने की कोशिश करता है, तो किस्मत कभी-कभी बहुत क्रूर मोड़ ले लेती है। ऐसा ही दर्दनाक वाकया फरीदाबाद के रहने वाले 33 साल के बाइक टैक्सी चालक दराब सिंह के साथ हुआ है। तीन साल से भी ज्यादा समय तक गंभीर बीमारी के कारण चारपाई पर पड़े रहने के बाद, जनवरी में ही उन्होंने दोबारा काम संभालना शुरू किया था ताकि अपने भूखे बच्चों का पेट भर सकें। लेकिन काम पर वापसी के कुछ ही हफ्तों बाद एक भीषण सड़क दुर्घटना ने उनकी पूरी जिंदगी को फिर से पटरी से उतार दिया है। बिना किसी गलती के वह एक ऐसे हादसे का शिकार हो गए, जिसमें उनकी दोपहिया टैक्सी पर सवार एक छात्रा की जान चली गई और वह खुद गंभीर रूप से घायल होकर दोबारा बिस्तर पर पहुंच गए।
बीमारी के लंबे अंधेरे से निकलकर काम पर लौटे थे दराब
दराब सिंह दो छोटे बच्चों के पिता हैं। पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से वह सीने के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे, जिसके चलते वह पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित हो चुके थे। उस गंभीर बीमारी के दौर में परिवार की आर्थिक स्थिति इस कदर बिगड़ गई थी कि बच्चे दाने-दाने को मोहताज हो गए थे। किसी तरह संघर्ष करके जब वह जनवरी के महीने में इस बीमारी से उबरे, तो रोजी-रोटी जुटाने के लिए उन्होंने उबर ऐप के जरिए बाइक टैक्सी चलाना शुरू किया। उन्हें उम्मीद थी कि अब धीरे-धीरे परिवार की गाड़ी पटरी पर आ जाएगी और बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी होने लगेंगी।
शेख सराय से नोएडा के सफर में हुआ दर्दनाक हादसा
सोमवार की सुबह दराब सिंह को शेख सराय से नोएडा जाने के लिए एक सवारी मिली। इस राइड को असम की रहने वाली 22 वर्षीय हृषिता लाहोन ने बुक किया था। हृषिता अंग्रेजी साहित्य में स्नातक थीं और दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क इलाके में रह रही थीं। सुबह करीब 10 बजे हृषिता बाइक टैक्सी पर सवार होकर नोएडा के सफर पर निकली थीं। दोनों डीएनडी फ्लाईवे की दिशा में आगे बढ़ रहे थे, लेकिन आश्रम फ्लाईओवर के पास एक आसमानी नीले रंग की डीटीसी बस ने उनकी मोटरसाइकिल में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी तेज थी कि टूट गए दोनों के हेलमेट
टक्कर का मंजर बेहद खौफनाक था। दराब सिंह ने बताया कि आसमानी नीले रंग की बस ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। दोनों के हेलमेट टूट गए। उसके बाद उन्हें बस इतना याद है कि एक महिला मदद के लिए आगे आई और दोनों घायलों को तुरंत नजदीकी जीवन अस्पताल ले जाया गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों सड़क पर गिर पड़े। हृषिता की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी, जबकि दराब के हाथ, घुटने और पैरों में गंभीर चोटें आई थीं।
इलाज के दौरान छात्रा ने तोड़ा दम, पुलिस को नहीं मिले प्रत्यक्षदर्शी
जीवन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद हृषिता की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें सरिता विहार स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद दोपहर करीब 2 बजे छात्रा ने दम तोड़ दिया। पुलिस को इस सड़क हादसे की सूचना दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर मेडिको लीगल केस रिपोर्ट के जरिए मिली। दुर्घटनास्थल पर कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं था, जिसके कारण पुलिस को वहां कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं मिल सका। जब तक जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचे, दराब सिंह जीवन अस्पताल से प्राथमिक उपचार कराकर जा चुके थे, जिसके कारण उनका बयान उस समय दर्ज नहीं हो सका। हालांकि उनकी मेडिकल रिपोर्ट में भी दुर्घटना से लगे गहरे जख्म दर्ज हैं।
शारीरिक घावों के साथ मन पर बैठा उम्र भर का आघात
इस हादसे के बाद दराब सिंह की हालत फिर से दयनीय हो गई है। उनके हाथों, घुटनों और पैरों में गहरी चोटें हैं और वह ठीक से चलने में भी असमर्थ हैं। उन्हें नहीं मालूम कि वह कब दोबारा अपने पैरों पर खड़े होकर काम कर पाएंगे। शारीरिक दर्द से भी बड़ा दर्द उनके मन पर लगा मानसिक आघात है। वह इस बात से बेहद दुखी हैं कि जो युवती सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए उनकी बाइक पर बैठी थी, वह अब इस दुनिया में नहीं रही। एक बार फिर उनकी रोजी-रोटी छिन चुकी है और मासूम बच्चों के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।


















