अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर चोट बताते हुए केंद्र की मोदी सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर कड़ा हमला बोला है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का रुख हमेशा से भगवान राम के प्रति सम्मानजनक रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान ही राम मंदिर का ताला खोला गया था और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के समय रामलला की पूजा का सिलसिला शुरू हुआ था। दीपेंद्र सिंह हुड्डा का तर्क है कि इस स्तर की चोरी सत्ता के संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकती, इसलिए पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सड़क से लेकर सदन तक व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।
शंकराचार्य के आरोप और ट्रस्ट की भूमिका
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पूरी घटना को मात्र चोरी नहीं, बल्कि एक पूर्व-नियोजित गहरी साजिश करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया से आंदोलन से जुड़े मुख्य लोगों और धर्माचार्यों को जानबूझकर दूर रखा गया है। शंकराचार्य के अनुसार, मंदिर निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बिना किसी परामर्श के कुछ चुनिंदा लोगों को सौंप दी गई थीं, और जिस तरह की आशंकाएं पहले जताई गई थीं, घटनाक्रम बिल्कुल उसी दिशा में आगे बढ़ा है। उन्होंने ट्रस्ट पर सीधा निशाना साधते हुए इसे अपनी विफलता बताया है।
जांच और कानूनी कार्रवाई
पुलिस प्रशासन अब इस मामले की गहराई से तहकीकात कर रहा है। मामले के आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय के घरों पर पुलिस ने छापेमारी की है। पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा के कौशलपुरी स्थित आवास से 15,000 रुपये नकद, एक सोने की चेन और एक स्विफ्ट डिजायर कार बरामद की है। लवकुश मिश्रा के घर से 35,000 रुपये नकद और एक सोने का लॉकेट मिला है, जबकि करुणेश पांडेय के किराये के घर से 10,000 रुपये नकद जब्त किए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के रिश्तेदारों के कुल 30 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, क्योंकि प्रारंभिक जांच में ज्ञात आय से अधिक लेनदेन के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का ध्यान अब इन आरोपियों के पूरे वित्तीय साम्राज्य और संदिग्ध संपत्तियों को खंगालने पर है।
मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव
दान चोरी के इस मामले के बाद मंदिर प्रबंधन ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। मंदिर के दान पात्र की गणना करने वाले 23 कर्मचारियों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल विशेष रूप से नियुक्त और जांचे गए कर्मचारी ही दान की गिनती करेंगे। ट्रस्ट ने सख्त नियम लागू किए हैं, जिसके अंतर्गत कर्मचारियों को बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य होगा और पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र जमा करना होगा। अब दान की गणना सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंच चुके हैं। वे तीन दिवसीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं, जिसमें निर्माण कार्यों की प्रगति और 4 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार के काम का सत्यापन किया जाएगा। इस बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा मौजूद नहीं रहेंगे, जबकि कृष्ण मोहन अधिकृत रूप से हिस्सा लेंगे।
सिंधी समाज और राजनीतिक बयानबाजी
विश्व सिंधी सेवा संगम ने राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को पत्र लिखकर सितंबर-अक्टूबर 2026 में दर्शन की अनुमति मांगी है। इस पत्र में 200 चांदी की ईंटों के दानदाताओं की सूची के साथ 35 भारतीय शहरों और 17 देशों का विवरण दिया गया है। उधर, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राज्यसभा सांसद बृज लाल ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियाँ हमेशा से रामभक्तों की आस्था के खिलाफ रही हैं। वहीं, कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने सपा और कांग्रेस पर नमाज़ की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य आस्था और विरासत को संरक्षित करना है।











