अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे की चोरी ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। जांच एजेंसियों और पुलिस ने इस मामले की परतों को खोलना शुरू किया है, तो हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आए हैं। रामलला के दरबार में हुई इस धोखाधड़ी के मुख्य साजिशकर्ताओं के तौर पर अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला के नाम सामने आए हैं। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस ने पाया कि मंदिर की पवित्र सामग्री और दान के पैसे का इस्तेमाल न केवल निजी विलासिता के लिए किया गया, बल्कि इसे छिपाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा भी लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 10 जुलाई के नियोजित अयोध्या दौरे से ऐन पहले सामने आए इस घोटाले ने प्रशासन को सकते में डाल दिया है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
ब्लैक मनी को वाइट करने का अनूठा तरीका
जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने मंदिर से चुराई गई बड़ी नकद राशि को ठिकाने लगाने के लिए एक सोची-समझी योजना बनाई थी। उसने अपने रिश्तेदारों और करीबी परिचितों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके इस अवैध नकद राशि को अपने खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाया। इस तरह, वह मंदिर के काले धन को धीरे-धीरे वाइट मनी में बदलने में सफल हो रहा था। पुलिस ने इस घोटाले की गहराई तक जाने के लिए अनुकल्प के घर पर आयोजित धार्मिक आयोजनों में सेवा देने वाले टेंट और केटरिंग संचालकों के भी बयान दर्ज किए हैं। जांच में पुष्टि हुई है कि इन आयोजनों में हुए भारी खर्चों का भुगतान भी उसी चोरी के पैसों से किया गया था। सबूतों की तलाश के लिए पुलिस जल्द ही उसे उसके पुश्तैनी घर ले जाकर मौके की तस्दीक भी कर सकती है।
प्रेमिका पर लुटाया धन और भाई का खुलासा
दूसरे आरोपी अविनाश शुक्ला की जीवनशैली इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बनी है। उसके बैंक खातों की पड़ताल करने पर 15 लाख रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अविनाश ने इन रुपयों से अपनी महिला मित्र (प्रेमिका) को एक कीमती स्मार्टफोन और करीब 2 लाख रुपये नगद उपहार में दिए थे। संबंधित महिला से भी अब पूछताछ की तैयारी की जा रही है। इस बीच अविनाश के भाई अभिषेक ने पुलिस के सामने एक बड़ा राज खोला है। उसने देखा था कि अविनाश एक योग सेंटर के भीतर नोटों से भरा बैग ले जा रहा था। जब अभिषेक ने पूछताछ की तो अनुकल्प मिश्रा ने उसे धमकाते हुए कहा कि यह पैसा दर्शन कराने के बदले भक्तों ने खुशी से दिया है।
सर्राफा व्यापारियों की संलिप्तता और बरामदगी की कोशिश
पुलिस की जांच का दायरा अब इनायत नगर क्षेत्र तक फैल गया है, जहां के एक रसूखदार सर्राफा व्यवसायी को हिरासत में लिया गया है। इस सोनार पर आरोप है कि वह मंदिर से चुराए गए सोने को गलाकर उसे बाजार में खपाने में मदद करता था। अब एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कुल कितनी मात्रा में सोने को गलाकर ठिकाने लगाया गया है। इस समय पुलिस राम मंदिर को प्राप्त हुए कुल दान, जिसमें 70 किलो चांदी, 1,250 किलो सोना और 200 करोड़ रुपये नकद शामिल हैं, के सभी रिकॉर्ड्स को ट्रस्ट के कागजातों से मिलाकर वास्तविक चोरी का सटीक आंकड़ा निकालने में जुटी है।
जेल में आमने-सामने पूछताछ
न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद अब पुलिस जेल में बंद अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, राम शंकर यादव, करुणेश पांडे और मनीष यादव से कड़ी पूछताछ करेगी। जेल परिसर के भीतर ही इन्हें आमने-सामने बिठाकर उनके परस्पर विरोधाभासी बयानों की जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त, रविवार को आरोपियों के परिजनों को बुलाकर उनके बैंक लेनदेन के बारे में विस्तृत बयान दर्ज किए गए हैं, ताकि धन के स्रोतों का अंतिम सच उजागर हो सके।











