उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी प्रशासनिक पहल शुरू की गई है। इस नई योजना के अंतर्गत ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से लागू करने के लिए जिले में बड़े पैमाने पर समूह सखियों की नियुक्ति की जाएगी, जो अन्य महिलाओं को इन समूहों का हिस्सा बनने और उन्हें वित्तीय सहायता दिलाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत आजमगढ़ में कुल 30,000 नए स्वयं सहायता समूहों (SHG) का गठन करने का लक्ष्य रखा गया है।
पात्र राशन कार्ड धारक परिवारों पर ध्यान
इस विस्तृत अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने एक ठोस रणनीति तैयार की है। इसके तहत जिले के योग्य और पात्र राशन कार्ड धारक परिवारों की महिलाओं को मुख्य रूप से इन स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। योजना का लाभ ग्राम पंचायत के हर एक वार्ड और अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए प्रत्येक गांव में एक समूह सखी का चयन किया जाएगा। आजमगढ़ की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उपायुक्त डॉ. आराधना त्रिपाठी ने इस संबंध में बताया कि समूह सखियों का प्राथमिक कार्य ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाना होगा। वे गांव-गांव जाकर महिलाओं को इन समूहों के फायदों के बारे में समझाएंगी और उन्हें इससे जुड़ने की पूरी प्रक्रिया में मदद करेंगी।
चयन की प्रक्रिया और योग्यता के मापदंड
समूह सखियों के चयन के लिए भी खास नियम तय किए गए हैं। उपायुक्त डॉ. आराधना त्रिपाठी के अनुसार, इन सखियों का चुनाव बाहर से न करके पहले से ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे स्वयं सहायता समूहों की सदस्य महिलाओं में से ही किया जाएगा। आमतौर पर हर पांच से दस सक्रिय समूहों के बीच में से एक योग्य और कुशल महिला को चुना जाएगा और उसे समूह सखी के रूप में कार्य करने का दायित्व सौंपा जाएगा। इस पद के लिए महिला उम्मीदवार का थोड़ा-बहुत पढ़ा-लिखा होना बेहद जरूरी है ताकि वह समूहों से संबंधित कागजी काम और अन्य प्रशासनिक लिखा-पढ़ी को आसानी से समझ सके। इसके साथ ही, आज के डिजिटल युग को देखते हुए उन्हें स्मार्टफोन चलाना भी आना चाहिए।
हर महीने मिलेगा निश्चित मानदेय
इस सामाजिक और आर्थिक जिम्मेदारी को निभाने के बदले में सरकार द्वारा समूह सखियों को उचित पारिश्रमिक दिया जाएगा। डॉ. आराधना त्रिपाठी ने बताया कि इस सेवा के लिए चयनित समूह सखियों को प्रत्येक माह 2,000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। यह कदम न केवल ग्रामीण महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर देगा, बल्कि उन्हें घर बैठे ही एक निश्चित आय का साधन भी उपलब्ध कराएगा। ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन की यह योजना बेहद कल्याणकारी सिद्ध होने वाली है।











