उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक बेहद दुखद तस्वीर सामने आई है। जिला अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों की कथित घोर लापरवाही के कारण एक बेबस बेटे को अपनी मृत मां के पार्थिव शरीर को अपनी गोद में उठाकर अस्पताल परिसर में भटकना पड़ा। अस्पताल प्रशासन की तरफ से मृतक महिला के शव को ले जाने के लिए एक अदद स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया गया। थक-हारकर परिजन मृतका के शव को एक ई-रिक्शा में लादकर अपने घर ले जाने को मजबूर हो गए। यह पूरी घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए थे मां-बेटे
इस पूरे मामले की शुरुआत एक भीषण सड़क दुर्घटना से हुई। मिली जानकारी के अनुसार, नंद नगरिया, कोतवाली सदर के रहने वाले महेंद्र अपनी मां के साथ बाइक पर सवार होकर घर लौट रहे थे। वह अपनी मां के लिए दवा लेने गए थे। शनिवार रात करीब 8 बजे जब वे चंदपा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आगरा-अलीगढ़ नेशनल हाईवे से गुजर रहे थे, तभी एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। इस जबरदस्त टक्कर में महेंद्र और उनकी 80 वर्षीय वृद्ध मां कनक प्यारी, जो कि मोहन लाल की पत्नी थीं, दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए। हादसे के तुरंत बाद दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।
उपचार के दौरान मां ने दम तोड़ा, शुरू हुई अस्पताल की संवेदनहीनता
अस्पताल में रातभर इलाज चलने के बाद भी वृद्ध महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार रविवार की दोपहर को कनक प्यारी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मां की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। इसके बाद जब कागजी कार्रवाई और शव को घर ले जाने की बात आई, तो परिजनों ने महिला के शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ मना कर दिया। दुख की इस घड़ी में परिवार को अस्पताल प्रशासन से सहानुभूति और मदद की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें सिर्फ उपेक्षा ही मिली।
गोद में मां का शव और ई-रिक्शा का सहारा
मां की मौत के बाद महेंद्र उनके शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान उसे अस्पताल के भीतर ही शव को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना था। उसने अस्पताल स्टाफ से स्ट्रेचर देने की गुहार लगाई, लेकिन वहां मौजूद किसी भी स्वास्थ्य कर्मी ने उसकी मदद नहीं की और स्ट्रेचर देने से मना कर दिया। बेबस बेटा अपनी मां के शव को अपनी गोद में उठाकर अस्पताल परिसर में खड़ा रहा और वाहन का इंतजार करता रहा। आखिरकार, जब कोई सरकारी मदद या शव वाहन नहीं मिला, तो लाचार परिजनों ने एक ई-रिक्शा का इंतजाम किया और मृतका के शव को उसी में रखकर अपने घर नंद नगरिया के लिए रवाना हो गए। स्वास्थ्य विभाग की इस उदासीनता ने सरकारी दावों की कलई खोलकर रख दी है।











