उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला रेवती थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक व्यक्ति की मौत के बाद पुलिस द्वारा शव को एंबुलेंस से जबरन छीनने की घटना सामने आई है। परिजन जब एंबुलेंस के जरिए शव को अपने घर ले जा रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने बीच रास्ते में गाड़ी को रोक लिया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने परिजनों के साथ हाथापाई करते हुए जबरन शव पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस अंतिम संस्कार को अपने तरीके से अंजाम देने के लिए अड़ी हुई थी। गाजीपुर बॉर्डर के पास पुलिस ने एंबुलेंस को पूरी तरह से कब्जे में ले लिया और भारी सुरक्षा के घेरे में शव को अपने साथ ले गई।
पुलिस की पिटाई का आरोप
मृतक के भाई कामाशंकर ने इस घटना के पीछे रेवती पुलिस की क्रूरता को जिम्मेदार ठहराया है। कामाशंकर के अनुसार, गांव के दो युवकों के बीच किसी विवाद के बाद पुलिस उनके घर पहुंची और उनके भाई को पकड़कर सीधे थाने ले गई। परिजनों का दावा है कि पुलिस कस्टडी के भीतर उनके भाई को बेरहमी से पीटा गया, जिसके कारण उनकी शारीरिक स्थिति बेहद खराब हो गई। रामाशंकर ने बताया कि जब उनके भाई की हालत संभलने लायक नहीं रही, तो पुलिस ने उन्हें एक बंधे के किनारे लावारिस हालत में छोड़ दिया। बाद में गांव के एक अन्य निवासी ने घायल वृद्ध को किसी तरह से उनके घर तक पहुंचाया।
अस्पताल में हुई मौत
परिवार ने तत्काल प्रभाव से घायल को उपचार के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बलिया जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने भी स्थिति को नाजुक बताते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए बीएचयू रेफर कर दिया। दुर्भाग्यवश, वहां उपचार के दौरान रात करीब 12 बजे वृद्ध ने अंतिम सांस ली और उनकी मृत्यु हो गई।











