उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां जीटी रोड के चौड़ीकरण कार्य के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। मुगलसराय बाजार में सड़क को चौड़ा करने के लिए वहां मौजूद एक प्राचीन काली मंदिर को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी अभियान के दौरान भारी-भरकम मलबा अचानक भरभराकर गिर गया, जिसके नीचे दबने से दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक मजदूर की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दूसरा व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। इस दुर्घटना के बाद से इलाके में भारी तनाव है और विकास कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दुर्घटना की वजह और घटनाक्रम
यह पूरा मामला मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत पीडीडी यू जंक्शन रेलवे स्टेशन के गेट के सामने का है। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का कार्य चल रहा था, जिसके दायरे में सड़क किनारे स्थित काली मंदिर आ रहा था। प्रशासन और स्थानीय लोगों की सहमति से मंदिर से मां काली की मूर्ति को पहले ही सुरक्षित रूप से निकालकर दूसरे स्थान पर स्थापित कर दिया गया था। इसके बाद मंदिर के ढांचे को ढहाने और वहां से मलबा हटाने का काम निजी निर्माण कंपनी ऐपको के कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा था। देर रात जब जेसीबी मशीन की मदद से मंदिर का भारी कंक्रीट का मलबा हटाया जा रहा था, तभी अचानक एक बड़ा हिस्सा ढह गया।
इस मलबे की चपेट में वहां काम कर रहे दो लोग आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों और कंपनी के अन्य कर्मचारियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे दोनों घायलों को बाहर निकाला। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बहादुरपुर गांव के रहने वाले और ऐपको कंपनी के मजदूर बलदेव यादव को मृत घोषित कर दिया। दूसरे घायल व्यक्ति की हालत नाजुक बनी हुई है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप
हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य करा रही कंपनी और लोक निर्माण विभाग (PWD) पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि जब इतना बड़ा ध्वस्तीकरण कार्य चल रहा था, तब सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। रात के समय चल रहे इस काम के दौरान न तो जीटी रोड पर ट्रैफिक को रोका गया था और न ही डाइवर्ट किया गया था। क्रेन और जेसीबी मशीनों के संचालन के दौरान आसपास सुरक्षा घेरा भी नहीं बनाया गया था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि PWD विभाग और ठेकेदार कंपनी की इस घोर लापरवाही के कारण ही एक गरीब मजदूर को अपनी जान गंवानी पड़ी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
इस संवेदनशील मामले पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सीधे तौर पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पीडीडी यू नगर के SDM राजीव सक्सेना से इस विषय पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने मजदूर बलदेव यादव की मौत की पुष्टि की। SDM राजीव सक्सेना ने बताया कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिस भी स्तर पर लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस घटना के बाद से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है और लोग पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं।











