उत्तर प्रदेश में आज 12 जुलाई 2026 से एक बड़े स्तर पर महावृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पर्यावरणीय मुहिम की आधिकारिक शुरुआत गोरखपुर की पावन धरा से करेंगे। यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के विकास और प्रकृति संरक्षण के संकल्प को दर्शाता है। इस महाभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में कुल 35 करोड़ पौधे रोपे जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो राज्य को हरित और समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की विशेषता
इस साल के वृक्षारोपण महायज्ञ को 'एक पेड़ मां के नाम' शीर्षक के साथ जोड़ा गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के माध्यम से कहा कि वृक्षारोपण एक ईश्वरीय कार्य है और यह सृष्टि की सेवा तथा मानवता की उपासना का एक स्वरूप है। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक अभियान में प्रदेश के 26 राजकीय विभाग मिलकर काम करेंगे। इस दिन के कार्यक्रमों में विशेष रूप से 'त्रिवेणी' का रोपण, 'विकास वाटिका' की स्थापना और किसानों को 'कार्बन क्रेडिट' प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा, मौलश्री के पौधों का रोपण भी मुख्य आकर्षण रहेगा, जिसका उद्देश्य प्रकृति को जनभागीदारी के एक उत्सव के रूप में प्रस्तुत करना है।
प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और भविष्य की राह
प्रकृति के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों का संरक्षण कोई मात्र औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उस पृथ्वी के प्रति आभार जताने का माध्यम है जिसने हमें जल, अन्न और प्राणवायु प्रदान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम नदियों को जीवनदायिनी और पृथ्वी को माता मानते हैं, इसलिए वृक्षारोपण हमारी परंपरा और कृतज्ञता का हिस्सा है। योगी ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस जन-महायज्ञ का हिस्सा बनें ताकि एक विकसित और समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण किया जा सके।
जनता से जुड़ने की अपील
अभियान के एक दिन पूर्व 11 जुलाई को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता के नाम संदेश जारी किया था। उन्होंने इस प्रयास को आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' आह्वान को अपने जीवन का संस्कार बनाने की सलाह दी। योगी ने कहा कि पौधा लगाना सृजन करने जैसा है और उसका संरक्षण करना हमारी संस्कृति का परिचायक है। प्रत्येक नागरिक द्वारा लगाया गया एक पौधा भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल छाया का आधार बनेगा, बल्कि प्राणवायु का मुख्य स्रोत भी होगा। उन्होंने पूरे प्रदेश से इस हरित क्रांति को एक जन आंदोलन बनाने की अपील की है ताकि विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार हो सके।











