आज़ादी की लड़ाई में अपनी अलग पहचान रखने वाला बागी बलिया, जिसे पांच साल पहले आज़ादी का तमगा मिला था, आज अपनी सड़कों की बदहाली पर आंसू बहा रहा है। शहर के भीतर से गुजरने वाली मिड्ढी मार्ग सड़क बलिया शहर, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे स्टेशन जैसे अहम ठिकानों को आपस में जोड़ती है, लेकिन आज यह गड्ढों से इस कदर पटी है कि यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की वजह से हालात इतने बिगड़े हैं।
हर बार बनती है सड़क, हर बार टूट जाती है
लोगों का सीधा आरोप है कि सड़क को जानबूझकर इस तरह बनाया जाता है कि वह जल्द टूट जाए, ताकि दोबारा मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने से पैसा निकाला जा सके। स्थानीय निवासियों के मुताबिक हर बार नई डामर बिछाई जाती है, लेकिन कुछ ही हफ्तों में वही पुरानी दरारें और गड्ढे फिर उभर आते हैं, जिससे मरम्मत का काम एक बार का समाधान बनने के बजाय बार-बार दोहराई जाने वाली प्रक्रिया बनकर रह गया है। ठेकेदारों की लापरवाही की वजह से यहां रोज कोई न कोई हादसा होता रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि गड्ढा मुक्त सड़क अभियान जैसी योजनाएं भी यहां बेअसर साबित हो रही हैं, जिससे यह सवाल भी उठने लगा है कि मरम्मत के नाम पर आवंटित पैसा असल में सही जगह खर्च हो भी रहा है या नहीं।
सीवर लाइन की खुदाई ने बढ़ाई मुसीबत
स्थानीय निवासी अजीत यादव के मुताबिक इस सड़क पर रोजाना हादसे होते हैं और घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से सीवर लाइन बिछाने के नाम पर लगातार खुदाई जारी है। सड़क की मरम्मत तो होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में वह फिर टूट जाती है। वहीं नलिन ओझा ने बताया कि कुछ महीने पहले ही इस सड़क का निर्माण हुआ था, मगर आज इसकी हालत खुद ही बयां कर रही है कि काम कैसा हुआ होगा।
बारिश में सड़क बनती है तालाब
बरसात के मौसम में यह पूरी सड़क पानी से लबालब भर जाती है, जिससे ई-रिक्शा और बाइक चालकों के लिए इस रास्ते से गुजरना बेहद मुश्किल हो जाता है। रजत सिंह का कहना है कि जब भी वह इस सड़क से गुजरते हैं, यहां या तो खुदाई चल रही होती है या निर्माण कार्य अधूरा पड़ा मिलता है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है।
गड्ढे इतने कि गिनती मुश्किल
शिवांश पांडेय ने बताया कि इस सड़क पर इतने गड्ढे हो चुके हैं कि उन्हें गिन पाना भी नामुमकिन है। उनका कहना है कि बारिश के बाद तो हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि यहां नाव चलानी पड़े, ऐसा लगता है। वहीं आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि सालों से सड़क की यही तस्वीर बनी हुई है और यहां इस तरह बार बार खुदाई होती है मानो कोई खजाना ढूंढा जा रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर महज दो किलोमीटर लंबी सड़क और नाले का निर्माण अब तक पूरा क्यों नहीं हो सका है।
सिर्फ मिड्ढी मार्ग नहीं, दूसरी सड़कें भी बदहाल
छाता के रहने वाले पुरुषोत्तम साहनी ने बताया कि सिर्फ मिड्ढी मार्ग ही नहीं, बल्कि सहतवार-बांसडीह मार्ग भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। उनके मुताबिक यहां हर वक्त कोई न कोई खुदाई चलती रहती है और खराब सड़क की वजह से लोग लगातार हादसों के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि लोगों को रोज-रोज की इस परेशानी से निजात मिल सके। इन दोनों सड़कों से जुड़े लोगों की बातों से साफ है कि यह समस्या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं, बल्कि लगातार खुदी और अधूरी पड़ी सड़कों का एक बड़ा पैटर्न बनती जा रही है, जिसकी शिकायत सालों से होती आ रही है।




















