असम सरकार ने राज्यभर के विद्यालयों में तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने के लिए समग्र शिक्षा, असम और कई प्रमुख संस्थानों के बीच छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूली शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक और छात्र-केंद्रित बनाना है, ताकि आने वाले समय में छात्रों को बेहतर और उन्नत शैक्षणिक माहौल मिल सके।
शिक्षकों के प्रशिक्षण और डिजिटल कौशल पर जोर
समझौता हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए असम के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने बताया कि इन साझेदारियों का मुख्य ध्यान शिक्षकों के पेशेवर विकास, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल, व्यक्तिगत शिक्षण, और स्कूल से बाहर रहने वाले किशोर-किशोर्ताओं की पहचान कर उन्हें फिर से शिक्षा से जोड़ने पर होगा। इन सभी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जाएगा ताकि जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव आ सके।
अलग-अलग संस्थानों के साथ खास साझेदारियां
गूगल एआई के साथ हुए समझौते के तहत शिक्षकों को उन्नत एआई-संचालित शैक्षणिक उपकरणों से लैस किया जाएगा और उन्हें पेशेवर विकास के नए अवसर प्रदान किए जाएंगे। वहीं, आईआईटी मद्रास और बोधन एआई के सहयोग से कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 1 लाख शिक्षकों को मई 2027 तक प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है, जिससे शिक्षकों में एआई की समझ को और गहरा किया जा सके।
इसके अलावा, लेह्स-वाधवानी एआई के साथ साझेदारी छात्रों के पढ़ने के प्रवाह का एआई-सक्षम आकलन करके बुनियादी साक्षरता को मजबूत करने पर काम करेगी। समग्र शिक्षा, असम और एजुकेट गर्ल्स के बीच हुआ समझौता विशेष रूप से बालिकाओं सहित स्कूल से बाहर रह रहे किशोरों की पहचान करने, उन्हें नामांकित करने और स्कूलों में उनकी निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
व्यक्तिगत शिक्षण और रचनात्मकता का विकास
एकस्टेप-एएक्सएल के साथ हुए समझौते के माध्यम से बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान में व्यक्तिगत और एआई-सहायता प्राप्त शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, कैनवा एजुकेशन के साथ हुई साझेदारी शिक्षकों और छात्रों दोनों के बीच डिजिटल साक्षरता, रचनात्मकता, डिजाइन थिंकिंग और नए नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर पूरी तरह केंद्रित होगी।
शिक्षा मंत्री रानोज पेगू का मानना है कि ये सभी सहयोग असम में एक तकनीकी रूप से सक्षम, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा तंत्र स्थापित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम हैं। इन सभी पहलों से न केवल शिक्षकों को अधिक सशक्त बनाया जाएगा, बल्कि राज्यभर के छात्रों के लिए सीखने के नए और विस्तृत अवसर भी पैदा होंगे।


















