नेपाल में आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। नेपाल के पर्यावरणीय संकट पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए भारत ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है और इसके ऐतिहासिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित देशों को आगे आकर कार्बन कटौती करनी चाहिए, फंड देना चाहिए और विकासशील राष्ट्रों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध करानी चाहिए। इस मुश्किल वक्त में भारत अपने पड़ोसी होने का फर्ज निभाते हुए नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और अब तक कुल 95 टन राहत सामग्री वहां भेज चुका है। विदेश मंत्रालय की तरफ से आई इस विस्तृत जानकारी ने एक तरफ अपनों की तलाश में जुटे परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, वहीं दूसरी तरफ तेजी से चल रहे राहत अभियानों ने उम्मीद की नई किरण भी दिखाई है।
भारत-नेपाल का संयुक्त अभियान और ताजा जमीनी हालात
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को जानकारी दी कि नेपाल में आपदा आने के बाद से अब तक 275 भारतीय नागरिकों का कोई सुराग नहीं मिला है और वे लापता हैं। भारत सरकार लगातार नेपाल सरकार, वहां के विदेश मंत्रालय तथा भारत के संबंधित राज्य प्रशासनों के साथ चौबीसों घंटे संपर्क साधे हुए है ताकि लापता लोगों का सटीक स्थान ट्रैक किया जा सके। इस चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान के दौरान नेपाली अधिकारियों की तरफ से मिल रहे भरपूर सहयोग की भारत ने खुले दिल से सराहना की है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय की ओर से सुरक्षित बचाए गए लोगों के नाम और सूचियां भी लगातार साझा की जा रही हैं ताकि उनके स्वजन को जानकारी मिल सके।
166 नागरिक सुरक्षित निकाले गए, तिब्बत रूट भी पूरी तरह साफ
नेपाल में चलाए जा रहे व्यापक बचाव अभियानों के फलस्वरूप अब तक कुल 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इसके अलावा, चीन और नेपाल की सीमा से होकर आने वाले 1,907 भारतीय नागरिक भी सुरक्षित रूप से नेपाल की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। चीन के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र यानी टीएआर में अब एक भी भारतीय यात्री या पर्यटक नहीं फंसा हुआ है और सभी को पूरी तरह सुरक्षित निकाल लिया गया है।
95 टन राहत सामग्री और बेली ब्रिज भेजने की पूरी तैयारी
नेपाल को उसकी आवश्यकता के अनुसार हर संभव सहायता प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारत अब तक 95 टन राहत सामग्री वहां पहुंचा चुका है। आने वाले दिनों में नेपाल की विशेष मांग पर अतिरिक्त फोरेंसिक किट जो डीएनए सैंपलिंग के काम आएंगी, टूटे हुए रास्तों और पुलों को जोड़ने के लिए बेली ब्रिज तथा अन्य आवश्यक साजो-सामान भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा, भारतीय सेना की विशेष सुरंग बचाव टीम भी आपदा स्थल पर डटकर काम कर रही है ताकि मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचा जा सके।
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत का दो टूक रुख
नेपाल के विदेश मंत्री द्वारा जलवायु परिवर्तन पर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि पर्यावरण में आ रहे बदलाव एक साझा चुनौती हैं। दुनिया के विकसित देशों की ऐतिहासिक रूप से कार्बन उत्सर्जन में सबसे बड़ी भूमिका रही है। इसलिए यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने उत्सर्जन में भारी कटौती करने की पहल करें और विकासशील देशों को इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय फंड और आधुनिक तकनीक मुहैया कराएं।


















