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मानसून की पहली फुहारों में ही डूबा ग्रेटर नोएडा का एजुकेशन हब, जलभराव और गड्ढों के कारण पचास हजार से अधिक छात्रों का जीना मुहालउत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले· 2

मानसून की पहली फुहारों में ही डूबा ग्रेटर नोएडा का एजुकेशन हब, जलभराव और गड्ढों के कारण पचास हजार से अधिक छात्रों का जीना मुहाल

ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-3 में मानसूनी बारिश ने ड्रेनेज सिस्टम और सड़कों की दयनीय स्थिति की पोल खोल दी है, जिससे आईआईएमटी कॉलेज के सामने की सड़क दलदल बन गई है और हजारों छात्र दुर्घटनाओं के साए में आवाजाही करने को मजबूर हैं।

राजेश कुमारराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता 5 मिनट पढ़ें AI के लिए
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उत्तर प्रदेश के हाईटेक और स्मार्ट शहर के रूप में प्रचारित ग्रेटर नोएडा की हकीकत मानसून की शुरुआती बारिश में ही पूरी तरह उजागर हो गई है। जिले के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माने जाने वाले नॉलेज पार्क-3 में सड़क प्रबंधन और पानी की निकासी के प्रशासनिक दावे पूरी तरह फेल साबित हो चुके हैं। यहाँ स्थित प्रसिद्ध आईआईएमटी कॉलेज के गेट नंबर-3 के ठीक सामने से गुजरने वाली डी-ब्लॉक सड़क बारिश के बाद किसी बड़े तालाब और दलदल में तब्दील हो गई है। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे पानी से लबालब भर चुके हैं, जिसकी वजह से स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और प्रतिदिन यहाँ से गुजरने वाले हजारों छात्र-छात्राओं को भयानक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि लोग अब किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं।

स्थानीय लोगों और दुकानदारों की मुश्किलें

इस बदहाली को लेकर क्षेत्र में रहने वाले लोगों में गहरा रोष है। स्थानीय निवासी आर्यन चौधरी ने बताया कि सड़क की जर्जर स्थिति के चलते अब सामने मौजूद दुकानों तक पैदल जाना भी किसी बड़ी चुनौती जैसा हो गया है। इस रास्ते से प्रतिदिन जूते, पेंट और अन्य व्यावसायिक सामानों का परिवहन होता है, लेकिन कीचड़ और गहरे गड्ढों की वजह से वाहनों का निकलना दूभर हो गया है। आर्यन के अनुसार, सड़क पर पानी भरे होने के कारण वाहन चालक अक्सर यह अंदाजा नहीं लगा पाते कि गड्ढा कितना गहरा है, जिससे आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी हों, कॉलेज के छात्र हों या फिर बाजार जाने वाले आम नागरिक, सभी के कपड़े गंदे पानी और कीचड़ के छींटों से खराब हो जाते हैं। इस मार्ग पर पहले भी कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक इसका कोई पक्का इलाज नहीं किया है।

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मानसून की एक ही बारिश में घुटनों तक पानी में डूबा मथुरा, सड़कों पर मचा हाहाकार

स्मार्ट सिटी के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर

क्षेत्र के एक अन्य निवासी सूर्यांश प्रताप सिंह ने इस अव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा को कागजों पर एक आधुनिक और हाईटेक शहर बताया जाता है, मगर नॉलेज पार्क की इस दुर्दशा को देखकर कोई भी इस बात पर विश्वास नहीं करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस सड़क के आसपास बड़े-बड़े बिल्डर स्टूडियो, आधुनिक अपार्टमेंट, रिहायशी फ्लैट और कई निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसके बावजूद, सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी सुविधा यानी एक अच्छी सड़क और ड्रेनेज सिस्टम का यहाँ नामोनिशान नहीं है। विकास के बड़े-बड़े विज्ञापनों और दावों के बीच यह कीचड़ और जलभराव सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता का प्रमाण है।

पानी के नीचे छिपे हैं गहरे हादसे

नॉलेज पार्क-3 में ही रहने वाले वीर बहादुर सिंह ने भी सड़क की इस गंभीर स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि जब भी थोड़ी सी भी बारिश होती है, तो यह पूरी सड़क तालाब का रूप ले लेती है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों में गंदा पानी भर जाने के कारण यह पता लगाना नामुमकिन हो जाता है कि सड़क कहाँ समाप्त हो रही है और जानलेवा गड्ढा कहाँ से शुरू हो रहा है। ऐसे में दोपहिया वाहनों के फिसलने का खतरा हर पल बना रहता है और पैदल चलने वाले राहगीर भी लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं। राहगीरों की सुरक्षा यहाँ पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दी गई है।

छात्रों का सबसे बड़ा नुकसान और कठिनाइयाँ

इस पूरे संकट का सबसे बुरा प्रभाव यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। स्थानीय छात्र अभिषेक ने बताया कि मानसून के आते ही छात्रों की पढ़ाई और दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। छात्र अपने कमरों या हॉस्टल से साफ-सुथरे कपड़े पहनकर सुबह कॉलेज के लिए रवाना होते हैं, लेकिन कैंपस के मुख्य द्वार तक पहुँचने से पहले ही उनके कपड़े और जूते कीचड़ तथा गंदे नाली के पानी से सन जाते हैं। बारिश के दिनों में इस सड़क को पार करना एक जंग जीतने जैसा होता है। कई बार छात्र कीचड़ में पैर फिसलने के कारण गिर जाते हैं, जिससे न केवल उनके कीमती दस्तावेज और बैग खराब होते हैं, बल्कि उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें भी आती हैं।

पचास हजार से अधिक छात्रों का भविष्य संकट में

इस शैक्षणिक संस्थान के प्रोफेसर आर.बी. सिंह ने बताया कि मानसून के दस्तक देने के दूसरे ही दिन नॉलेज पार्क की प्रशासनिक व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढहती हुई नजर आई। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नॉलेज पार्क का यह पूरा क्षेत्र एक विशाल एजुकेशनल हब है, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 50 हजार से अधिक छात्र निवास करते हैं। यहाँ कॉलेज परिसरों के भीतर और बाहर दर्जनों की संख्या में बड़े-बड़े हॉस्टल और पीजी बने हुए हैं। इतनी विशाल छात्र आबादी और देश के भविष्य को संवारने वाले इस इलाके में सड़क, ड्रेनेज और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का इस कदर बदहाल होना बेहद शर्मनाक है। प्रोफेसर सिंह के अनुसार, बारिश शुरू होते ही पूरा इलाका टापू जैसा दिखने लगता है और कई जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। सरकारी अमला और विकास प्राधिकरण के अधिकारी हमेशा बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर के खोखले दावे करते हैं, परंतु धरातल की सचाई इसके बिल्कुल उलट है। अगर जल्द ही इस सड़क का पुनरुद्धार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यहाँ कोई जानलेवा दुर्घटना घटित हो सकती है।

प्रशासनिक उपेक्षा और पूर्व चेतावनियों का अनसुना होना

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र ग्रेटर नोएडा का मुख्य दिल है, जहाँ हर रोज हजारों की संख्या में छात्र, शिक्षक, वैज्ञानिक और प्रशासनिक कर्मचारी आते-जाते हैं। ऐसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र की उपेक्षा करना आम जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। इस समस्या के बारे में पहले भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के GM Project ए.के. सिंह को सीधे तौर पर अवगत कराया जा चुका था। इसके बावजूद प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और सड़क की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। नतीजतन, मानसून शुरू होते ही एक बार फिर पूरा इलाका गंभीर संकट से घिर गया है। स्थानीय लोगों ने अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से पुरजोर मांग की है कि गड्ढों को तुरंत भरकर सड़क को चलने योग्य बनाया जाए और पानी की निकासी के लिए एक मजबूत और स्थायी ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण किया जाए, ताकि इस नारकीय स्थिति से हमेशा के लिए निजात मिल सके।

इसका आप पर असर

  • भारत में: यह घटना देश भर के तेजी से बढ़ते शैक्षणिक और शहरी केंद्रों में लचर बुनियादी ढांचे और जल निकासी प्रणालियों की गंभीर स्थिति को दर्शाती है।
  • ग्रेटर नोएडा में: नॉलेज पार्क-3 और उसके आसपास रहने वाले पचास हजार से अधिक छात्रों और स्थानीय निवासियों को जलभराव और सड़क के गहरे गड्ढों के कारण गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।
राजेश कुमार
लेखक के बारे मेंराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता उतार प्रदेश
विशेषज्ञताभारत समाचार, राजनीति, सरकारी नीति, अर्थव्यवस्था, ब्रेकिंग न्यूज़, संसद, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, बुनियादी ढाँचा, राष्ट्रीय मामले

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो पूरे भारत की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़ी घटनाओं को कवर करते हैं। वे राष्ट्रीय मामलों पर समय पर और भरोसेमंद रिपोर्टिंग देते हैं।

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो भारत की राष्ट्रीय ख़बरों — राजनीति, शासन, अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और देशभर की बड़ी घटनाओं — में विशेषज्ञता रखते हैं। वे भारत के राजनीतिक परिदृश्य, नीतिगत फ़ैसलों, आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक बदलावों को आकार देने वाली प्रमुख घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, गहराई और संतुलित रिपोर्टिंग पर ज़ोर देते हुए राजेश अहम राष्ट्रीय मुद्दों और नागरिकों पर उनके असर का गहन विश्लेषण देते हैं। उनकी कवरेज में सरकारी योजनाएँ, संसदीय मामले, चुनाव, क्षेत्रीय घटनाक्रम और भारत के महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक रुझान शामिल हैं।

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