राम मंदिर में हुए दान चोरी प्रकरण की जांच अब एक नए चरण में पहुंच चुकी है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को रात के अंधेरे में कड़ी सुरक्षा के बीच लवकुश के घर ले जाकर विस्तृत पड़ताल की। इसके अतिरिक्त, इन तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित जौरा क्षेत्र ले जाया गया। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इसी स्थान पर चोरी की गई नकदी को इकट्ठा करके आपस में विभाजित किया जाता था।
जांच का दायरा और छापेमारी
एसआईटी की टीम ने अयोध्या के मिल्कीपुर इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान अनुकल्प मिश्रा से जुड़े रिश्तेदारों के घरों, एक स्थानीय सर्राफा व्यापारी की दुकान और इनायतनगर में निर्माण सामग्री बेचने वाले एक कारोबारी के परिसरों पर छापे मारे गए। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपियों ने जो संपत्ति या वस्तुएं खरीदी हैं, उनके लिए भुगतान का तरीका क्या था। क्या यह लेन-देन नकदी के रूप में हुआ या फिर डिजिटल भुगतान का सहारा लिया गया, इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दान की गणना और सुरक्षा व्यवस्था की खामियां
विशेष जांच दल अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खर्चों से संबंधित सभी बिलों और वाउचरों का बारीकी से विश्लेषण कर रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पिछले 40 दिनों के भीतर चोरी की करीब 70 संदिग्ध घटनाएं हो सकती हैं। पुलिस इस बात की भी समीक्षा कर रही है कि मंदिर परिसर में दान राशि की गिनती की वर्तमान प्रक्रिया क्या थी और सुरक्षा में कहां-कहां चूक हुई। इसके साथ ही, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला, जो पिछले 10 वर्षों से एक योग केंद्र में रह रहा था, की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। अब तक इस मामले में कुल आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, और पुलिस लाइन में आरोपियों से लगातार पूछताछ का सिलसिला जारी है। हाल ही में इन आरोपियों को पहचान के लिए नाका चुंगी भी ले जाया गया था।











