नोएडा के सेक्टर 94 में यमुना नदी के तट पर विकसित हो रही गगनचुंबी इमारत सुपरनोवा एक बार फिर लोगों के ध्यान के केंद्र में आ गई है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर स्थित इस विशाल निर्माण स्थल पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक व्यक्ति ने इस इमारत की 43वीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। निर्माण की धीमी गति और कानूनी अड़चनों के कारण अक्सर विवादों में घिरी रहने वाली यह संरचना इस दुखद घटना के बाद अपनी असाधारण ऊंचाई और भव्य वास्तुशिल्प को लेकर नए सिरे से चर्चा का विषय बन गई है।
उत्तर प्रदेश की सबसे ऊंची गगनचुंबी इमारत का पैमाना
नोएडा में स्थित यह बहुमंजिला संरचना उत्तर प्रदेश की सबसे ऊंची और समूचे भारत की दूसरी सबसे ऊंची इमारत मानी जाती है। करीब 300 मीटर की ऊंचाई छूने वाली यह विशालकाय इमारत ऐतिहासिक कुतुबमीनार से लगभग चार गुना ज्यादा ऊंची है, जिसकी कुल ऊंचाई 72.5 मीटर दर्ज है। देश भर में इससे अधिक ऊंचाई केवल लोखंडवाला में स्थित 301 मीटर ऊंची इमारत की है। इस पूरे प्रोजेक्ट का खाका ब्रिटेन की प्रसिद्ध वास्तुकला फर्म बेनॉय ने तैयार किया है।
यह परियोजना लगभग 17.5 एकड़ के विशाल भूभाग में फैली हुई है, जिसमें कुल 5 टॉवर खड़े किए जाने हैं। इस बहुउद्देशीय परिसर को एक कॉमन पोडियम मॉडल पर डिजाइन किया गया है, जहां केवल रिहायशी इकाइयां ही नहीं बल्कि कॉरपोरेट ऑफिस, लक्जरी विला, प्रीमियम होटल और रिटेल दुकानें भी एक ही छत के नीचे विकसित की जा रही हैं।
14 साल का लंबा सफर और दिवालिया प्रक्रिया
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला साल 2012 में रखी गई थी, लेकिन पिछले 14 वर्षों के दौरान निर्माण कार्य कई गंभीर रुकावटों का शिकार हुआ। इसे विकसित करने वाली रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक ने वित्तीय संकटों के चलते काम बीच में ही रोक दिया था। डेवलपर कंपनी पर 1,500 करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद मामला अदालत की चौखट तक पहुंच गया।
अदालती कार्यवाही के दौरान कंपनी को दिवालिया घोषित किया गया। इसके बाद साल 2024 में दिवालिया प्रक्रिया के औपचारिक आगाज के साथ ही इस अटके प्रोजेक्ट पर अदालत की प्रत्यक्ष निगरानी में दोबारा निर्माण शुरू कराया गया। इस अदालती हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य रुके हुए निर्माण को पूरा कर खरीदारों को उनकी संपत्तियां सौंपना है।
80 मंजिला टॉवर का आंतरिक स्वरूप और संपत्तियों के दाम
प्रारंभिक योजना के तहत सुपरनोवा को महज 68 मंजिलों तक सीमित रखा जाना था, जिसे बाद में संशोधित करके करीब 80 मंजिलों तक विस्तारित किया गया। इमारत की 46वीं और 58वीं मंजिल के बीच आधुनिक कॉर्पोरेट दफ्तर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। वहीं 59वीं से लेकर 66वीं मंजिल तक अल्ट्रा-लक्जरी विला तैयार किए जा रहे हैं। इन विशाल विला का क्षेत्रफल लगभग 5,200 वर्गफुट रखा गया है, जिनकी बालकनियों से यमुना नदी का विस्तृत विहंगम दृश्य साफ दिखाई पड़ता है।
इस गगनचुंबी टॉवर में आवासीय संपत्तियों के दाम भी उनकी भव्यता के अनुरूप तय किए गए हैं। सुपरनोवा में लगभग 600 वर्गफुट क्षेत्रफल वाले 1बीएचके फ्लैट की शुरुआती कीमत करीब 1 करोड़ रुपये रखी गई है, जो इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सबसे महंगी रियल एस्टेट संपत्तियों में शामिल करती है।



















